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सूरत में ७ टन सब्जियों से बनी विशाल गणेश प्रतिमा, उत्सव के बाद १,००० गायों को मिलेगा महाप्रसाद

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सूरत में ७ टन सब्जियों से बनी विशाल गणेश प्रतिमा, उत्सव के बाद १,००० गायों को मिलेगा महाप्रसाद

सारांश

सूरत में गणेश महोत्सव इस बार सिर्फ आस्था का उत्सव नहीं बना — यह पर्यावरण और पशु सेवा का संगम भी बन गया। ७ टन सब्जियों से बनी विशाल प्रतिमा उत्सव के बाद १,000 गायों का आहार बनेगी। ट्रस्ट का दावा है कि भारत में यह पहली बार हुआ है।

मुख्य बातें

सत्य सेवा जीवदया ट्रस्ट, सूरत ने करीब ७ टन सब्जियों और हरी घास से 100×50 फीट की गणेश प्रतिमा तैयार की।
प्रतिमा निर्माण में 100 लोगों की टीम ने सात घंटे काम किया; काम सुबह चार बजे शुरू हुआ।
उत्सव समाप्ति के बाद सामग्री करीब १,000 गायों को महाप्रसाद के रूप में खिलाई जाएगी।
गाजर, ककड़ी और हरी घास समेत विभिन्न सब्जियों का उपयोग किया गया।
ट्रस्ट के यश पटेल के अनुसार भारत में यह पहली बार ऐसी अवधारणा को अमल में लाया गया है।

सूरत के सत्य सेवा जीवदया ट्रस्ट ने गणेश महोत्सव 2026 के दौरान एक अभूतपूर्व पहल करते हुए करीब ७ टन सब्जियों और हरी घास से 100×50 फीट की भव्य गणेश प्रतिमा तैयार की है। उत्सव संपन्न होने के बाद प्रतिमा निर्माण में उपयोग की गई समूची सामग्री को करीब १,000 गायों को महाप्रसाद के रूप में खिलाया जाएगा। ट्रस्ट से जुड़े यश पटेल के अनुसार, इस तरह की अवधारणा भारत में पहली बार लागू की गई है।

कैसे बनी यह अनोखी प्रतिमा

प्रतिमा निर्माण का कार्य सुबह करीब चार बजे आरंभ हुआ। 100 लोगों की टीम ने लगभग सात घंटों की अथक मेहनत से इसे पूरा किया। गाजर, ककड़ी और हरी घास सहित विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उपयोग करके यह विशाल आकृति तैयार की गई। यश पटेल ने बताया कि गणेश महोत्सव की भावना से प्रेरित होकर उनके मन में साग-सब्जियों से गणपति की प्रतिमा बनाने का विचार आया, ताकि उत्सव के बाद सामग्री व्यर्थ न हो।

पर्यावरण और पशु सेवा का संगम

ट्रस्ट का यह प्रयास दोहरे उद्देश्य से प्रेरित है — एक ओर पूर्णतः पर्यावरण अनुकूल सामग्री का उपयोग, और दूसरी ओर उत्सव समाप्ति के बाद उस सामग्री का सदुपयोग पशु सेवा में। जीनल पटेल ने कहा कि विभिन्न पंडालों में अनेक प्रकार की गणेश प्रतिमाएँ देखने को मिलती हैं, परंतु साग-सब्जियों से प्रतिमा तैयार कर बाद में उसे पशुओं को खिलाना एक सराहनीय और अलग विचार है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में गणेश उत्सव की धूम है और हर आयोजक कुछ नवीन करने की कोशिश में है।

आमजन की प्रतिक्रिया

ज्योति ने कहा कि पूरे भारत में गणेश उत्सव मनाया जा रहा है और इसी सोच के साथ ट्रस्ट ने यह अनूठा आयोजन किया। एक अन्य दर्शक, जो हर रविवार ट्रस्ट परिसर में पशुओं को रोटी खिलाने आते हैं, ने बताया कि सब्जियों और हरी घास से निर्मित गणपति प्रतिमा देखकर वे अभिभूत हो गए। उन्होंने इसे 'यूनिक कॉन्सेप्ट' बताते हुए कहा कि दुनिया को पशुओं के प्रति दया और सेवा भाव की इस मिसाल से सीख लेनी चाहिए।

गौरतलब तथ्य और आगे की योजना

गणेश महोत्सव के समापन पर जब अधिकांश जगह प्रतिमाओं का विसर्जन होता है, तब सूरत का यह आयोजन एक नई राह दिखाता है — जहाँ उत्सव की सामग्री न नदी में जाती है, न कूड़े में, बल्कि सीधे गोशाला में। यह पहल उन लोगों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है जो पर्यावरण-अनुकूल उत्सव की वकालत करते हैं। ट्रस्ट की इस पहल पर देशभर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका संदेश बड़ा है — उत्सव की सामग्री का पुनर्उपयोग संभव है और प्रेरणादायक भी। सवाल यह है कि क्या अन्य बड़े पंडाल और ट्रस्ट इस मॉडल को अपनाने की इच्छाशक्ति दिखाएंगे। पर्यावरण-अनुकूल उत्सव की बात हर साल होती है, पर ऐसे ठोस उदाहरण बहुत कम सामने आते हैं।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत में सब्जियों से बनी गणेश प्रतिमा कितनी बड़ी है और इसे किसने बनाया?
सूरत के सत्य सेवा जीवदया ट्रस्ट ने करीब ७ टन सब्जियों और हरी घास से 100×50 फीट की यह प्रतिमा बनाई है। इसे तैयार करने में 100 लोगों की टीम ने लगभग सात घंटे काम किया।
उत्सव के बाद प्रतिमा की सब्जियों का क्या होगा?
गणेश उत्सव समाप्त होने के बाद प्रतिमा बनाने में इस्तेमाल की गई सभी सब्जियों और हरी घास को करीब १,000 गायों को महाप्रसाद के रूप में खिलाया जाएगा। इस तरह उत्सव सामग्री का पशु सेवा में सदुपयोग होगा।
क्या भारत में पहले कभी सब्जियों से गणेश प्रतिमा बनाई गई है?
ट्रस्ट से जुड़े यश पटेल के अनुसार भारत में इस तरह की अवधारणा पहली बार लागू की गई है। हालाँकि इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका है, लेकिन इसे व्यापक रूप से एक नवीन और अनूठा प्रयोग माना जा रहा है।
इस पहल का पर्यावरण से क्या संबंध है?
प्रतिमा पूरी तरह प्राकृतिक और जैव-विघटनीय सामग्री से बनी है, जिससे विसर्जन के समय होने वाले जल प्रदूषण का सवाल ही नहीं उठता। उत्सव के बाद सामग्री सीधे पशुओं के चारे के रूप में उपयोग होती है, जो शून्य-अपशिष्ट उत्सव का एक व्यावहारिक उदाहरण है।
प्रतिमा बनाने में कौन-सी सब्जियाँ और सामग्री उपयोग हुई?
प्रतिमा में गाजर, ककड़ी और हरी घास समेत विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ इस्तेमाल की गई हैं। कुल मिलाकर करीब ७ टन सामग्री का उपयोग हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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