BJP प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर हमला: 'अराजकता और विभाजन फैलाने की कोशिश'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने 11 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति ईर्ष्या और कुंठा के चलते सरकार पर निराधार आरोप लगा रहे हैं। त्रिवेदी के अनुसार, देश में अराजकता और विभाजन का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है, जबकि मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक मंच पर लगातार मजबूत होता जा रहा है।
नीट और तमिल भाषा पर आरोपों का खंडन
त्रिवेदी ने राहुल गांधी के उस दावे को सिरे से खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि नीट (NEET) के ज़रिए तमिल भाषा पर हमला किया जा रहा है। BJP प्रवक्ता ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में तमिल भाषा, संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मान दिलाने के ठोस कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने उदाहरण के तौर पर नए संसद भवन में सेंगोल की स्थापना का ज़िक्र किया और कहा कि यह तमिल संस्कृति की प्राचीन और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है। उनके अनुसार, उस समय कांग्रेस (INC) ने इस कदम का विरोध किया था।
तमिल संस्कृति संरक्षण के हवाले
त्रिवेदी ने तमिल भाषा और विरासत के संरक्षण से जुड़े कई उपायों की सूची गिनाई। उन्होंने चेन्नई में शास्त्रीय तमिल संस्थान की स्थापना का उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि 16 मई 2026 को हेग से चोल वंश की ताम्रपत्र सामग्री वापस भारत लाई गई।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सितंबर 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में सुब्रमण्यम भारती पीठ की स्थापना की थी। त्रिवेदी के अनुसार, महाबलीपुरम में प्रधानमंत्री और चीनी राष्ट्रपति की मुलाकात ने भी भारत-चीन के बीच सांस्कृतिक संबंधों को नया आयाम दिया। उन्होंने पल्लव-कालीन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि बोधिधर्म तमिल क्षेत्र से ही चीन गए थे और वहाँ उन्हें व्यापक पहचान मिली।
भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर जोर
त्रिवेदी ने राहुल गांधी के 'स्मैश द पैट्रिआर्की' (पितृसत्ता समाप्त करो) संबंधी बयान का उल्लेख करते हुए भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति की उपासना की परंपरा को रेखांकित किया। उन्होंने नवरात्रि को इसका प्रमुख उदाहरण बताया।
चंद्रयान-3 की सफलता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जब भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में पहुँचा, तो प्रधानमंत्री मोदी ने उस स्थान का नाम 'शिवशक्ति' रखा — जो भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
आपातकाल की याद और विपक्ष पर निशाना
हालिया बैरिकेडिंग की घटना का संदर्भ देते हुए त्रिवेदी ने कहा कि एक किलोमीटर तक बैरिकेडिंग होने पर कुछ लोगों को 1975 के आपातकाल की याद आने लगी। उन्होंने तर्क दिया कि वास्तविक आपातकाल में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में नागरिकों के मौलिक अधिकार और मानवाधिकार छीन लिए गए थे तथा विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया था।
त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि विपक्ष मौजूदा परिस्थितियों की तुलना आपातकाल से करके वास्तविक ऐतिहासिक संदर्भ से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहा है। उनके अनुसार, आज नेता प्रतिपक्ष खुलकर प्रधानमंत्री के खिलाफ बयान देते हैं — जो आपातकाल के दौरान संभव नहीं था।
BJP का व्यापक रुख
त्रिवेदी ने कहा कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका से कुछ शक्तियाँ असहज हो सकती हैं और इसी कारण देश के भीतर सरकार के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब BJP और कांग्रेस के बीच तमिल भाषा नीति, NEET और सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर विवाद तेज़ हो रहा है। गौरतलब है कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई जब संसद के आगामी सत्र से पहले दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।