सुकमा जिला हुआ पूर्णतया नक्सल मुक्त: सुरक्षा बलों की साहसिकता से मिली ऐतिहासिक जीत

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सुकमा जिला हुआ पूर्णतया नक्सल मुक्त: सुरक्षा बलों की साहसिकता से मिली ऐतिहासिक जीत

सारांश

सुकमा जिला अब पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है। सुरक्षा बलों की बहादुरी और जनसमर्थन से इस क्षेत्र में शांति का नया अध्याय शुरू हुआ है। क्या यह बदलाव बस्तर क्षेत्र में स्थायी होगा?

Key Takeaways

  • सुकमा जिला अब पूर्णतया नक्सल मुक्त है।
  • सुरक्षा बलों ने 84 नक्सली मारे और 478 को गिरफ्तार किया।
  • 23 नए कैंप स्थापित किए गए हैं।
  • स्थानीय विकास कार्यों में तेजी आई है।
  • यह उपलब्धि पूरे बस्तर क्षेत्र के लिए मिसाल बनी है।

सुकमा, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला अब पूर्ण रूप से नक्सल मुक्त घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में वर्षों से माओवादी हिंसा का प्रभाव था, लेकिन सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई, रणनीतिक सोच और जनसमर्थन ने यहां शांति का माहौल स्थापित किया है। 1980 के दशक से चली आ रही नक्सली गतिविधियां अब समाप्त हो चुकी हैं। जिला पुलिस ने 31 मार्च 2026 को इसकी औपचारिक घोषणा की।

सुकमा जिला का गठन 2012 में हुआ था, लेकिन इससे पहले से यह क्षेत्र माओवादी गतिविधियों का केंद्र रहा है। सुरक्षा बलों जैसे डीआरजी, एसटीएफ, सीआरपीएफ और कोबरा ने मिलकर इस दुर्गम इलाके में कई चुनौतियों का सामना किया। जवानों ने अपनी बहादुरी और धैर्य के साथ कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनों को अंजाम दिया। नए दृष्टिकोण के तहत क्षेत्र में कैंप स्थापित किए गए, सड़कें बनाई गईं और स्थानीय लोगों का विश्वास जीता गया।

जनवरी 2024 से 31 मार्च 2026 तक सुरक्षा बलों ने 38 मुठभेड़ों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। कुल 84 नक्सली मारे गए, जिनमें से सभी इनामी थे। 478 नक्सली गिरफ्तार किए गए और 743 ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। सुरक्षा बलों ने 198 ग्रेडेड हथियार और 137 आईईडी बरामद किए। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि माओवादी संगठन की शक्ति लगभग समाप्त हो चुकी है।

सुरक्षा बलों ने अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए 23 नए कैंप स्थापित किए, जिनमें गोगुंडा जैसे दुर्गम पहाड़ी इलाके से लेकर पालीगुड़ा-गुंडराजगुडेम तक शामिल हैं, जो पहले माओवादियों के सुरक्षित ठिकाने माने जाते थे। कैंप की स्थापना से न केवल सुरक्षा बढ़ी, बल्कि विकास कार्य भी तेजी से बढ़े। सड़क निर्माण, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से स्थानीय लोगों में सुरक्षा बलों के प्रति विश्वास बढ़ा।

इस सफलता में कई प्रमुख अभियान निर्णायक साबित हुए। 3 जनवरी 2026 को किस्टाराम थाने के बुर्कलंका जंगल में डीआरजी टीम ने ऑपरेशन चलाया। करीब 30-35 सशस्त्र माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया। जवानों ने तीन घंटे तक बहादुरी से मुकाबला किया और 12 नक्सली मार गिराए, जिनमें कोंटा एरिया कमेटी इंचार्ज वेट्टी मंगडू शामिल थे। कुल 60 लाख रुपये के इनामी थे। घटनास्थल से एके-47, एसएलआर और इंसास राइफल जैसे हथियार बरामद हुए।

29 मार्च 2025 को केरला पाल थाने के नेडूम-परिया जंगल में डीआरजी और सीआरपीएफ की टीम पर हमला हुआ। जवानों ने साहस दिखाते हुए जवाबी कार्रवाई की। इस मुठभेड़ में 17 नक्सली मारे गए, जिनमें एसजीसीएम जगदीश कुहरामी शामिल था। कुल 87 लाख रुपये के इनाम थे। चार जवान घायल हुए, लेकिन उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा।

22 नवंबर 2024 को भंडारपदर-मुनुरकोंडा जंगल में 10 नक्सली मारे गए। इनमें प्लाटून कमांडर दूधी मासा शामिल था। 10 जनवरी 2025 को पालीगुड़ा-गुंडराजगुडेम में आईईडी विशेषज्ञ कोरसा महेश समेत तीन हार्डकोर नक्सली ढेर हुए। 16 जनवरी 2025 को तुमरेल-पामेड़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चला, जिसमें 12 नक्सली मारे गए। इन सभी कार्रवाइयों से माओवादी नेटवर्क को भारी झटका लगा।

आत्मसमर्पण नीति और पुनर्वास कार्यक्रम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हजारों नक्सली मुख्यधारा में आए और सरकार की योजनाओं से जुड़े। जनसहभागिता से इलाके में विकास कार्य बढ़े। स्कूल, अस्पताल और सड़कें बनने से लोगों का जीवन बेहतर हुआ।

सुकमा का नक्सल मुक्त होना सुरक्षा बलों के समर्पण, सटीक खुफिया जानकारी और निरंतर दबाव का परिणाम है। यह उपलब्धि पूरे बस्तर क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन गई है। अब यहां शांति और विकास का नया युग शुरू हो चुका है। जिला पुलिस ने आश्वासन दिया है कि शांति बनाए रखने के लिए अभियान जारी रहेंगे।

Point of View

जो सुरक्षा बलों की समर्पण और रणनीति का परिणाम है। यह न केवल स्थानीय निवासियों के लिए, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र के विकास के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।
NationPress
21/04/2026

Frequently Asked Questions

सुकमा जिला कब नक्सल मुक्त हुआ?
सुकमा जिला 31 मार्च 2026 को नक्सल मुक्त घोषित किया गया।
सुरक्षा बलों ने कितने नक्सलियों को मारा?
सुरक्षा बलों ने 84 नक्सलियों को मारा, जिनमें सभी इनामी थे।
सुरक्षा बलों ने कितने नए कैंप स्थापित किए?
सुरक्षा बलों ने 23 नए कैंप स्थापित किए।
नक्सल मुक्त होने से स्थानीय लोगों पर क्या प्रभाव पड़ा?
नक्सल मुक्त होने से स्थानीय विकास कार्य तेज हुए और लोगों में सुरक्षा बलों के प्रति विश्वास बढ़ा।
सुकमा के नक्सल मुक्त होने का मुख्य कारण क्या था?
सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई, सटीक रणनीति और जनसहयोग मुख्य कारण थे।
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