27 जुलाई 2026
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सुखदेव भगत का आरोप: सरकार 12 वर्षों में निजीकरण की राह पर, प्रदर्शन नहीं पीआर को मिली तरजीह

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सुखदेव भगत का आरोप: सरकार 12 वर्षों में निजीकरण की राह पर, प्रदर्शन नहीं पीआर को मिली तरजीह

सारांश

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने 12 वर्षों की आर्थिक नीतियों पर सीधा हमला बोला — निजीकरण की बढ़ती रफ्तार, पीआर-प्रथम शासन, मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद पर न्यायिक जाँच की माँग, और उत्तर प्रदेश के धर्म परिवर्तन विवाद पर तीखी टिप्पणी। दिल्ली कांग्रेस बैठक में आगे की रणनीति तय होनी थी।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने 11 जून 2026 को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में भारत तेजी से निजीकरण की राह पर है।
भगत के अनुसार सरकार ने वास्तविक प्रदर्शन की बजाय जनसंपर्क (पीआर) को प्राथमिकता दी है।
कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन रद्द होने पर भगत ने न्यायिक जाँच की उम्मीद जताई।
उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन मुद्दे और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की कार्रवाई को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया।
नई दिल्ली में कांग्रेस बैठक में राहुल गांधी समेत वरिष्ठ नेताओं के साथ जन मुद्दों की रणनीति पर चर्चा होनी थी।

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने 11 जून 2026 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में भारत की आर्थिक दिशा मूलभूत रूप से बदल गई है। उनके अनुसार सरकार ने वास्तविक प्रदर्शन की जगह जनसंपर्क को प्राथमिकता दी है।

निजीकरण पर कांग्रेस का रुख

सुखदेव भगत ने कहा, 'पहले भारत मिश्रित अर्थव्यवस्था के मॉडल पर चलता था, लेकिन अब सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बेचकर और निजी क्षेत्र को अधिक जिम्मेदारी सौंपकर तेजी से निजीकरण की ओर बढ़ रही है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि देश को पीआर के आधार पर नहीं, बल्कि प्रदर्शन के आधार पर चलाया जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकारी उद्यमों के विनिवेश पर बहस तेज है।

मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद पर प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन रद्द होने के मामले में भगत ने न्यायिक जाँच की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, 'मुझे विश्वास है कि अदालत इस बात की जाँच करेगी कि यह पूरा मामला किस तरह हुआ। मेरी नजर में यह लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर मामला है।' उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकरण में सच सामने आना चाहिए और न्याय होना चाहिए।

धर्म परिवर्तन विवाद और सामाजिक बहस

उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन के मामले और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए भगत ने कहा कि ऐसे मुद्दों का बार-बार उठना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, 'ऐसे समय में जब इंसान चांद तक पहुंच रहा है और विज्ञान के क्षेत्र में अद्भुत तरक्की हो रही है, यह अफसोस की बात है कि हम अभी भी हिंदू-मुस्लिम बंटवारे और गाय व गोबर जैसे मुद्दों पर बहस में उलझे हुए हैं।' उन्होंने इसे 'कुंठित सोच का परिचायक' बताया।

कांग्रेस की रणनीतिक बैठक

नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की बैठक के संदर्भ में भगत ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार जन मुद्दों को लेकर लोगों से मिल रहे हैं और सरकार के सामने उनकी समस्याएं उठाते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 'सुनने को तैयार नहीं है और अधिक घमंडी हो गई है।' इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं के साथ जन मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा होनी थी।

आगे की राह

कांग्रेस की यह बैठक ऐसे समय में हुई जब विपक्ष सरकार की आर्थिक नीतियों, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता और सामाजिक ध्रुवीकरण जैसे मुद्दों पर एकजुट होने की कोशिश कर रहा है। भगत के बयान संकेत देते हैं कि कांग्रेस आने वाले दिनों में इन मुद्दों को और आक्रामक तरीके से उठाने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस व्यापक विपक्षी रणनीति का हिस्सा है जो आर्थिक आँकड़ों की जगह शासन की शैली को कठघरे में खड़ा करती है। मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद को 'लोकतंत्र के लिए गंभीर' बताना कांग्रेस की उस कोशिश को दर्शाता है कि संस्थागत प्रक्रियाओं पर सवाल उठाकर राजनीतिक पूंजी बनाई जाए। हालाँकि, धर्म परिवर्तन और सामाजिक ध्रुवीकरण पर उनकी टिप्पणी कांग्रेस के उस पुराने द्वंद्व को उजागर करती है — वह सांस्कृतिक मुद्दों पर बोलना चाहती है, लेकिन उन पर अपना स्पष्ट राजनीतिक विकल्प पेश करने से बचती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुखदेव भगत ने निजीकरण पर क्या कहा?
सुखदेव भगत ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ बेचकर और निजी क्षेत्र को अधिक जिम्मेदारी देकर तेजी से निजीकरण की राह पकड़ी है। उनके अनुसार देश को पीआर नहीं, प्रदर्शन के आधार पर चलाया जाना चाहिए।
मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन विवाद पर भगत का क्या कहना है?
भगत ने इस मामले को लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर बताया और अदालत से न्यायिक जाँच की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में सच सामने आना चाहिए और न्याय होना चाहिए।
उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन विवाद पर कांग्रेस का क्या रुख है?
सुखदेव भगत ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जब विज्ञान इतनी तरक्की कर रहा है, तब हिंदू-मुस्लिम बंटवारे जैसे मुद्दों पर उलझे रहना 'कुंठित सोच का परिचायक' है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की कार्रवाई पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
दिल्ली में कांग्रेस की बैठक का उद्देश्य क्या था?
इस बैठक में राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं के साथ जन मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने और जनता तक पहुँचाने की रणनीति पर चर्चा होनी थी। भगत के अनुसार सरकार इन मुद्दों पर 'सुनने को तैयार नहीं' है।
कांग्रेस सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना क्यों कर रही है?
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने मिश्रित अर्थव्यवस्था के मॉडल को छोड़कर निजीकरण को तेज किया है और वास्तविक आर्थिक प्रदर्शन की जगह जनसंपर्क को प्राथमिकता दी है। यह आलोचना विपक्ष की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें शासन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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