1 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तमिलनाडु साइबर क्राइम विंग की एडवाइजरी: फर्जी लॉटरी, लोन ऐप और स्कॉलरशिप स्कैम से बचें

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तमिलनाडु साइबर क्राइम विंग की एडवाइजरी: फर्जी लॉटरी, लोन ऐप और स्कॉलरशिप स्कैम से बचें

सारांश

तमिलनाडु साइबर क्राइम विंग ने 1 अक्टूबर को अलर्ट जारी किया — फर्जी लॉटरी, इंस्टेंट लोन ऐप, स्कॉलरशिप वादे और किराना छूट स्कैम से सावधान रहें। ठगी होने पर हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर तुरंत रिपोर्ट करें।

मुख्य बातें

तमिलनाडु साइबर क्राइम विंग ने 1 अक्टूबर 2026 को ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ विस्तृत एडवाइजरी जारी की।
फर्जी लॉटरी, इंस्टेंट लोन ऐप, स्कॉलरशिप वादे और असामान्य किराना छूट ऑफर प्रमुख ठगी के तरीके बताए गए।
पुलिस ने ओटीपी, बैंकिंग जानकारी या निजी डेटा किसी अनजान व्यक्ति से कभी साझा न करने की सख्त हिदायत दी।
किसी भी प्रमोशन को रिटेलर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर सत्यापित करें; अनजान लिंक से बचें।
साइबर ठगी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।

तमिलनाडु पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने 1 अक्टूबर 2026 को एक विस्तृत एडवाइजरी जारी कर आम नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों से सावधान रहने की अपील की है। पुलिस के अनुसार, फर्जी लॉटरी संदेश, इंस्टेंट लोन ऐप, स्कॉलरशिप के झूठे वादे और किराने के सामान पर असामान्य छूट जैसे लुभावने प्रस्ताव साइबर अपराधियों के प्रमुख हथियार बन गए हैं। ये ऑफर लोगों की मेहनत की कमाई और निजी जानकारी हथियाने के लिए तैयार किए गए जाल हैं।

मुख्य घटनाक्रम

साइबर क्राइम विंग ने यह एडवाइजरी जन-जागरूकता अभियान के तहत जारी की है। पुलिस ने बताया कि ठग सोशल मीडिया पोस्ट और मैसेज के ज़रिये लोगों को अपने जाल में फँसाते हैं। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, भुगतान करने या संवेदनशील जानकारी साझा करने से पहले ऑफर की प्रामाणिकता जाँचने की सलाह दी गई है।

पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर जागरूकता वीडियो भी प्रकाशित करने शुरू किए हैं, जिनमें बताया जा रहा है कि ये घोटाले किस तरह संचालित होते हैं और किन सावधानियों से बचाव किया जा सकता है।

धोखाधड़ी के प्रमुख तरीके

फर्जी लॉटरी: अपराधी संदेश भेजकर बताते हैं कि आपने लॉटरी जीती है, फिर प्रोसेसिंग फीस, टैक्स या अन्य शुल्क के नाम पर रकम माँगते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ऐसे किसी भी दावे पर पैसे ट्रांसफर न करें और बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें।

फर्जी किराना प्रमोशन: असामान्य रूप से अधिक छूट का लालच देकर ग्राहकों को धोखाधड़ी वाले लिंक पर क्लिक करवाया जाता है। पुलिस की सलाह है कि किसी भी प्रमोशन को संबंधित रिटेलर की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर जाकर सत्यापित करें।

इंस्टेंट लोन ऐप: ये ऐप तुरंत ऋण देने का वादा करते हैं और इंस्टॉलेशन के दौरान यूजर का निजी डेटा एकत्र कर लेते हैं। बाद में इसी डेटा का उपयोग कर्ज वसूली के नाम पर उत्पीड़न के लिए किया जाता है। पुलिस ने ऐसे किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले सतर्कता बरतने को कहा है।

