श्रीनगर के बेमिना में भीषण आग: 80 अस्थायी शेल्टर राख, दो स्क्रैप कलेक्टरों की मौत
सारांश
मुख्य बातें
श्रीनगर के बेमिना इलाके में 4 नवंबर 2026 की देर रात लगी भीषण आग में दो स्क्रैप कलेक्टरों की मौत हो गई और तिरपाल व लकड़ी से बने करीब 80 अस्थायी शेल्टर जलकर खाक हो गए। दुर्बल क्षेत्र में हुई इस त्रासदी में मृतक दिल्ली के निवासी थे, जो यहाँ कूड़ा-कबाड़ बटोरने का काम करते थे।
मुख्य घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, आग रात करीब 12:23 बजे भड़की और देखते-देखते पूरे बस्ती क्षेत्र में फैल गई। आग ने तिरपाल और लकड़ी से निर्मित करीब 80 अस्थायी ढाँचों को अपनी चपेट में ले लिया। इसके साथ ही एक खाली पोल्ट्री फार्म और एक टिपर वाहन भी जलकर क्षतिग्रस्त हो गया।
चश्मदीदों ने बताया कि दमकल विभाग को सूचना मिलने से पहले ही आग तेज़ी से फैल चुकी थी। फायर स्टेशन जेवीसी और रावलपोरा से दमकल गाड़ियाँ, तथा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज हेडक्वार्टर बटमालू से अतिरिक्त दल मौके पर पहुँचे और आग पर काबू पाया।
मृतकों की पहचान
आग बुझने के बाद मलबे की तलाशी में दो शव मिले। मृतकों की पहचान मोहम्मद नूर आलम (27 वर्ष) और अल अमीन (16 वर्ष) के रूप में हुई — दोनों दिल्ली के निवासी थे और बेमिना के दुर्बल क्षेत्र में स्क्रैप संग्रह का काम करते थे।
अधिकारियों ने बताया कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की कार्रवाई पूरी होने के बाद दोनों शव स्थानीय पुलिस को सौंप दिए गए हैं। पुलिस ने घटना में मामला दर्ज कर लिया है।
आग लगने का कारण अज्ञात
अधिकारियों के अनुसार, आग लगने की सटीक वजह अभी तक सामने नहीं आई है और जाँच जारी है। यह ऐसे समय में हुआ है जब घाटी में सूखे मौसम के चलते आग की घटनाएँ बढ़ जाती हैं। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में 80 से 95 प्रतिशत आग की घटनाएँ मानवीय लापरवाही से होती हैं।
गौरतलब है कि बिना देखरेख के जलाए गए कैंपफायर, लापरवाही से फेंके गए सिगरेट के टुकड़े, खेतों की अनियंत्रित आग, और बिजली लाइनों की खराबी इस तरह की दुर्घटनाओं के सामान्य कारणों में शामिल हैं।
आम जनता पर असर
इस आग ने उन प्रवासी मज़दूरों की स्थिति को उजागर किया है जो अनौपचारिक और कच्चे ढाँचों में रहते हैं और आग जैसी आपदा में सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। बेमिना जैसे इलाकों में इस तरह की बस्तियों में अग्नि सुरक्षा का अभाव एक गंभीर चिंता का विषय है।
क्या होगा आगे
पुलिस और फॉरेंसिक टीम द्वारा आग की जाँच जारी है। आग लगने की वजह स्पष्ट होने के बाद अगली कार्रवाई तय होगी। कश्मीर में सर्दियों की दस्तक से पहले ऐसी अनौपचारिक बस्तियों में अग्नि सुरक्षा उपायों की ज़रूरत फिर से चर्चा में आ सकती है।