सूरत में ७ टन सब्जियों से बनी विशाल गणेश प्रतिमा, उत्सव के बाद १,००० गायों को मिलेगा महाप्रसाद
सारांश
मुख्य बातें
सूरत के सत्य सेवा जीवदया ट्रस्ट ने गणेश महोत्सव 2026 के दौरान एक अभूतपूर्व पहल करते हुए करीब ७ टन सब्जियों और हरी घास से 100×50 फीट की भव्य गणेश प्रतिमा तैयार की है। उत्सव संपन्न होने के बाद प्रतिमा निर्माण में उपयोग की गई समूची सामग्री को करीब १,000 गायों को महाप्रसाद के रूप में खिलाया जाएगा। ट्रस्ट से जुड़े यश पटेल के अनुसार, इस तरह की अवधारणा भारत में पहली बार लागू की गई है।
कैसे बनी यह अनोखी प्रतिमा
प्रतिमा निर्माण का कार्य सुबह करीब चार बजे आरंभ हुआ। 100 लोगों की टीम ने लगभग सात घंटों की अथक मेहनत से इसे पूरा किया। गाजर, ककड़ी और हरी घास सहित विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उपयोग करके यह विशाल आकृति तैयार की गई। यश पटेल ने बताया कि गणेश महोत्सव की भावना से प्रेरित होकर उनके मन में साग-सब्जियों से गणपति की प्रतिमा बनाने का विचार आया, ताकि उत्सव के बाद सामग्री व्यर्थ न हो।
पर्यावरण और पशु सेवा का संगम
ट्रस्ट का यह प्रयास दोहरे उद्देश्य से प्रेरित है — एक ओर पूर्णतः पर्यावरण अनुकूल सामग्री का उपयोग, और दूसरी ओर उत्सव समाप्ति के बाद उस सामग्री का सदुपयोग पशु सेवा में। जीनल पटेल ने कहा कि विभिन्न पंडालों में अनेक प्रकार की गणेश प्रतिमाएँ देखने को मिलती हैं, परंतु साग-सब्जियों से प्रतिमा तैयार कर बाद में उसे पशुओं को खिलाना एक सराहनीय और अलग विचार है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में गणेश उत्सव की धूम है और हर आयोजक कुछ नवीन करने की कोशिश में है।
आमजन की प्रतिक्रिया
ज्योति ने कहा कि पूरे भारत में गणेश उत्सव मनाया जा रहा है और इसी सोच के साथ ट्रस्ट ने यह अनूठा आयोजन किया। एक अन्य दर्शक, जो हर रविवार ट्रस्ट परिसर में पशुओं को रोटी खिलाने आते हैं, ने बताया कि सब्जियों और हरी घास से निर्मित गणपति प्रतिमा देखकर वे अभिभूत हो गए। उन्होंने इसे 'यूनिक कॉन्सेप्ट' बताते हुए कहा कि दुनिया को पशुओं के प्रति दया और सेवा भाव की इस मिसाल से सीख लेनी चाहिए।
गौरतलब तथ्य और आगे की योजना
गणेश महोत्सव के समापन पर जब अधिकांश जगह प्रतिमाओं का विसर्जन होता है, तब सूरत का यह आयोजन एक नई राह दिखाता है — जहाँ उत्सव की सामग्री न नदी में जाती है, न कूड़े में, बल्कि सीधे गोशाला में। यह पहल उन लोगों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है जो पर्यावरण-अनुकूल उत्सव की वकालत करते हैं। ट्रस्ट की इस पहल पर देशभर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं।