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गूगल फायरबेस का साइबर अपराधियों द्वारा दुरुपयोग: भारत ने 57 फर्जी वेबसाइटें हटाने का दिया आदेश

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गूगल फायरबेस का साइबर अपराधियों द्वारा दुरुपयोग: भारत ने 57 फर्जी वेबसाइटें हटाने का दिया आदेश

सारांश

साइबर अपराधी गूगल के फायरबेस को ढाल बनाकर SBI, ICICI जैसे बैंकों की नकली वेबसाइटें चला रहे थे और पीड़ितों के OTP व क्रेडिट कार्ड डेटा चुरा रहे थे। भारत ने I4C के ज़रिए गूगल को 57 से अधिक ऐसी वेबसाइटें तत्काल हटाने का आदेश दिया है।

मुख्य बातें

I4C ने अगस्त 2026 में गूगल को फायरबेस पर होस्ट 57 से अधिक संदिग्ध वेबसाइटें और डेटाबेस हटाने का आदेश दिया।
साइबर अपराधी कथित तौर पर SBI, ICICI बैंक और Axis बैंक की नकली वेबसाइटें बनाकर उपयोगकर्ताओं का OTP और क्रेडिट कार्ड डेटा चुरा रहे थे।
पीएम-किसान योजना के नाम पर फर्जी वेबसाइटों से एंड्रॉयड मैलवेयर ऐप डाउनलोड करवाया जा रहा था।
चोरी किया गया डेटा ठगों द्वारा नियंत्रित फायरबेस डेटाबेस में स्टोर किया जाता था।
फायरबेस या गूगल को इन गतिविधियों के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया गया है — समस्या वैध इंफ्रास्ट्रक्चर के दुरुपयोग में है।

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने अगस्त 2026 में गूगल को आदेश दिया कि वह फायरबेस प्लेटफॉर्म पर होस्ट की गई कम से कम 57 वेबसाइटों और डेटाबेस को तत्काल हटाए, जिनका कथित तौर पर फिशिंग अभियान चलाने, मैलवेयर फैलाने और संवेदनशील वित्तीय जानकारी चुराने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा था। यह कार्रवाई इस बात की ओर ध्यान दिलाती है कि किस तरह साइबर अपराधी वैध क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को अपने आपराधिक नेटवर्क की आड़ बना रहे हैं।

फायरबेस क्या है और यह कैसे काम करता है

फायरबेस, गूगल का क्लाउड-आधारित डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म है, जिसे दुनियाभर के डेवलपर्स मोबाइल एप्लिकेशन और वेबसाइट बनाने, चलाने और प्रबंधित करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इसमें वेबसाइट होस्टिंग, डेटा स्टोरेज, यूजर ऑथेंटिकेशन, एनालिटिक्स और ऐप मैनेजमेंट जैसी तैयार सेवाएं उपलब्ध हैं।

इसे अकसर 'बैकएंड-एज-ए-सर्विस' प्लेटफॉर्म कहा जाता है — यानी डेवलपर्स को किसी एप्लिकेशन का पूरा बैकएंड शून्य से बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। फायरबेस का इंफ्रास्ट्रक्चर गूगल के वृहद क्लाउड कारोबार का हिस्सा है और यह स्वयं एक पूरी तरह वैध तकनीकी सेवा है।

साइबर अपराधी फायरबेस का दुरुपयोग कैसे कर रहे हैं

I4C की ओर से गूगल को भेजे गए नोटिस के अनुसार, जालसाज कथित तौर पर फायरबेस पर होस्ट की गई वेबसाइटों का उपयोग बड़े बैंकों और भरोसेमंद संगठनों की नकल करने वाले फर्जी पेज बनाने के लिए कर रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ वेबसाइटों ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI), ICICI बैंक और Axis बैंक की आधिकारिक वेबसाइटों की हूबहू नकल की, ताकि उपयोगकर्ताओं को संवेदनशील जानकारी दर्ज करने के लिए गुमराह किया जा सके।

नोटिस में यह भी पहचाना गया कि कुछ फायरबेस डेटाबेस का उपयोग पीड़ितों के स्मार्टफोन से चुराई गई जानकारी — जिसमें क्रेडिट कार्ड विवरण और वन-टाइम पासवर्ड (OTP) शामिल थे — को संग्रहीत करने के लिए किया जा रहा था।

पीएम-किसान के नाम पर धोखाधड़ी का तरीका

एक रिपोर्ट किए गए मामले में ठगों ने कथित तौर पर पीएम-किसान भुगतान में सहायता देने का दावा करने वाली फर्जी वेबसाइटें बनाईं। इन वेबसाइटों के ज़रिए पीड़ितों को एक एंड्रॉयड एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए राजी किया गया, जो कथित तौर पर फर्जी थी और पीड़ित के फोन से जानकारी एकत्र कर सकती थी।

