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तमिलनाडु कैबिनेट बैठक में बैटरी एनर्जी स्टोरेज नीति और औद्योगिक प्रस्ताव हो सकते हैं पेश

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तमिलनाडु कैबिनेट बैठक में बैटरी एनर्जी स्टोरेज नीति और औद्योगिक प्रस्ताव हो सकते हैं पेश

सारांश

तमिलनाडु की बैटरी एनर्जी स्टोरेज नीति गुरुवार की कैबिनेट बैठक में पेश हो सकती है — पाँच महीनों की मशक्कत और गुजरात-राजस्थान मॉडल के अध्ययन के बाद। पूर्वोत्तर मानसून के बीच बिजली कटौती की चुनौती ने इस नीति की ज़रूरत और तेज़ कर दी है।

मुख्य बातें

जोसेफ विजय की अध्यक्षता में 28 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु की तीसरी कैबिनेट बैठक चेन्नई सचिवालय में होगी।
बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) नीति बैठक में प्रस्तुत की जा सकती है, लेकिन अभी तक अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
ड्राफ्ट को एक कंसल्टेंसी फर्म की मदद से तैयार किया गया और पिछले पाँच महीनों में कई बार संशोधित किया गया; गुजरात व राजस्थान की नीतियों का अध्ययन किया गया।
उद्योग के प्रतिनिधि कुमारदास ने 5 मेगावाट या उससे कम क्षमता के सौर संयंत्रों को अनिवार्य BESS प्रावधानों से छूट देने और BESS उपकरणों के शुल्क-मुक्त आयात की माँग की।
थेनी जिला जेल से कैदियों के भागने की घटना और फोरशोर एस्टेट में नए सचिवालय के विवादास्पद प्रस्ताव पर भी बैठक में चर्चा हो सकती है।

तमिलनाडु की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) नीति — जो राज्य के नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए बनाई गई है — 28 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को चेन्नई सचिवालय में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्तुत की जा सकती है। यह सरकार की तीसरी कैबिनेट बैठक होगी, जिसमें औद्योगिक प्रस्तावों और प्रशासनिक निर्णयों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। हालाँकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभी तक इस नीति को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।

नीति की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

प्रस्तावित BESS नीति ऐसी सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई है जो सौर और पवन ऊर्जा को भंडारित कर जरूरत पड़ने पर ग्रिड को आपूर्ति दे सकें। तमिलनाडु विद्युत बोर्ड (TNEB) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ड्राफ्ट तैयार करने से पहले गुजरात, राजस्थान और अन्य प्रमुख राज्यों की मौजूदा नीतियों का गहन अध्ययन किया गया। एक कंसल्टेंसी फर्म की सहायता से तैयार किए गए इस दस्तावेज़ में पिछले पाँच महीनों में कई बार संशोधन किए गए हैं।

पूर्वोत्तर मानसून के बीच ऊर्जा संकट की प्रासंगिकता

यह चर्चाएँ ऐसे समय में हो रही हैं जब पूर्वोत्तर मानसून जोर पकड़ रहा है और अधिकारी राज्य भर में बिजली कटौती से निपटने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि बैटरी स्टोरेज सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने में अहम भूमिका निभा सकता है, जिससे बिजली नेटवर्क अधिक भरोसेमंद और स्थिर आपूर्ति दे सकेगा। गौरतलब है कि तमिलनाडु में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में तेज़ी से इजाफा हो रहा है, लेकिन भंडारण बुनियादी ढाँचे की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

ऊर्जा डेवलपर्स की माँगें और चिंताएँ

नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादकों ने इस नीति का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही डेवलपर्स पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए कुछ संशोधनों की माँग भी रखी है। एक उद्योग संगठन के सदस्य कुमारदास ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को BESS उपकरणों के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति के लिए केंद्र सरकार से परामर्श करना चाहिए, क्योंकि बैटरी सिस्टम की लागत बहुत अधिक है और भारत में ऐसे बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता अभी सीमित है।

