'बॉस स्कैम' पर I4C की चेतावनी: CEO के नाम से ट्रोजन वायरस भेजकर हो रही वित्तीय ठगी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने 22 जून 2026 को साइबर धोखाधड़ी के एक नए और खतरनाक तरीके — 'बॉस स्कैम' या 'सीईओ इम्पर्सोनेशन फ्रॉड' — के प्रति कंपनियों और उनके कर्मचारियों को सतर्क किया है। इस स्कैम में साइबर अपराधी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों और सीईओ की डिजिटल पहचान हथियाकर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं।
कैसे काम करता है यह स्कैम
I4C के अनुसार, ठग सबसे पहले खुद को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) जैसे नियामक संस्थानों का अधिकारी बताकर ईमेल या व्हाट्सऐप के ज़रिए कंपनी के शीर्ष अधिकारियों से संपर्क करते हैं। संदेश में दावा किया जाता है कि कंपनी ने कोई गंभीर नियामकीय उल्लंघन किया है और तत्काल कार्रवाई अनिवार्य है।
इसके बाद एक ज़िप फाइल भेजी जाती है, जिसमें हैकिंग सॉफ्टवेयर छुपा होता है। कई मामलों में सीईओ या वरिष्ठ अधिकारी उस संदेश को सीधे वित्त विभाग को अग्रेषित कर देते हैं, जिससे खतरा और व्यापक हो जाता है।
ट्रोजन वायरस से डिवाइस पर कब्ज़ा
I4C ने बताया कि जैसे ही यह ज़िप फाइल किसी विंडोज़ सिस्टम में खोली जाती है, एक ट्रोजन वायरस सक्रिय हो जाता है। इससे डिवाइस और व्हाट्सऐप वेब सेशन पर अपराधियों का नियंत्रण स्थापित हो जाता है।
इसके बाद अपराधी उस अधिकारी के असली व्हाट्सऐप अकाउंट का उपयोग करके कर्मचारियों को फर्जी भुगतान निर्देश भेजते हैं और धनराशि को म्यूल बैंक खातों में स्थानांतरित करा लेते हैं। एक अन्य तरीके में हैकर डिवाइस की कॉन्टैक्ट लिस्ट में बदलाव कर सीईओ के नाम से अपना नंबर सेव कर लेते हैं और उसी से कर्मचारियों को निर्देश भेजते हैं।
I4C की सलाह: इन सावधानियों का पालन करें
साइबर एजेंसी ने कंपनियों और कर्मचारियों को निम्नलिखित सावधानियाँ बरतने की सलाह दी है:
केवल व्हाट्सऐप या ईमेल संदेश के आधार पर कोई भी वित्तीय लेन-देन न करें — हर ट्रांजैक्शन की पुष्टि फोन कॉल या व्यक्तिगत बातचीत से करें। अज्ञात स्रोत से आई किसी भी फाइल को न खोलें। I4C ने स्पष्ट किया है कि RBI जैसी नियामक संस्थाएँ व्हाट्सऐप पर सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं भेजतीं।
इसके अतिरिक्त, सिस्टम में सॉफ्टवेयर रिस्ट्रिक्शन पॉलिसी लागू करना, व्हाट्सऐप के 'लिंक्ड डिवाइस' की नियमित जाँच करना और सभी सिस्टम में अपडेटेड एंटी-मालवेयर सुरक्षा बनाए रखना अनिवार्य बताया गया है।
साइबर ठगी होने पर क्या करें
I4C ने कहा है कि किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में नागरिक तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएँ। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब भारत में कॉर्पोरेट साइबर धोखाधड़ी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और डिजिटल कार्यस्थलों पर निर्भरता पहले से कहीं अधिक हो गई है।