आरोप है कि चोरी किया गया डेटा बाद में ठगों द्वारा नियंत्रित फायरबेस डेटाबेस में भेजा जाता था। इस तरह एक पूरी आपराधिक शृंखला तैयार होती है — फर्जी वेबसाइट पीड़ित को फँसाती है, फर्जी ऐप डिवाइस से डेटा निकालती है, और फायरबेस डेटाबेस चोरी के डेटा को स्टोर करने के लिए बैकएंड का काम करता है।

वैध इंफ्रास्ट्रक्चर का आपराधिक उपयोग क्यों खतरनाक है

वैध क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके अपराधी अपनी फर्जी वेबसाइटों और बैकएंड सिस्टम को संदेह से परे रख सकते हैं। गौरतलब है कि फायरबेस जैसी सेवाओं का डोमेन और SSL सर्टिफिकेट स्वाभाविक रूप से विश्वसनीय दिखते हैं, जिससे सामान्य उपयोगकर्ता के लिए असली और नकली वेबसाइट में फर्क करना कठिन हो जाता है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग तेज़ी से बढ़ा है, जिसने साइबर अपराधियों के लिए संभावित शिकारों का दायरा भी बड़ा किया है। स्पष्ट रहे कि इन गतिविधियों के लिए फायरबेस या गूगल को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया गया है — समस्या प्लेटफॉर्म में नहीं, बल्कि उसके दुरुपयोग में है।

भारत की कार्रवाई और आगे की राह

I4C के नोटिस के बाद भारत ने अगस्त 2026 में गूगल को 57 से अधिक संदिग्ध वेबसाइटों और डेटाबेस को हटाने का आदेश दिया। यह कदम भारत सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत डिजिटल धोखाधड़ी पर नकेल कसने के लिए बड़ी तकनीकी कंपनियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित रिपोर्टिंग और दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (2FA) जैसे उपाय आम नागरिकों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो पारंपरिक URL-आधारित फिशिंग पहचान के तरीके अपर्याप्त हो जाते हैं। I4C की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारत के पास ऐसे मामलों में रियल-टाइम निगरानी और त्वरित टेकडाउन का स्थायी तंत्र है — या यह कार्रवाई भी तब हुई जब नुकसान हो चुका था। डिजिटल भुगतान के विस्तार के साथ ऐसे खतरों की आवृत्ति बढ़ेगी, और प्रतिक्रियात्मक नोटिस से आगे बढ़कर निवारक तंत्र की ज़रूरत है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गूगल फायरबेस क्या है और इसका दुरुपयोग कैसे हो रहा है?
फायरबेस गूगल का क्लाउड-आधारित डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म है, जो डेवलपर्स को वेबसाइट होस्टिंग, डेटा स्टोरेज और ऐप मैनेजमेंट जैसी सेवाएं देता है। साइबर अपराधी कथित तौर पर इसी इंफ्रास्ट्रक्चर पर फर्जी बैंकिंग वेबसाइटें होस्ट कर और चोरी किया गया डेटा स्टोर कर इसका दुरुपयोग कर रहे थे।
भारत ने फायरबेस पर कितनी वेबसाइटें हटाने का आदेश दिया?
I4C ने अगस्त 2026 में गूगल को फायरबेस पर होस्ट कम से कम 57 वेबसाइटों और डेटाबेस को हटाने का आदेश दिया, जो कथित तौर पर फिशिंग, मैलवेयर वितरण और वित्तीय धोखाधड़ी में इस्तेमाल हो रहे थे।
किन बैंकों की नकली वेबसाइटें बनाई गई थीं?
रिपोर्टों के अनुसार, जालसाजों ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI), ICICI बैंक और Axis बैंक की आधिकारिक वेबसाइटों जैसे दिखने वाले फर्जी पेज बनाए थे। इन पेजों के ज़रिए उपयोगकर्ताओं से क्रेडिट कार्ड विवरण और OTP जैसी संवेदनशील जानकारी ठगी जाती थी।
पीएम-किसान के नाम पर क्या धोखाधड़ी हो रही थी?
ठगों ने कथित तौर पर पीएम-किसान भुगतान में सहायता का दावा करने वाली फर्जी वेबसाइटें बनाईं और पीड़ितों को एक एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करवाया। यह ऐप कथित तौर पर फर्जी थी और पीड़ित के फोन से डेटा चुराकर ठगों के फायरबेस डेटाबेस में भेजती थी।
क्या फायरबेस या गूगल इस धोखाधड़ी के लिए ज़िम्मेदार हैं?
नहीं। भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चिंता फायरबेस के वैध इंफ्रास्ट्रक्चर के आपराधिक दुरुपयोग से जुड़ी है, न कि प्लेटफॉर्म या गूगल की किसी गलती से। फायरबेस स्वयं एक वैध तकनीकी सेवा है।
राष्ट्र प्रेस
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