सुंदर सिंह भंडारी पुण्यतिथि: अमित शाह ने सुनाई सूखी रोटी पानी में भिगोकर खाने की संघर्ष गाथा
सारांश
मुख्य बातें
जनसंघ के संस्थापक सदस्य और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक सुंदर सिंह भंडारी की पुण्यतिथि पर 22 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके जीवन के संघर्षपूर्ण अध्याय को देश के सामने रखा। शाह ने बताया कि किस प्रकार भंडारी जी ने राजस्थान में संघ कार्य के दौरान भोजन न मिलने पर सूखी रोटी को पानी में भिगोकर खाया और साइकिल पर गाँव-गाँव घूमकर संगठन को मज़बूत किया।
एक्स पर श्रद्धांजलि और प्रेरणा का संदेश
गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'जनसंघ के संस्थापक सदस्य, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक सुंदर सिंह भंडारी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।' उन्होंने आगे कहा कि भंडारी ने भाजपा के संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वे संगठन के ऐसे शिल्पकार थे जिन्होंने व्यक्ति, समाज और संगठन की प्रतिभाओं को गढ़ने का कार्य किया।
शाह ने यह भी कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए भंडारी का संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों में भी सिद्धांतों से समझौता न करने का उनका संकल्प 'हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।'
गुजरात राज्यपाल काल की व्यक्तिगत स्मृति
अमित शाह ने एक वीडियो भी साझा किया जिसमें उन्होंने बताया कि सुंदर सिंह भंडारी गुजरात के राज्यपाल थे और उस दौरान विद्यार्थी परिषद तथा युवा मोर्चा के कार्यकर्ता उनसे मिलने आते थे — जिनमें स्वयं शाह भी शामिल थे। एक बार शाह ने भंडारी जी से उनके पैर के बारे में पूछा तो उन्होंने पहले बात हँसकर टाल दी, परंतु दोबारा पूछने पर उन्होंने एक शर्त के साथ अपनी कहानी सुनाई — 'इस बात को कहीं नहीं बताना है।'
सूखी रोटी और साइकिल की तपस्या
शाह के अनुसार, राजस्थान में संघ कार्य के शुरुआती दिनों में भंडारी को बहुत कम स्वीकृति मिलती थी और हर जगह भोजन उपलब्ध नहीं होता था। वे संघ कार्यालय पर रोटियाँ कपड़ों की तरह सुखाते थे, फिर उन्हें कपड़े में लपेटकर थैले में रखते और साइकिल पर गाँव-गाँव घूमकर संगठन का कार्य करते थे। जब भोजन नहीं मिलता था, तो उन सूखी रोटियों को पानी में भिगोकर खाते और आगे बढ़ते थे।
लगातार साइकिल चलाने के कारण उनके पैर की पिंडलियाँ चौड़ी हो गई थीं — यही उस पैर की कहानी का उत्तर था जो शाह ने वर्षों पहले पूछा था। शाह ने कहा, 'आज भी मैं उस वाक्य को याद करता हूँ तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।'
भंडारी की विरासत और योगदान
सुंदर सिंह भंडारी जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संविधान निर्माण में उनकी केंद्रीय भूमिका रही। गौरतलब है कि उनका गुजरात से गहरा नाता था — वे राज्य के राज्यपाल भी रहे। आपातकाल के दौरान उनके अडिग रुख ने उन्हें संगठन के भीतर एक नैतिक प्रतीक के रूप में स्थापित किया।
उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में श्रद्धांजलि सभाएँ आयोजित की गईं। भंडारी जी का जीवन आज भी संगठन कार्यकर्ताओं के लिए समर्पण और त्याग का आदर्श उदाहरण बना हुआ है।