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सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर हमला: राष्ट्रपति के नाम पर 'भ्रामक दावों' पर माँगा सबूत

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सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर हमला: राष्ट्रपति के नाम पर 'भ्रामक दावों' पर माँगा सबूत

सारांश

BJP प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर राष्ट्रपति के नाम पर 'भ्रामक दावे' करने का आरोप लगाया और कांग्रेस से पाँच तीखे सवाल पूछे — EVM, SIR, मतदाता सूची और सीसीटीवी फुटेज पर। BJP का आरोप है कि चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति बन चुकी है।

मुख्य बातें

सुधांशु त्रिवेदी ने 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में प्रेस वार्ता कर राहुल गांधी पर राष्ट्रपति के नाम पर 'भ्रामक दावे' करने का आरोप लगाया।
त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी पहले सर्वोच्च न्यायालय के बारे में गलत बयान देने पर माफी माँग चुके हैं।
कांग्रेस से पाँच सवाल पूछे गए — उपचुनाव में मतदाता सूची जाँच, BLA की शिकायत, 45 दिनों के भीतर CCTV फुटेज माँग, राष्ट्रपति वाले दावों का सबूत, और EVM बनाम SIR के परस्पर विरोधी आरोप।
असम के सिलचर नगर निगम चुनाव में बैलेट पेपर से हुई कांग्रेस की हार का उदाहरण देते हुए EVM आरोपों को खारिज किया।
BJP का दावा — चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना कांग्रेस की 'राजनीतिक रणनीति' है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित BJP मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयान में संवैधानिक संस्था को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास झलकता है। उन्होंने विपक्ष से पाँच सीधे सवाल पूछे और कहा कि चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना कांग्रेस की स्थापित रणनीति बन चुकी है।

राष्ट्रपति के नाम पर दावों पर सवाल

डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद को राजनीतिक विवादों में खींचना 'दुर्भाग्यपूर्ण' है। उनके अनुसार, राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के साथ हुई मुलाकात को जिस तरह सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया, उसमें 'सच से अधिक राजनीति की झलक' दिखाई देती है। उन्होंने माँग की कि राहुल गांधी स्पष्ट करें कि उनके दावों का क्या प्रमाण है।

BJP नेता ने याद दिलाया कि राहुल गांधी पहले भी सर्वोच्च न्यायालय के बारे में 'गलत बयान' देने के मामले में माफी माँग चुके हैं। उनके अनुसार, यह एक पैटर्न है जिसमें संवैधानिक संस्थाओं के नाम का उपयोग राजनीतिक आख्यान गढ़ने के लिए किया जाता है।

मतदाता सूची और उपचुनाव पर पाँच सवाल

त्रिवेदी ने उपचुनावों में मतदाता सूचियों की वैधता को लेकर कांग्रेस से कई प्रश्न किए। उन्होंने पूछा कि यदि कांग्रेस को सूचियों पर आपत्ति थी, तो उसके बूथ लेवल एजेंटों (BLA) ने जाँच के दौरान कोई शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई। साथ ही, मतदान और मतगणना के दौरान कांग्रेस के एजेंट उपस्थित थे या नहीं, और उस समय कोई आपत्ति क्यों नहीं उठाई गई — यह भी पूछा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस 45 दिनों की समयसीमा को लेकर लगातार सवाल उठाती है, इसलिए उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह निर्धारित अवधि के भीतर सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्ड की माँग करेगी या नहीं।

ईवीएम और SIR पर 'परस्पर विरोधी आरोप'

BJP प्रवक्ता ने कांग्रेस पर ईवीएम और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर एक साथ परस्पर विरोधी आरोप लगाने का आरोप लगाया। उनका तर्क था कि यदि ईवीएम में गड़बड़ी मानी जाए, तो SIR का मुद्दा निरर्थक हो जाता है, और यदि SIR में गड़बड़ी का आरोप सही है, तो ईवीएम पर लगाए गए पहले के आरोपों का आधार कमज़ोर पड़ता है। त्रिवेदी ने कहा, 'दोनों आरोप एक साथ सही नहीं हो सकते।'

उन्होंने असम के सिलचर नगर निगम चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ बैलेट पेपर से मतदान हुआ था, फिर भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा — जो उनके अनुसार यह दर्शाता है कि चुनावी पराजय के लिए EVM को जिम्मेदार ठहराना तथ्यसंगत नहीं है।

कांग्रेस पर रणनीतिक इल्जाम

डॉ. त्रिवेदी ने दावा किया कि चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर 'भ्रम का माहौल' बनाना कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था का प्रतिनिधित्व करती हैं — वे किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि समूचे राष्ट्र की प्रतिनिधि हैं। कांग्रेस की ओर से इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

क्या होगा आगे

BJP की यह प्रेस वार्ता स्पष्ट रूप से आगामी राजनीतिक नैरेटिव को आकार देने की कोशिश है — विशेषकर उपचुनाव परिणामों और विपक्ष के चुनाव-प्रक्रिया संबंधी आरोपों के संदर्भ में। अब देखना होगा कि कांग्रेस त्रिवेदी द्वारा पूछे गए पाँच सवालों का जवाब देती है या नहीं, और राहुल गांधी राष्ट्रपति से मुलाकात वाले बयान पर कोई स्पष्टीकरण जारी करते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो स्वयं एक राजनीतिक चाल है। EVM और SIR पर 'परस्पर विरोधी आरोप' वाला तर्क तार्किक रूप से दिलचस्प है, लेकिन यह मूल प्रश्न — चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता — को हल नहीं करता। अंततः, यह वाकयुद्ध उस बड़े राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा है जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाते हैं और जनता को तथ्य व आरोप में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाया?
BJP प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद दिए बयान में देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास किया। उन्होंने राहुल गांधी से उनके दावों का सबूत माँगा।
BJP ने कांग्रेस से उपचुनाव को लेकर कौन-से सवाल पूछे?
BJP ने कांग्रेस से पाँच सवाल पूछे — क्या उसने मतदाता सूची की जाँच कराई, क्या BLA ने कोई शिकायत दर्ज की, क्या 45 दिनों के भीतर CCTV फुटेज माँगी जाएगी, राष्ट्रपति के नाम पर किए गए दावों का क्या सबूत है, और EVM व SIR पर एक साथ लगाए गए आरोपों में से कौन-सा सही है।
EVM और SIR पर BJP का क्या तर्क है?
त्रिवेदी का तर्क है कि कांग्रेस एक साथ EVM में गड़बड़ी और SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) में गड़बड़ी का आरोप नहीं लगा सकती, क्योंकि दोनों परस्पर विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि 'दोनों आरोप एक साथ सही नहीं हो सकते — अर्थात दोनों ही झूठे हैं।'
सिलचर नगर निगम चुनाव का उदाहरण क्यों दिया गया?
BJP प्रवक्ता ने असम के सिलचर नगर निगम चुनाव का उदाहरण दिया, जहाँ बैलेट पेपर से मतदान हुआ था लेकिन कांग्रेस फिर भी हार गई। यह उदाहरण EVM पर कांग्रेस के आरोपों को कमज़ोर करने के लिए दिया गया।
क्या कांग्रेस ने इन आरोपों का जवाब दिया?
इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक कांग्रेस की ओर से BJP के इन पाँच सवालों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। राहुल गांधी के राष्ट्रपति मुलाकात वाले बयान पर भी कांग्रेस ने कोई स्पष्टीकरण जारी नहीं किया।
राष्ट्र प्रेस
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