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तेलंगाना साइबर ब्यूरो का अलर्ट: 'बॉस स्कैम' से 20 दिनों में 300+ शिकायतें, जानें कैसे बचें

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तेलंगाना साइबर ब्यूरो का अलर्ट: 'बॉस स्कैम' से 20 दिनों में 300+ शिकायतें, जानें कैसे बचें

सारांश

'बॉस स्कैम' अब भारत में तेज़ी से पैर पसार रहा है — मात्र 20 दिनों में 300 से अधिक शिकायतें। तेलंगाना साइबर ब्यूरो की निदेशक शिखा गोयल ने चेताया है कि ज़िप फाइलों में छुपा मैलवेयर वरिष्ठ अधिकारियों के व्हाट्सएप सेशन हाइजैक कर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा है।

मुख्य बातें

तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (TGCSB) ने 24 जून 2025 को 'बॉस स्कैम' (CEO इंप्रेशनेशन फ्रॉड) को लेकर राष्ट्रव्यापी अलर्ट जारी किया।
मात्र 20 दिनों में देशभर में 300 से अधिक शिकायतें दर्ज, जो इस खतरे की तेज़ रफ़्तार को दर्शाती हैं।
साइबर अपराधी ईमेल/व्हाट्सएप पर ज़िप/RAR फाइलें भेजकर डिवाइस में मैलवेयर इंस्टॉल करते हैं और वेब व्हाट्सएप सेशन हाइजैक करते हैं।
TGCSB निदेशक शिखा गोयल ने वित्तीय निर्देशों की फोन पर पुष्टि, MFA सक्रिय करने और संदिग्ध अटैचमेंट न खोलने की सलाह दी।
पीड़ित राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर तत्काल शिकायत दर्ज करें।

तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (TGCSB) ने 24 जून 2025 को नागरिकों, सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों, निजी कंपनियों और व्यावसायिक संस्थानों को एक नए और तेज़ी से फैलते साइबर खतरे — 'बॉस स्कैम' (सीईओ इंप्रेशनेशन फ्रॉड) — के प्रति सावधान किया है। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की एडवाइजरी के हवाले से जारी इस चेतावनी में बताया गया है कि मात्र 20 दिनों के भीतर देशभर में 300 से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।

क्या है 'बॉस स्कैम'

इस साइबर धोखाधड़ी में अपराधी ईमेल या व्हाट्सएप के ज़रिए वरिष्ठ अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों और कारोबारी प्रमुखों को निशाना बनाते हैं। वे नियामक अनुपालन (रेगुलेटरी कंप्लायंस) या ज़रूरी सूचना के बहाने ज़िप/RAR फाइलें भेजते हैं। जैसे ही पीड़ित इन फाइलों को खोलता है, उसके डिवाइस पर मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है, जो सक्रिय वेब व्हाट्सएप सेशन और अन्य संवेदनशील जानकारी तक अनधिकृत पहुँच बना लेता है।

इसके बाद साइबर अपराधी संगठन के किसी वरिष्ठ अधिकारी का रूप धारण कर कर्मचारियों या वित्त टीमों को धोखाधड़ी भरे निर्देश देते हैं — तत्काल धनराशि ट्रांसफर करने या गोपनीय जानकारी साझा करने का दबाव बनाते हैं।

खतरे के संकेत — इन पर रखें नज़र

TGCSB की निदेशक शिखा गोयल ने बुधवार को जारी बयान में निम्नलिखित 'रेड फ्लैग्स' की पहचान की:

अचानक प्राप्त ज़िप/RAR अटैचमेंट; 'जरूरी कंप्लायंस' या 'तुरंत कार्रवाई जरूरी' जैसे संदेश; गोपनीय वित्तीय लेनदेन के अनुरोध जो केवल ईमेल या व्हाट्सएप पर आए हों; निर्धारित स्वीकृति प्रक्रियाओं को दरकिनार करने का दबाव; और बिना सत्यापन के तत्काल कदम उठाने की माँग।

बचाव के उपाय

गोयल ने संगठनों और व्यक्तियों को निम्नलिखित सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी:

