केरल: मंत्री शिबू बेबी जॉन ने राज्यपाल की पीएससी बर्खास्तगी सिफारिश और ईडी की कार्रवाई पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
केरल के वन मंत्री और राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी (आरएसपी) नेता शिबू बेबी जॉन ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को राज्यपाल द्वारा लोक सेवा आयोग (पीएससी) के सदस्यों को सामूहिक रूप से बर्खास्त करने की सिफारिश पर कड़े सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने तिरुवनंतपुरम में पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के पीछे राजनीतिक मकसद होने का आरोप लगाया। इन टिप्पणियों की अहमियत इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि ये सत्ताधारी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) गठबंधन के भीतर से ही आई हैं।
राज्यपाल की सिफारिश पर संवैधानिक प्रश्न
मंत्री शिबू बेबी जॉन ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल ने किस संवैधानिक शक्ति के तहत पीएससी सदस्यों की सामूहिक बर्खास्तगी की सिफारिश की, यह अस्पष्ट है। उन्होंने कहा कि पीएससी एक संवैधानिक संस्था है, जो सरकारी सेवाओं में भर्ती की प्रक्रिया संचालित करती है, और मनमानी कार्रवाई के ज़रिये ऐसी संस्थाओं को कमज़ोर करने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने जोर दिया कि आरएसपी राज्यपाल के इस रुख से पूरी तरह असहमत है और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा होनी चाहिए।
ईडी की कार्रवाई के समय पर उठे सवाल
मंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से जुड़े मामले में ईडी की हालिया सक्रियता के समय पर भी सवाल खड़े किए। उनके अनुसार, लंबे समय तक जांच में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई और अब अचानक कदम उठाना संदेह पैदा करता है।
जॉन ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियां पिछली पिनाराई सरकार के कार्यकाल में इस मामले को आगे बढ़ाने में विफल रहीं और अब नए सिरे से की गई कार्रवाई के पीछे स्पष्ट राजनीतिक मकसद नज़र आता है। उन्होंने कहा, 'एजेंसी की यह जांच महज एक दिखावा बनकर रह गई है।'
यूडीएफ सरकार का रुख
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यूडीएफ सरकार केंद्रीय एजेंसी द्वारा अपनाई गई राह पर आँख मूँदकर नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि जनता ने यूडीएफ सरकार को ईडी के निर्देशों के अनुसार काम करने के लिए नहीं चुना था, बल्कि सरकार को संवैधानिक सिद्धांतों और जनभावनाओं के आधार पर फैसले लेने होंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में संवैधानिक अधिकारियों, केंद्रीय जांच एजेंसियों और चुनी हुई राज्य सरकार के बीच तनाव लगातार सुर्खियों में है।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि केरल में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच टकराव कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों से लेकर विधेयकों को मंजूरी देने तक कई मुद्दों पर दोनों के बीच खींचतान देखी गई है। पीएससी को लेकर उठा ताज़ा विवाद इसी कड़ी का हिस्सा है।
वहीं, ईडी की जांच के राजनीतिक उद्देश्य होने के आरोप भी देशभर में विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर लगाए जाते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का समय और दायरा अक्सर राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार तय होता दिखता है।
आगे क्या होगा
फिलहाल यह देखना होगा कि राज्यपाल की सिफारिश पर केंद्र सरकार क्या रुख अपनाती है और क्या पीएससी मामले में कोई न्यायिक हस्तक्षेप होता है। ईडी की जांच की दिशा और उसकी अगली कार्रवाई भी केरल की सियासत में नए मोड़ ला सकती है।