31 जुलाई 2026
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कॉइनबेस फिशिंग स्कैम: ईडी ने PMLA के तहत 8 आरोपियों के खिलाफ द्वारका कोर्ट में चार्जशीट दाखिल, ₹64.55 करोड़ जब्त

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कॉइनबेस फिशिंग स्कैम: ईडी ने PMLA के तहत 8 आरोपियों के खिलाफ द्वारका कोर्ट में चार्जशीट दाखिल, ₹64.55 करोड़ जब्त

सारांश

कॉइनबेस की नकली वेबसाइट बनाकर $20 मिलियन से अधिक की क्रिप्टोकरेंसी चुराने के आरोप में ईडी ने 8 आरोपियों के खिलाफ द्वारका कोर्ट में PMLA के तहत चार्जशीट दाखिल की। मुख्य आरोपी चिराग तोमर अमेरिका में 60 महीने की सजा काट रहा है; भारत में ₹64.55 करोड़ की संपत्ति जब्त।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 15 जून 2026 को द्वारका डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, नई दिल्ली में PMLA, 2002 के तहत अभियोजन शिकायत दायर की।
आरोपियों में चिराग तोमर, पंकज तोमर, कुशाग्र शाक्य, आकाश वैश, राहुल आनंद, केतन लूथरा के साथ तोमर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज और एक्साहोम्स रियल्टर्स शामिल हैं।
मुख्य आरोपी चिराग तोमर को FBI ने 20 दिसंबर 2023 को अटलांटा एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया था; अमेरिकी अदालत ने 60 महीने की सजा सुनाई।
आरोपियों ने कॉइनबेस की नकली वेबसाइटें बनाकर $20 मिलियन से अधिक की क्रिप्टोकरेंसी चुराई और P2P लेनदेन से भारतीय रुपये में बदला।
ईडी ने अब तक ₹64.55 करोड़ की चल-अचल संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की है; जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हेडक्वार्टर यूनिट ने कॉइनबेस फिशिंग स्कैम मामले में 15 जून 2026 को द्वारका डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, नई दिल्ली की स्पेशल कोर्ट में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत अभियोजन शिकायत दायर की। इस शिकायत में चिराग तोमर, पंकज तोमर, कुशाग्र शाक्य, आकाश वैश, राहुल आनंद, केतन लूथरा, तोमर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और एक्साहोम्स रियल्टर्स को आरोपी बनाया गया है। ईडी ने अब तक इस मामले में ₹64.55 करोड़ की चल-अचल संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जांच एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर शुरू की थी, जिसमें बताया गया था कि भारतीय नागरिक चिराग तोमर को अमेरिका में गिरफ्तार किया गया है। उस पर आरोप था कि उसने अमेरिका स्थित क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज 'कॉइनबेस' की हूबहू नकल करने वाली फर्जी वेबसाइटें बनाकर 2 करोड़ डॉलर (लगभग $20 मिलियन) से अधिक की क्रिप्टोकरेंसी चुराई। फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने 20 दिसंबर 2023 को चिराग तोमर को अटलांटा एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया था।

धोखाधड़ी का तरीका

जांच में सामने आया कि चिराग तोमर और उसके साथियों ने असली कॉइनबेस प्लेटफॉर्म जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइटें तैयार कीं। इन फर्जी साइटों के जरिए पीड़ितों के लॉगिन क्रेडेंशियल, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) कोड और अन्य एक्सेस विवरण हासिल किए गए। एक बार खातों तक पहुँच मिलने के बाद, पीड़ितों की क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स को आरोपियों के नियंत्रण वाले वॉलेट में स्थानांतरित कर दिया गया।

मनी लॉन्ड्रिंग का जाल

चोरी की गई क्रिप्टोकरेंसी को अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट्स में बदला गया और कई वॉलेट्स के जरिए घुमाया गया। इसके बाद पीयर-टू-पीयर (P2P) क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन के माध्यम से इसे भारतीय रुपये में परिवर्तित किया गया। यह रकम चिराग तोमर, उसके परिवार के सदस्यों, तोमर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, एक्साहोम्स रियल्टर्स, आकाश वैश, राहुल आनंद और अन्य सहयोगियों के बैंक खातों में जमा की गई। इस धन से चल-अचल संपत्तियाँ खरीदी गईं, जिससे अपराध की आय को वैध संपत्ति के रूप में दर्शाया गया।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कानूनी कार्रवाई

