सूरत में ₹30 लाख का एमडी ड्रग्स नेटवर्क ध्वस्त, पूर्व एयर होस्टेस मानसी समेत दो गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
सूरत क्राइम ब्रांच ने 24 अगस्त 2026 को 'नो ड्रग्स इन सूरत सिटी' अभियान के तहत एक बड़े अंतरराज्यीय मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग्स नेटवर्क का भंडाफोड़ किया और 977 ग्राम एमडी के साथ दो आरोपियों को दबोचा। बरामद नशीले पदार्थ की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ₹30 लाख से अधिक आँकी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मानसी अब्दुल सैयद और उसके साथी सोहेल सुलेमान शेख के रूप में हुई है। दोनों मुंबई के सांताक्रूज इलाके के निवासी हैं। जाँच एजेंसियों के अनुसार, मानसी इस नेटवर्क की मुख्य मास्टरमाइंड है और वह पूर्व में मलेशिया एयरलाइंस में एयर होस्टेस के तौर पर कार्यरत रह चुकी है।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त करणराज सिंह वाघेला ने बताया कि क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि एक महिला बड़ौदा रेलवे स्टेशन के आसपास एमडी ड्रग्स की सप्लाई करने वाली है। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी निगरानी और ह्यूमन इंटेलिजेंस की मदद से आरोपियों की गतिविधियों पर नज़र रखी।
कैसे हुई गिरफ्तारी
मानसी और सोहेल मुंबई से किराए की कार लेकर बड़ौदा पहुँचे, जहाँ उन्होंने करीब एक किलो एमडी की डिलीवरी ली और एक्सप्रेसवे के रास्ते सूरत होते हुए वापस मुंबई की ओर रवाना हो गए। सूरत रूरल पुलिस के एसपी राजेश गढिया और एसओजी टीम के साथ संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने ऐना टोल नाके के पास संदिग्ध कार को रोककर तलाशी ली। तलाशी में 977 ग्राम एमडी बरामद हुई और दोनों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपी का आपराधिक इतिहास
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि मानसी का ड्रग नेटवर्क से पुराना नाता है। उसके पिता एयर इंडिया में टेक्नीशियन रह चुके हैं। पुलिस के अनुसार, मानसी ने करीब 8 से 10 देशों की यात्रा की है। जाँच में यह भी खुलासा हुआ कि वह वर्ष 2021 से पहले मध्य प्रदेश के ड्रग नेटवर्क से कथित तौर पर जुड़ी थी।
वर्ष 2021 में इंदौर क्राइम ब्रांच ने उसे 100 ग्राम एमडी के साथ गिरफ्तार किया था। उस मामले में वह कथित तौर पर बच्चों के डायपर के ज़रिए ड्रग्स की तस्करी करती थी। करीब चार साल जेल में रहने के बाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर मानसी मुंबई आ गई। पुलिस का दावा है कि पिछले करीब डेढ़ साल से वह मुंबई में ड्रग पैडलर्स को नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रही थी।
सोहेल की संदिग्ध भूमिका
दूसरा आरोपी सोहेल सुलेमान शेख महज 20 वर्ष का है और मानसी का पड़ोसी बताया जा रहा है। मानसी के परिवार ने कथित तौर पर सोहेल के पालन-पोषण और आर्थिक सहायता में भूमिका निभाई थी। जाँच एजेंसियों के अनुसार, मानसी पुलिस चेकिंग से बचने के लिए सोहेल को कभी पति तो कभी भाई के रूप में पेश करती थी, ताकि दोनों के बीच पारिवारिक संबंध का भ्रम पैदा हो। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सोहेल की भूमिका केवल खेप पहुँचाने तक सीमित थी या वह नेटवर्क के अन्य हिस्सों में भी सक्रिय था।
आगे की जाँच
सूरत पुलिस दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की प्रक्रिया में जुटी है। आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे मुंबई में सक्रिय कथित पैडलर्स और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान हो सके। ज़रूरत पड़ने पर मुंबई क्राइम ब्रांच से भी समन्वय किया जाएगा। यह मामला 'नो ड्रग्स इन सूरत सिटी' अभियान के तहत अब तक की बड़ी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।