एसआरएफटीआई विवाद: जॉन ब्रिटास ने वैष्णव और सुरेश गोपी से माँगा तत्काल हस्तक्षेप, 6 छात्र निष्कासित
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने 22 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा केंद्रीय राज्य मंत्री एवं सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) के अध्यक्ष सुरेश गोपी को औपचारिक पत्र लिखकर कोलकाता स्थित इस प्रतिष्ठित फिल्म संस्थान में जारी विवाद में तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। ब्रिटास ने कहा कि संस्थान का संकट छात्रों की सुरक्षा, शैक्षणिक माहौल और संस्था की लोकतांत्रिक एवं बहुलतावादी पहचान के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
घटनाक्रम की शुरुआत 27 सितंबर को हुई, जब परिसर में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (एबीजीपी) के एक कार्यक्रम के दौरान टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई। आरोप है कि इस दौरान छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और कुछ छात्रों पर हमला भी हुआ।
इसके बाद 4 अक्टूबर को तनाव और गहरा हो गया, जब कथित तौर पर हिंदू जागरण मंच के सदस्यों ने परिसर के आसपास मार्च निकाला। आरोप है कि इस दौरान छात्रों की ओर पत्थर और बोतलें फेंकी गईं। ब्रिटास ने इन दोनों घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इन्होंने देश के एक प्रतिष्ठित फिल्म संस्थान के बहुलतावादी मूल्यों पर सीधा आघात पहुँचाया है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
सांसद ब्रिटास ने संस्थान प्रशासन पर दोहरी विफलता का आरोप लगाया। उनके अनुसार, प्रशासन एक तरफ छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रहा, और दूसरी तरफ बाद में विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर स्थिति को और गंभीर बना दिया।
उन्होंने बताया कि कुछ कर्मचारियों द्वारा छात्रों को यह निर्देश दिए जाने की खबरें आई हैं कि उन्हें किस भाषा में बात करनी चाहिए — जो उनके अनुसार भाषाई सम्मान और शैक्षणिक बहुलतावाद पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
छात्रों पर कार्रवाई और अनिश्चितकालीन धरना
विवाद के बाद 6 छात्रों को संस्थान से निष्कासित किया जा चुका है, जबकि अन्य छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इन कार्रवाइयों के विरोध में छात्र अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं, जिससे कक्षाएँ और प्रायोगिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में प्रशासन और छात्रों के बीच तनाव की घटनाएँ बढ़ी हैं। गौरतलब है कि एसआरएफटीआई भारत के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है और इसकी पहचान विविधता एवं कलात्मक स्वतंत्रता से रही है।
ब्रिटास की प्रमुख माँगें
ब्रिटास ने अपने पत्र में कई ठोस माँगें रखी हैं: 27 सितंबर और 4 अक्टूबर की घटनाओं की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच, छात्रों के खिलाफ सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की तत्काल वापसी, और छात्र संघ प्रतिनिधियों के साथ संवाद की बहाली।
इसके अलावा उन्होंने छात्रावास सुविधाओं की बहाली, घायल छात्रों के लिए चिकित्सा सहायता, और आंदोलन के कारण प्रभावित कक्षाओं एवं प्रायोगिक कार्यों को पुनर्निर्धारित करने की भी माँग की। उन्होंने कहा कि सिनेमा शिक्षा और कलात्मक स्वतंत्रता के लिए समर्पित कोई भी संस्थान भय और दबाव का केंद्र नहीं बनना चाहिए।
आगे क्या होगा
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और सुरेश गोपी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। धरने पर बैठे छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ब्रिटास का यह पत्र संसदीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाने का पहला औपचारिक कदम है, और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्रतिक्रिया की संभावना है।