एचपीजेड टोकन क्रिप्टो घोटाला: ईडी ने दायर की दूसरी पूरक चार्जशीट, कुल आरोपी 437; चीनी कंपनियों का नेटवर्क उजागर

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एचपीजेड टोकन क्रिप्टो घोटाला: ईडी ने दायर की दूसरी पूरक चार्जशीट, कुल आरोपी 437; चीनी कंपनियों का नेटवर्क उजागर

सारांश

एचपीजेड टोकन घोटाला महज एक क्रिप्टो फ्रॉड नहीं — यह चीन से जुड़ी कंपनियों, फर्जी डायरेक्टरों और बिना लाइसेंस पेमेंट गेटवे का एक सुनियोजित जाल था। ईडी की दूसरी पूरक चार्जशीट में 437 आरोपी और ₹2,200 करोड़ की धोखाधड़ी — यह भारत के डिजिटल वित्तीय तंत्र की सबसे बड़ी कमज़ोरियों को उजागर करती है।

Key Takeaways

ईडी ने 30 अप्रैल 2026 को दीमापुर की विशेष पीएमएलए अदालत में एचपीजेड टोकन घोटाले में दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल की। नई शिकायत में 87 नए आरोपी जोड़े गए; कुल आरोपियों की संख्या अब 437 हो गई है। घोटाले में अपराध से अर्जित धनराशि ₹2,200 करोड़ आँकी गई; ईडी ने अब तक ₹662 करोड़ से अधिक की संपत्ति कुर्क की। चीनी नागरिकों और मेसर्स झूदाओ इन्फोटेक जैसी कंपनियों ने बिना आरबीआई लाइसेंस के पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में काम किया। घोटाला जून 2021 में शुरू हुआ और अगस्त 2021 में प्लेटफॉर्म बंद होने से हज़ारों निवेशक ठगे गए। मुख्य साजिशकर्ता के रूप में भूपेश अरोड़ा पर आरोप; शेल कंपनियों और हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 30 अप्रैल 2026 को एचपीजेड टोकन क्रिप्टोकरेंसी निवेश घोटाले में नागालैंड के दीमापुर स्थित पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत के समक्ष दूसरी पूरक अभियोजन शिकायत (सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल की। इस नई चार्जशीट में 87 नए आरोपियों को शामिल किया गया है, जिससे इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 437 हो गई है। जांच में चीन से जुड़ी कंपनियों और फर्जी पेमेंट गेटवे के एक सुनियोजित नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।

मामले की पृष्ठभूमि

इस मामले की शुरुआत तीन एफआईआर से हुई — कोहिमा के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, गुवाहाटी के उलुबारी स्थित सीआईडी पुलिस स्टेशन और दिल्ली की सीबीआई द्वारा दर्ज की गई। इन्हीं के आधार पर 12 अप्रैल 2022 को एक ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) दर्ज किया गया। 4 मार्च 2024 को मुख्य अभियोजन शिकायत, फिर 12 जनवरी 2026 को पहली पूरक शिकायत दायर की गई थी। वर्तमान शिकायत इस क्रम में तीसरा कदम है।

घोटाले का तरीका

एचपीजेड टोकन एक ऐप-आधारित क्रिप्टोकरेंसी निवेश योजना थी, जिसने पूरे भारत में भोले-भाले निवेशकों को बिटकॉइन माइनिंग मशीनों में निवेश के ज़रिए कई गुना मुनाफे का झूठा वादा करके ठगा। यह घोटाला जून 2021 में शुरू हुआ और अगस्त 2021 में धोखेबाजों ने प्लेटफॉर्म बंद कर दिया, जिससे हज़ारों निवेशक अपनी जमा राशि तक पहुँच खो बैठे। जांच के अनुसार, भूपेश अरोड़ा और उनके सहयोगियों पर इस घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है, जिन्होंने शेल कंपनियों, म्यूल अकाउंट्स, हवाला ऑपरेटरों और विदेशी मुद्रा विनिमयकर्ताओं के नेटवर्क के ज़रिए अपराध की कमाई को ठिकाने लगाया।

