तमिलनाडु सरकार का प्रस्ताव: सहकारी स्टोरों पर ₹40-50/किलो में मिलेगा चावल, बढ़ती कीमतों से राहत की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार खुदरा बाज़ार में चावल की बढ़ती कीमतों से उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए सहकारी भंडारों के माध्यम से ₹40 से ₹50 प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर चावल बेचने पर गंभीरता से विचार कर रही है। 14 अक्टूबर 2026 को चेन्नई स्थित सचिवालय में आयोजित मूल्य निगरानी समिति की बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई।
मूल्य वृद्धि की स्थिति
राज्य में चावल की खुदरा कीमतें पिछले कुछ महीनों में तेज़ी से बढ़ी हैं। अधिकारियों के अनुसार, अगस्त 2026 में जो चावल ₹50 से ₹60 प्रति किलोग्राम की दर पर उपलब्ध था, अब उसकी कीमत ₹70 से ₹80 प्रति किलोग्राम के बीच पहुँच गई है। यह लगभग 30 से 40 प्रतिशत की वृद्धि है, जिसने आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव डाला है। चावल के अलावा दालों और खाना पकाने के तेल की कीमतों में भी उछाल देखी गई है, जिसने खाद्य महँगाई को और व्यापक बना दिया है।
मूल्य निगरानी बैठक का ब्यौरा
खाद्य मंत्री वेंकटरमनन ने मंगलवार को चेन्नई सचिवालय में मूल्य निगरानी समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में मुख्य सचिव साईकुमार, खाद्य सचिव अमुधा, वित्त सचिव सिद्दीकी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने और उपभोक्ताओं तक किफायती दरों पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के तरीकों पर विचार-विमर्श था।
प्रस्तावित योजना की रूपरेखा
सहकारिता एवं खाद्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार भारतीय खाद्य निगम (FCI) और अन्य राज्यों के आपूर्तिकर्ताओं से उत्तम गुणवत्ता का चावल खरीदकर सहकारी दुकानों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुँचाने पर विचार कर रही है। अधिकारी अभी उन राज्यों की पहचान कर रहे हैं जहाँ चावल बिक्री के लिए उपलब्ध है और जिन दरों पर आपूर्ति खरीदी जा सकती है, उनका आकलन किया जा रहा है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि एक लाख टन चावल की उपलब्धता की पुष्टि होने के बाद ही सरकार रियायती बिक्री की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।
योजना की वर्तमान स्थिति
यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और खरीद संबंधी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। बिक्री शुरू होने की कोई निश्चित तारीख तय नहीं की गई है। योजना का क्रियान्वयन आपूर्ति की पुष्टि और खरीद विकल्पों के आकलन के पूरा होने पर निर्भर करेगा। यदि योजना लागू होती है, तो उपभोक्ताओं को मौजूदा खुदरा कीमतों की तुलना में प्रति किलोग्राम ₹20 से ₹40 तक की बचत हो सकती है।
आम जनता पर संभावित असर
यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में खाद्य महँगाई का दबाव परिवारों की क्रय शक्ति को प्रभावित कर रहा है। तमिलनाडु में सहकारी भंडारों का एक व्यापक नेटवर्क पहले से मौजूद है, जिससे इस योजना के व्यापक वितरण की संभावना बनती है। गौरतलब है कि राज्य सरकार पहले भी सहकारी तंत्र के माध्यम से आवश्यक वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित करती रही है। योजना के सफल क्रियान्वयन से विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को राहत मिल सकती है।