3 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

केरल में एसएफआई की कैंपस वापसी, लेकिन पीएससी भर्ती विवाद पर चुप्पी से उठे सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
केरल में एसएफआई की कैंपस वापसी, लेकिन पीएससी भर्ती विवाद पर चुप्पी से उठे सवाल

सारांश

केरल में कांग्रेस सरकार आते ही एसएफआई कैंपस में लौट आई — लेकिन पीएससी भर्ती घोटाले पर चुप है, जो सीधे उन्हीं युवाओं को प्रभावित करता है जिनका प्रतिनिधित्व संगठन करने का दावा करता है। यह चुप्पी राजनीतिक सुविधा और छात्र हितों के बीच के अंतर्विरोध को उजागर करती है।

मुख्य बातें

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने केरल में कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद कालीकट, कलाडी और केरल विश्वविद्यालय सहित कई परिसरों में विरोध प्रदर्शन शुरू किए।
कोच्चि के महाराजा कॉलेज में एसएफआई कार्यकर्ताओं ने उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम.
जॉन का दीक्षांत समारोह में विरोध किया।
पीएससी भर्ती विवाद में SIT ने चेयरमैन एम.आर.
बैजू और तीन अन्य सदस्यों से पूछताछ की; एक वरिष्ठ अधिकारी और पूर्व कर्मचारी गिरफ्तार।
पीएससी के 16 में से 12 सदस्यों को नोटिस जारी, ये सभी पूर्व विजयन सरकार के कार्यकाल में नियुक्त हुए थे।
पीएससी विवाद पर एसएफआई की चुप्पी ने आलोचकों के सवाल बढ़ाए, क्योंकि यह मुद्दा सीधे युवा नौकरी अभ्यर्थियों को प्रभावित करता है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की छात्र इकाई, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), केरल में सत्ता परिवर्तन के बाद एक बार फिर विश्वविद्यालय परिसरों में सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के सत्ता में आते ही एसएफआई ने विरोध का रुख अख्तियार कर लिया है — परंतु पब्लिक सर्विस कमीशन (पीएससी) भर्ती विवाद पर संगठन की खामोशी ने व्यापक सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैंपस में एसएफआई की वापसी

कालीकट, कलाडी और केरल विश्वविद्यालय सहित कई परिसरों में एसएफआई के प्रदर्शनों की खबरें सामने आई हैं, जिनमें से कुछ पुलिस के साथ झड़पों में तब्दील हुईं। पिछले हफ्ते कोच्चि के महाराजा कॉलेज में हुई एक घटना विशेष रूप से चर्चा में रही, जब राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन एक दीक्षांत समारोह में पहुँचे तो एसएफआई कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा।

गौरतलब है कि पिनाराई विजयन सरकार के दौरान एसएफआई के विरोध प्रदर्शन काफी सीमित थे। उस दौर का एकमात्र उल्लेखनीय अपवाद तत्कालीन राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान — जो राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी थे — के खिलाफ चलाया गया आंदोलन था। यह ऐसे समय में आया है जब सतीशन सरकार और गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इस तरह के प्रदर्शनों पर कड़ा रुख अपनाया है।

पीएससी विवाद की पृष्ठभूमि

केरल पब्लिक सर्विस कमीशन की भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं की जाँच पहले ही तेज हो चुकी है। अब तक कमीशन के एक वरिष्ठ अधिकारी और एक पूर्व कर्मचारी को गिरफ्तार किया जा चुका है।

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने पीएससी चेयरमैन एम.आर. बैजू और तीन अन्य सदस्यों से पूछताछ की है। 16 सदस्यीय कमीशन के शेष 12 सदस्यों — जिन्हें पूर्व विजयन सरकार के दौरान नियुक्त किया गया था — को भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

एसएफआई की चुप्पी पर सवाल

आलोचकों का कहना है कि यह विवाद उस भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता से सीधे जुड़ा है जिस पर हजारों युवा सरकारी नौकरियों के लिए निर्भर हैं। यह वही वर्ग है जिसका प्रतिनिधित्व करने का एसएफआई दावा करता है — छात्र और नौकरी की तलाश में जुटे युवा।

यह ऐसी स्थिति है जहाँ संगठन की प्राथमिकताएँ स्पष्ट रूप से परखी जा रही हैं। जब सत्ता विपक्ष में रहने वाली पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार से जुड़े मुद्दे पर बोलने का वक्त आए, तो संगठन की प्रतिक्रिया — या उसकी अनुपस्थिति — एक राजनीतिक संदेश देती है।

आम जनता और युवाओं पर असर

पीएससी भर्ती प्रक्रिया केरल में सरकारी नौकरियों का प्राथमिक द्वार है। कथित गड़बड़ियाँ न केवल चयन की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न करती हैं, बल्कि उन हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को भी प्रभावित करती हैं जो वर्षों की तैयारी के बाद परीक्षाओं में बैठते हैं। यह मुद्दा इसलिए और संवेदनशील है क्योंकि जाँच के दायरे में आए अधिकांश सदस्य पिछली वामपंथी सरकार के कार्यकाल में नियुक्त हुए थे।

आगे क्या होगा

SIT की जाँच जारी है और माना जा रहा है कि आने वाले हफ्तों में और गिरफ्तारियाँ या पूछताछ हो सकती है। इस बीच, कैंपस राजनीति में एसएफआई की नई आक्रामकता और पीएससी विवाद पर उसकी चुप्पी के बीच की खाई पर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या संगठन अपने लाखों समर्थकों के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर अंततः कोई स्पष्ट रुख अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अपनी मातृ-पार्टी से जुड़े मुद्दों पर उतना ही मौन। पीएससी विवाद इसकी सबसे तीखी परीक्षा है, क्योंकि इसमें वही युवा अभ्यर्थी प्रभावित हैं जिनके बल पर एसएफआई अपनी प्रासंगिकता का दावा करता है। जब भर्ती में हेरफेर के आरोप पूर्व सरकार के नियुक्त अधिकारियों पर हों, तो छात्र संगठन की खामोशी एक राजनीतिक स्वीकृति जैसी दिखती है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है, वह यह है कि यह चुप्पी संगठन की वैचारिक विश्वसनीयता पर दीर्घकालिक असर डाल सकती है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में एसएफआई अचानक फिर से सक्रिय क्यों हो गई?
केरल में कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन के मुख्यमंत्री बनने के बाद एसएफआई ने विश्वविद्यालय परिसरों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। पिनाराई विजयन की वामपंथी सरकार के दौरान संगठन के प्रदर्शन काफी सीमित थे, और सत्ता परिवर्तन के साथ इसकी आक्रामकता लौट आई है।
केरल पीएससी भर्ती विवाद क्या है?
केरल पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षाओं और नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं की जाँच चल रही है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने पीएससी चेयरमैन एम.आर. बैजू और तीन अन्य सदस्यों से पूछताछ की है, और एक वरिष्ठ अधिकारी सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पीएससी विवाद पर एसएफआई की चुप्पी क्यों चर्चा में है?
पीएससी विवाद सीधे उन युवा नौकरी अभ्यर्थियों को प्रभावित करता है जिनका प्रतिनिधित्व एसएफआई करने का दावा करता है। जाँच के दायरे में आए अधिकांश पीएससी सदस्य पूर्व विजयन सरकार के कार्यकाल में नियुक्त हुए थे, इसलिए एसएफआई की खामोशी को राजनीतिक सुविधा से प्रेरित माना जा रहा है।
महाराजा कॉलेज कोच्चि में क्या हुआ था?
राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन जब कोच्चि के महाराजा कॉलेज में एक दीक्षांत समारोह में पहुँचे, तो एसएफआई कार्यकर्ताओं ने उनका विरोध किया। यह घटना सतीशन सरकार के कार्यकाल में कैंपस राजनीति में आए बदलाव का प्रतीक मानी जा रही है।
पीएससी विवाद में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
SIT ने पीएससी चेयरमैन एम.आर. बैजू और तीन सदस्यों से पूछताछ की है। एक वरिष्ठ अधिकारी और एक पूर्व कर्मचारी को गिरफ्तार किया जा चुका है, और 16 सदस्यीय कमीशन के 12 सदस्यों को नोटिस जारी किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले