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सुप्रीम कोर्ट ने एमएसपी पर 'कॉस्ट प्राइस प्लस 50 प्रतिशत' की मांग पर केंद्र से मांगा जवाब

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सुप्रीम कोर्ट ने एमएसपी पर 'कॉस्ट प्राइस प्लस 50 प्रतिशत' की मांग पर केंद्र से मांगा जवाब

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सुनवाई की है। याचिका में 'कॉस्ट प्राइस प्लस 50 प्रतिशत' के आधार पर एमएसपी तय करने की मांग की गई है। क्या यह किसानों के लिए सही समाधान हो सकता है?

मुख्य बातें

किसानों को उचित दाम मिलना जरूरी है।
एमएसपी को वास्तविक लागत के आधार पर तय किया जाना चाहिए।
सरकार को किसानों के लिए पर्याप्त खरीद केंद्र स्थापित करने चाहिए।
कृषि कर्ज माफी की आवश्यकता है।
सीजेआई ने किसानों की भिन्न स्थिति का उल्लेख किया।

नई दिल्ली, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट में फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से संबंधित एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई हुई है। इस याचिका में यह मांग की गई है कि किसानों को उनकी फसल का उचित और वाजिब दाम मिले और एमएसपी निर्धारित करते समय कृषि की वास्तविक लागत को ध्यान में रखा जाए। अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि जो किसान अपनी फसल एमएसपी पर बेचना चाहते हैं, सरकार को उनकी सम्पूर्ण उपज खरीदनी चाहिए। इसके साथ ही, हर गांव, ब्लॉक, तहसील और जिले में पर्याप्त सरकारी खरीद केंद्र स्थापित करने की मांग की गई है ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने में कठिनाई न हो। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि किसानों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को देखते हुए उनका कृषि कर्ज माफ किया जाए।

याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने अदालत में तर्क दिया कि हर वर्ष १०,००० से अधिक किसान आत्महत्या कर रहे हैं, और इसका एक बड़ा कारण यह है कि एमएसपी की दर वास्तविक लागत से कम है। उन्होंने कहा कि एमएसपी को कम से कम 'कॉस्ट प्राइस प्लस ५० प्रतिशत' के आधार पर तय किया जाना चाहिए ताकि किसानों को उचित लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में सरकार मुख्य रूप से गेहूं और कुछ अनाज ही एमएसपी पर खरीदती है, जबकि अन्य फसलें किसानों के लिए कठिनाइयाँ उत्पन्न करती हैं।

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एमएसपी निर्धारित करने के लिए कई तरह के गणितीय सूत्र दिए जा रहे हैं। अदालत ने कहा कि जमीन, श्रम और पूंजी की लागत हर जगह भिन्न हो सकती है। ऐसे में क्या एक समान नीति पूरे देश में लागू की जा सकती है या इसे राज्यों और जिलों के अनुसार भिन्न करना होगा?

प्रशांत भूषण ने अपनी दलील में कहा कि सरकार गरीबों को मुफ्त राशन दे रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसानों को उनकी लागत भी न मिले और वे घाटे में चले जाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे देश की औसत लागत निकालकर किसानों को उसका उचित भुगतान किया जाए।

सीजेआई ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में बड़े और छोटे किसानों की स्थिति अलग-अलग है, इसलिए सभी के लिए एक समान नीति बनाना सरल नहीं है।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई में इस मामले पर सरकार का पक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज के समग्र विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह याचिका किसलिए प्रस्तुत की गई है?
यह याचिका किसानों को उनकी फसल का उचित दाम और एमएसपी को वास्तविक लागत के आधार पर निर्धारित करने के लिए प्रस्तुत की गई है।
क्या एमएसपी किसानों के लिए लाभकारी है?
यदि एमएसपी को सही तरीके से निर्धारित किया जाए, तो यह किसानों के लिए लाभकारी हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
क्या एमएसपी का निर्धारण सब जगह एक समान होगा?
नहीं, विभिन्न राज्यों और जिलों में जमीन और श्रम की लागत अलग-अलग हो सकती है, इसलिए एक समान नीति बनाना कठिन है।
राष्ट्र प्रेस
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