ईडी ने म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) चैनलों के जरिए अमेरिकी अधिकारियों से आपराधिक कार्रवाई और साक्ष्य संबंधी जानकारी हासिल की। अमेरिकी अदालत ने चिराग तोमर को 60 महीने की कैद की सजा सुनाई है, जिसके बाद दो वर्ष की सुपरवाइज्ड रिलीज का प्रावधान है। वह फिलहाल अमेरिका में हिरासत में है।

नागरिकों के लिए ईडी की चेतावनी

ईडी ने इस मामले के साथ-साथ आम नागरिकों को फिशिंग स्कैम से सावधान रहने की अपील की है। एजेंसी ने सलाह दी है कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें, किसी के साथ OTP, पासवर्ड या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें और किसी भी संदिग्ध संदेश या कॉल की सत्यता पहले जाँचें। इस मामले में आगे की जांच जारी है और भविष्य में और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत में उसके नेटवर्क — परिवार के सदस्यों, सहयोगियों और कंपनियों — तक ईडी की पहुँच यह दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय MLAT सहयोग कितना निर्णायक साबित हो सकता है। असली सवाल यह है कि ₹64.55 करोड़ की जब्ती $20 मिलियन के कुल घोटाले के मुकाबले अपेक्षाकृत कम क्यों है — क्या बाकी संपत्ति अभी भी ट्रेस की जा रही है, या वह पहले ही देश से बाहर जा चुकी है? यह मामला भारतीय नियामकों के लिए क्रिप्टो-संपत्ति ट्रैकिंग में तेज़ी लाने की ज़रूरत को रेखांकित करता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉइनबेस फिशिंग स्कैम क्या है?
यह एक अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी है जिसमें मुख्य आरोपी चिराग तोमर ने अमेरिकी क्रिप्टो एक्सचेंज 'कॉइनबेस' की हूबहू नकल करने वाली फर्जी वेबसाइटें बनाकर पीड़ितों के लॉगिन क्रेडेंशियल चुराए और $20 मिलियन से अधिक की क्रिप्टोकरेंसी हड़प ली। चोरी की गई संपत्ति को बाद में P2P लेनदेन के जरिए भारतीय रुपये में बदलकर रियल एस्टेट और कंपनियों में निवेश किया गया।
ईडी ने इस मामले में किन-किन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है?
ईडी ने चिराग तोमर, पंकज तोमर, कुशाग्र शाक्य, आकाश वैश, राहुल आनंद, केतन लूथरा के साथ-साथ तोमर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और एक्साहोम्स रियल्टर्स के खिलाफ PMLA, 2002 के तहत द्वारका डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, नई दिल्ली की स्पेशल कोर्ट में अभियोजन शिकायत दायर की है।
चिराग तोमर को क्या सजा मिली है?
अमेरिकी अदालत ने चिराग तोमर को 60 महीने (5 वर्ष) की कैद की सजा सुनाई है, जिसके बाद दो वर्ष की सुपरवाइज्ड रिलीज का प्रावधान है। FBI ने उसे 20 दिसंबर 2023 को अटलांटा एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल अमेरिका में हिरासत में है।
ईडी ने इस मामले में कितनी संपत्ति जब्त की है?
ईडी ने अब तक इस मामले में ₹64.55 करोड़ की चल-अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त किया है। जांच अभी जारी है और आगे और कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।
फिशिंग स्कैम से बचने के लिए ईडी ने क्या सलाह दी है?
ईडी ने नागरिकों को अनजान लिंक पर क्लिक न करने, OTP, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करने और किसी भी संदिग्ध संदेश या कॉल की सत्यता पहले जाँचने की सलाह दी है। एजेंसी ने कहा है कि फिशिंग स्कैम का मकसद फर्जी वेबसाइट, ईमेल, मैसेज या कॉल के जरिए निजी और वित्तीय जानकारी चुराना होता है।
राष्ट्र प्रेस
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