इसके अतिरिक्त, कुमारदास ने 5 मेगावाट या उससे कम क्षमता वाले सौर संयंत्रों को अनिवार्य BESS प्रावधानों से छूट देने का प्रस्ताव रखा। उनका तर्क है कि ऐसे छोटे संयंत्रों से दिन में उत्पन्न बिजली आमतौर पर उसी समय उपयोग हो जाती है, इसलिए भंडारण की आवश्यकता न्यूनतम रहती है।

कैबिनेट के अन्य प्रमुख एजेंडा बिंदु

ऊर्जा और निवेश के अलावा, कैबिनेट बैठक में थेनी जिला जेल से कैदियों के भागने की घटना के मद्देनजर कानून-व्यवस्था पर भी चर्चा होने की संभावना है। साथ ही, फोरशोर एस्टेट में नए सचिवालय भवन के निर्माण के विवादास्पद प्रस्ताव पर भी विचार हो सकता है, जिसका फिलहाल कड़ा विरोध हो रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, BESS नीति लागू होने के बाद नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया और अधिक सुगम हो जाएगी। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस नीति का क्रियान्वयन तमिलनाडु के ऊर्जा भविष्य की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन स्टोरेज बुनियादी ढाँचा पीछे छूट गया है। गुजरात और राजस्थान के मॉडल अपनाने की बात तो है, मगर असली परीक्षा यह होगी कि छोटे डेवलपर्स पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को नीति किस हद तक संतुलित करती है। BESS उपकरणों की ऊँची लागत और सीमित घरेलू उत्पादन — ये दो चुनौतियाँ हैं जिनका जवाब बिना केंद्र सरकार के सहयोग के देना मुश्किल है; राज्य की नीति अकेले यह काम नहीं कर सकती।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) नीति क्या है?
यह एक प्रस्तावित राज्य नीति है जो सौर और पवन ऊर्जा को भंडारित करने वाली सुविधाओं को बढ़ावा देगी, ताकि ग्रिड को स्थिर और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति मिल सके। इस नीति का ड्राफ्ट एक कंसल्टेंसी फर्म की मदद से पाँच महीनों में तैयार किया गया है और इसे 28 अक्टूबर 2026 की कैबिनेट बैठक में प्रस्तुत किया जा सकता है।
BESS नीति को कब मंजूरी मिलेगी?
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभी तक नीति को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। इसे 28 अक्टूबर 2026 की कैबिनेट बैठक में विचार के लिए रखा जाएगा, जिसके बाद ही अनुमोदन की स्थिति स्पष्ट होगी।
तमिलनाडु में बैटरी स्टोरेज नीति की ज़रूरत क्यों है?
राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन मौसम पर निर्भर होने के कारण ग्रिड आपूर्ति में उतार-चढ़ाव आता है। बैटरी स्टोरेज इस अस्थिरता को संतुलित कर बिजली कटौती कम करने में मदद करेगा, विशेष रूप से पूर्वोत्तर मानसून जैसे मौसमी दबाव के दौरान।
छोटे नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर्स पर BESS नीति का क्या असर पड़ेगा?
उद्योग प्रतिनिधियों ने 5 मेगावाट या उससे कम क्षमता के सौर संयंत्रों को अनिवार्य BESS प्रावधानों से छूट देने की माँग की है। उनका तर्क है कि ऐसे छोटे संयंत्रों की बिजली दिन में ही उपयोग हो जाती है, इसलिए भंडारण की ज़रूरत न्यूनतम होती है और अनिवार्य BESS से उन पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।
28 अक्टूबर की तमिलनाडु कैबिनेट बैठक में BESS के अलावा क्या और मुद्दे हैं?
बैठक में औद्योगिक प्रस्तावों के साथ-साथ थेनी जिला जेल से कैदियों के भागने की घटना के बाद कानून-व्यवस्था की स्थिति और फोरशोर एस्टेट में विवादास्पद नए सचिवालय भवन के प्रस्ताव पर भी चर्चा होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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