स्कॉलरशिप स्कैम: छात्रों और अभिभावकों को फर्जी छात्रवृत्ति का लालच देकर निजी और बैंकिंग जानकारी हासिल की जाती है। एडवाइजरी में इस स्कैम से भी विशेष रूप से सावधान रहने की चेतावनी दी गई है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर धोखाधड़ी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि डिजिटल भुगतान के प्रसार के साथ-साथ साइबर अपराधियों ने भी अपने तरीके परिष्कृत किए हैं और आम नागरिक — विशेष रूप से बुजुर्ग, छात्र और कम तकनीकी जानकारी वाले लोग — इनके आसान शिकार बन रहे हैं।

पुलिस ने ओटीपी, पासवर्ड या बैंक खाते की जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करने की सख्त हिदायत दी है, चाहे वह कितना भी आधिकारिक या भरोसेमंद प्रतीत हो।

शिकायत कहाँ करें

साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर या किसी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की जानकारी मिलने पर नागरिक राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा cybercrime.gov.in वेबसाइट पर जाकर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

साइबर क्राइम विंग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस एडवाइजरी को अपने परिवार और जान-पहचान वालों तक पहुँचाएँ ताकि अधिक से अधिक लोग इन घोटालों से बच सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़ी समस्या की महज़ सतह है — देश में हर साल साइबर ठगी के मामलों में वृद्धि हो रही है और अधिकांश पीड़ित शिकायत ही नहीं करते क्योंकि प्रक्रिया जटिल लगती है। चेतावनी जारी करना पर्याप्त नहीं है; असली ज़रूरत है ऐसे त्वरित कार्रवाई तंत्र की जो ठगे गए पैसे को ट्रांसफर होने से पहले रोक सके। जब तक डिजिटल साक्षरता को स्कूल पाठ्यक्रम और बैंकिंग प्रक्रियाओं में नहीं जोड़ा जाता, इस तरह की एडवाइजरियाँ केवल कागज़ी खानापूर्ति बनकर रह जाएंगी।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु साइबर क्राइम विंग की एडवाइजरी में किन-किन स्कैम की चेतावनी दी गई है?
एडवाइजरी में मुख्य रूप से चार प्रकार के स्कैम की चेतावनी दी गई है — फर्जी लॉटरी संदेश, इंस्टेंट लोन ऐप, स्कॉलरशिप के झूठे वादे और किराने के सामान पर असामान्य छूट के ऑफर। इन सभी का उद्देश्य लोगों की निजी व बैंकिंग जानकारी चुराना या सीधे पैसे ठगना है।
इंस्टेंट लोन ऐप स्कैम कैसे काम करता है?
ये फर्जी ऐप तुरंत ऋण देने का वादा करते हैं और इंस्टॉलेशन के दौरान यूजर के फोन का निजी डेटा — संपर्क, फोटो, दस्तावेज — एकत्र कर लेते हैं। इसके बाद ठग इसी डेटा का उपयोग कर्ज वसूली के नाम पर उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग के लिए करते हैं।
साइबर धोखाधड़ी होने पर कहाँ शिकायत करें?
साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएँ। जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, धन वापसी की संभावना उतनी अधिक होगी।
फर्जी किराना छूट ऑफर से कैसे बचें?
किसी भी किराना प्रमोशन या भारी छूट के ऑफर को संबंधित रिटेलर की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर जाकर सत्यापित करें। अनजान लिंक पर क्लिक न करें और ओटीपी या बैंकिंग जानकारी कभी साझा न करें, चाहे ऑफर कितना भी आकर्षक लगे।
फर्जी लॉटरी मैसेज की पहचान कैसे करें?
फर्जी लॉटरी मैसेज में आमतौर पर बड़ी रकम जीतने का दावा होता है और साथ ही प्रोसेसिंग फीस, टैक्स या शुल्क के नाम पर एडवांस पैसे माँगे जाते हैं। कोई भी वैध लॉटरी पहले पैसे नहीं माँगती — ऐसे किसी भी संदेश को अनदेखा करें और आगे शेयर न करें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले