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सुंदर सिंह भंडारी पुण्यतिथि: अमित शाह ने सुनाई सूखी रोटी पानी में भिगोकर खाने की संघर्ष गाथा

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सुंदर सिंह भंडारी पुण्यतिथि: अमित शाह ने सुनाई सूखी रोटी पानी में भिगोकर खाने की संघर्ष गाथा

सारांश

सुंदर सिंह भंडारी की पुण्यतिथि पर अमित शाह ने वह किस्सा सुनाया जो दशकों तक अनकहा रहा — राजस्थान की धूल भरी पगडंडियों पर साइकिल चलाते, सूखी रोटी पानी में भिगोकर खाते एक कार्यकर्ता की तपस्या, जिसने जनसंघ की नींव रखी।

मुख्य बातें

22 जून को जनसंघ के संस्थापक सदस्य सुंदर सिंह भंडारी की पुण्यतिथि पर देशभर में श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट और वीडियो के ज़रिए भंडारी के संघर्ष की अनसुनी कहानी साझा की।
राजस्थान में संघ कार्य के दौरान भंडारी भोजन न मिलने पर सूखी रोटी पानी में भिगोकर खाते और साइकिल पर गाँव-गाँव घूमते थे।
लगातार साइकिल चलाने से उनकी पिंडलियाँ चौड़ी हो गई थीं — यह रहस्य शाह ने वर्षों बाद उनसे पूछकर जाना था।
भंडारी ने भाजपा के संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और गुजरात के राज्यपाल भी रहे।
आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनका संघर्ष शाह ने 'प्रेरणास्रोत' बताया।

जनसंघ के संस्थापक सदस्य और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक सुंदर सिंह भंडारी की पुण्यतिथि पर 22 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके जीवन के संघर्षपूर्ण अध्याय को देश के सामने रखा। शाह ने बताया कि किस प्रकार भंडारी जी ने राजस्थान में संघ कार्य के दौरान भोजन न मिलने पर सूखी रोटी को पानी में भिगोकर खाया और साइकिल पर गाँव-गाँव घूमकर संगठन को मज़बूत किया।

एक्स पर श्रद्धांजलि और प्रेरणा का संदेश

गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'जनसंघ के संस्थापक सदस्य, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक सुंदर सिंह भंडारी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।' उन्होंने आगे कहा कि भंडारी ने भाजपा के संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वे संगठन के ऐसे शिल्पकार थे जिन्होंने व्यक्ति, समाज और संगठन की प्रतिभाओं को गढ़ने का कार्य किया।

शाह ने यह भी कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए भंडारी का संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों में भी सिद्धांतों से समझौता न करने का उनका संकल्प 'हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।'

गुजरात राज्यपाल काल की व्यक्तिगत स्मृति

अमित शाह ने एक वीडियो भी साझा किया जिसमें उन्होंने बताया कि सुंदर सिंह भंडारी गुजरात के राज्यपाल थे और उस दौरान विद्यार्थी परिषद तथा युवा मोर्चा के कार्यकर्ता उनसे मिलने आते थे — जिनमें स्वयं शाह भी शामिल थे। एक बार शाह ने भंडारी जी से उनके पैर के बारे में पूछा तो उन्होंने पहले बात हँसकर टाल दी, परंतु दोबारा पूछने पर उन्होंने एक शर्त के साथ अपनी कहानी सुनाई — 'इस बात को कहीं नहीं बताना है।'

सूखी रोटी और साइकिल की तपस्या

शाह के अनुसार, राजस्थान में संघ कार्य के शुरुआती दिनों में भंडारी को बहुत कम स्वीकृति मिलती थी और हर जगह भोजन उपलब्ध नहीं होता था। वे संघ कार्यालय पर रोटियाँ कपड़ों की तरह सुखाते थे, फिर उन्हें कपड़े में लपेटकर थैले में रखते और साइकिल पर गाँव-गाँव घूमकर संगठन का कार्य करते थे। जब भोजन नहीं मिलता था, तो उन सूखी रोटियों को पानी में भिगोकर खाते और आगे बढ़ते थे।

लगातार साइकिल चलाने के कारण उनके पैर की पिंडलियाँ चौड़ी हो गई थीं — यही उस पैर की कहानी का उत्तर था जो शाह ने वर्षों पहले पूछा था। शाह ने कहा, 'आज भी मैं उस वाक्य को याद करता हूँ तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।'

भंडारी की विरासत और योगदान

सुंदर सिंह भंडारी जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संविधान निर्माण में उनकी केंद्रीय भूमिका रही। गौरतलब है कि उनका गुजरात से गहरा नाता था — वे राज्य के राज्यपाल भी रहे। आपातकाल के दौरान उनके अडिग रुख ने उन्हें संगठन के भीतर एक नैतिक प्रतीक के रूप में स्थापित किया।

उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में श्रद्धांजलि सभाएँ आयोजित की गईं। भंडारी जी का जीवन आज भी संगठन कार्यकर्ताओं के लिए समर्पण और त्याग का आदर्श उदाहरण बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो दूसरी तरफ यह सवाल भी उठता है कि क्या आज का संगठन उस त्याग की भावना को संस्थागत रूप से जीवित रख पाया है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुंदर सिंह भंडारी कौन थे?
सुंदर सिंह भंडारी जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक थे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संविधान निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाई और गुजरात के राज्यपाल भी रहे।
अमित शाह ने भंडारी जी के बारे में क्या बताया?
अमित शाह ने बताया कि राजस्थान में संघ कार्य के शुरुआती दिनों में भंडारी जी भोजन न मिलने पर सूखी रोटी पानी में भिगोकर खाते थे और साइकिल पर गाँव-गाँव घूमकर संगठन का कार्य करते थे। लगातार साइकिल चलाने से उनकी पिंडलियाँ चौड़ी हो गई थीं।
अमित शाह को यह कहानी कैसे पता चली?
जब भंडारी जी गुजरात के राज्यपाल थे, तब अमित शाह ने उनके पैर के बारे में पूछा था। पहले भंडारी जी ने बात टाल दी, लेकिन दोबारा पूछने पर उन्होंने यह शर्त रखते हुए कहानी सुनाई कि 'इस बात को कहीं नहीं बताना है।'
भंडारी जी ने आपातकाल के दौरान क्या भूमिका निभाई?
अमित शाह के अनुसार, आपातकाल के दौरान सुंदर सिंह भंडारी ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं किया।
सुंदर सिंह भंडारी की पुण्यतिथि कब है?
सुंदर सिंह भंडारी की पुण्यतिथि 22 जून को मनाई जाती है। इस वर्ष इस अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट और वीडियो के ज़रिए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
राष्ट्र प्रेस
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