सुखदेव भगत का आरोप: सरकार 12 वर्षों में निजीकरण की राह पर, प्रदर्शन नहीं पीआर को मिली तरजीह
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने 11 जून 2026 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में भारत की आर्थिक दिशा मूलभूत रूप से बदल गई है। उनके अनुसार सरकार ने वास्तविक प्रदर्शन की जगह जनसंपर्क को प्राथमिकता दी है।
निजीकरण पर कांग्रेस का रुख
सुखदेव भगत ने कहा, 'पहले भारत मिश्रित अर्थव्यवस्था के मॉडल पर चलता था, लेकिन अब सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बेचकर और निजी क्षेत्र को अधिक जिम्मेदारी सौंपकर तेजी से निजीकरण की ओर बढ़ रही है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि देश को पीआर के आधार पर नहीं, बल्कि प्रदर्शन के आधार पर चलाया जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकारी उद्यमों के विनिवेश पर बहस तेज है।
मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद पर प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन रद्द होने के मामले में भगत ने न्यायिक जाँच की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, 'मुझे विश्वास है कि अदालत इस बात की जाँच करेगी कि यह पूरा मामला किस तरह हुआ। मेरी नजर में यह लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर मामला है।' उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकरण में सच सामने आना चाहिए और न्याय होना चाहिए।
धर्म परिवर्तन विवाद और सामाजिक बहस
उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन के मामले और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए भगत ने कहा कि ऐसे मुद्दों का बार-बार उठना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, 'ऐसे समय में जब इंसान चांद तक पहुंच रहा है और विज्ञान के क्षेत्र में अद्भुत तरक्की हो रही है, यह अफसोस की बात है कि हम अभी भी हिंदू-मुस्लिम बंटवारे और गाय व गोबर जैसे मुद्दों पर बहस में उलझे हुए हैं।' उन्होंने इसे 'कुंठित सोच का परिचायक' बताया।
कांग्रेस की रणनीतिक बैठक
नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की बैठक के संदर्भ में भगत ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार जन मुद्दों को लेकर लोगों से मिल रहे हैं और सरकार के सामने उनकी समस्याएं उठाते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 'सुनने को तैयार नहीं है और अधिक घमंडी हो गई है।' इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं के साथ जन मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा होनी थी।
आगे की राह
कांग्रेस की यह बैठक ऐसे समय में हुई जब विपक्ष सरकार की आर्थिक नीतियों, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता और सामाजिक ध्रुवीकरण जैसे मुद्दों पर एकजुट होने की कोशिश कर रहा है। भगत के बयान संकेत देते हैं कि कांग्रेस आने वाले दिनों में इन मुद्दों को और आक्रामक तरीके से उठाने की तैयारी में है।