वित्तीय निर्देशों की पुष्टि सीधे फोन कॉल या आधिकारिक संचार माध्यमों से करें। अज्ञात या असत्यापित स्रोतों से आई संदिग्ध फाइलें और अटैचमेंट न खोलें। सक्रिय वेब व्हाट्सएप सेशन नियमित रूप से जाँचें और अनुपयोगी डिवाइसेज़ से लॉग आउट करें। जहाँ भी संभव हो, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) सक्रिय रखें। संस्थागत वित्तीय लेनदेन के लिए निर्धारित स्वीकृति प्रक्रियाओं का पालन करें। कर्मचारियों के लिए नियमित साइबर जागरूकता प्रशिक्षण आयोजित करें।

व्यापक संदर्भ

यह अलर्ट ऐसे समय में आया है जब भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। I4C के आँकड़ों के अनुसार, इस प्रकार की बिज़नेस ईमेल कंप्रोमाइज़ (BEC) शैली की धोखाधड़ी अब न केवल बड़े कॉर्पोरेट, बल्कि मध्यम और लघु उद्यमों को भी निशाना बना रही है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब TGCSB ने किसी उभरते साइबर खतरे पर त्वरित एडवाइजरी जारी की हो — ब्यूरो पिछले कुछ वर्षों में साइबर जागरूकता अभियानों में अग्रणी रहा है।

क्या करें अगर हों शिकार

यदि कोई व्यक्ति या संगठन इस स्कैम का शिकार हो जाए, तो तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। साइबर अपराध की रिपोर्टिंग में जितनी जल्दी की जाए, धनराशि वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक संगठित साइबर अपराध अभियान है जो भारत के कॉर्पोरेट और सरकारी ढाँचे की कमज़ोरियों को भुना रहा है। विडंबना यह है कि इस स्कैम की सफलता तकनीकी खामियों से नहीं, बल्कि संस्थागत प्रक्रियाओं की अनदेखी से होती है — जब कर्मचारी 'बॉस के आदेश' पर बिना सत्यापन के कार्य करते हैं। TGCSB की त्वरित एडवाइजरी सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या देश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के व्यवसायों तक यह जागरूकता पहुँच पाएगी, जहाँ साइबर प्रशिक्षण अभी भी सीमित है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'बॉस स्कैम' या CEO इंप्रेशनेशन फ्रॉड क्या है?
'बॉस स्कैम' एक साइबर धोखाधड़ी है जिसमें अपराधी किसी संगठन के वरिष्ठ अधिकारी (CEO/बॉस) का रूप धारण कर कर्मचारियों को धोखाधड़ी भरे वित्तीय निर्देश देते हैं। इसके लिए वे पहले ईमेल या व्हाट्सएप पर ज़िप/RAR फाइल भेजकर पीड़ित के डिवाइस में मैलवेयर इंस्टॉल करते हैं और फिर उसके संचार सत्र (सेशन) को हाइजैक कर लेते हैं।
इस स्कैम में मैलवेयर कैसे काम करता है?
जैसे ही पीड़ित ईमेल या व्हाट्सएप पर भेजी गई संदिग्ध ज़िप/RAR फाइल खोलता है, उसके डिवाइस पर मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है। यह मैलवेयर सक्रिय वेब व्हाट्सएप सेशन और अन्य संवेदनशील जानकारी तक अनधिकृत पहुँच बना लेता है, जिससे अपराधी वरिष्ठ अधिकारी बनकर संदेश भेज सकते हैं।
देशभर में कितनी शिकायतें दर्ज हुई हैं?
TGCSB निदेशक शिखा गोयल के अनुसार, I4C की एडवाइजरी के मुताबिक मात्र 20 दिनों के भीतर देशभर में 300 से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। यह आँकड़ा इस साइबर खतरे के तेज़ी से फैलने का संकेत है।
'बॉस स्कैम' से बचने के लिए क्या करें?
वित्तीय निर्देश मिलने पर सीधे फोन कॉल से पुष्टि करें और अज्ञात स्रोतों से आई फाइलें न खोलें। मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) सक्रिय रखें, वेब व्हाट्सएप सेशन नियमित जाँचें और संगठन की निर्धारित स्वीकृति प्रक्रियाओं का पालन करें।
स्कैम का शिकार होने पर कहाँ शिकायत करें?
यदि आप इस स्कैम के शिकार हों, तो तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत की जाए, धनराशि वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक होती है।
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