चीनी कंपनियों का नेटवर्क

दूसरी पूरक शिकायत में एक गंभीर पैटर्न उभरकर सामने आया है — चीन से जुड़ी संस्थाओं की एक सुनियोजित कड़ी, जिनका उपयोग अपराध से प्राप्त धनराशि को इकट्ठा करने और कई परतों में छिपाने के लिए किया गया। जांच के अनुसार, मेसर्स झूदाओ इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड — जिसे जनरल मैनेजर मिंग लू और डायरेक्टर जियान ली चला रहे थे — एक पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में काम कर रही थी और ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाज़ी तथा पोंजी निवेश घोटालों से प्राप्त अपराध के पैसे आगे भेजने में कथित तौर पर मदद कर रही थी। यह कंपनी आरबीआई के लाइसेंस के बिना गैर-कानूनी तरीके से संचालित हो रही थी। तीनों अभियोजन शिकायतों में जिन चीनी नागरिकों के नाम शामिल हैं, उनमें लिनलेई युआन, झोउ जी, वान जून, मिंग लू, जियान ली, यानपेंग क्यू, यी लियू और केविन हुआंग प्रमुख हैं।

नए आरोपी और फिनटेक कंपनियाँ

नई चार्जशीट में जोड़े गए 87 आरोपियों में पेमेंट गेटवे कंपनियाँ, फिनटेक मध्यस्थ, ई-कॉमर्स कंपनियाँ और उनके डायरेक्टर शामिल हैं। जांच के अनुसार, मेसर्स पेगेट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स सेफपे टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स वर्टस पेमेंट सॉल्यूशंस एलएलपी, मेसर्स इंट्रापे प्रोडक्ट सॉल्यूशंस और मेसर्स आईईसीएस कंसल्टेंसी लिमिटेड ने अपने प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों — रवि शंकर गुप्ता, आदित्य ओबेरॉय, पंकज त्रिपाठी और जॉय ओबेरॉय — के ज़रिए पेमेंट गेटवे इंफ्रास्ट्रक्चर का दुरुपयोग कर कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग में सहयोग किया। जांच में यह भी सामने आया कि कई कंपनियों के डायरेक्टर वास्तव में 'डमी डायरेक्टर' थे, जिन्हें अपना नाम देने के लिए मामूली रकम दी गई थी।

संपत्ति कुर्की और आगे की जांच

इस मामले में अपराध से अर्जित धनराशि की पहचान लगभग ₹2,200 करोड़ के रूप में की गई है। ईडी ने अब तक ₹662 करोड़ से अधिक की संपत्ति कुर्क या फ्रीज की है। गौरतलब है कि यह घोटाला फिनटेक कंपनियों, पेमेंट गेटवे, ई-कॉमर्स संस्थाओं, गेमिंग कंपनियों और क्रिप्टोकरेंसी परिसंपत्तियों के बहु-स्तरीय जाल के ज़रिए संचालित किया गया था। ईडी ने स्पष्ट किया है कि आगे की जांच अभी जारी है और भविष्य में और भी खुलासे संभव हैं।

Point of View

लेकिन असली सवाल यह है कि बिना आरबीआई लाइसेंस के काम कर रही चीनी पेमेंट कंपनियाँ इतने लंबे समय तक नियामकीय निगरानी से कैसे बचती रहीं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत के फिनटेक क्षेत्र में विदेशी संस्थाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। डमी डायरेक्टरों और बहु-स्तरीय मनी लॉन्ड्रिंग का यह मॉडल पहली बार नहीं देखा गया — पर इस पैमाने पर चीनी नागरिकों की संलिप्तता एक नई और गंभीर चुनौती है जिसे केवल अभियोजन से नहीं, नियामकीय सुधार से भी संबोधित करना होगा।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

एचपीजेड टोकन घोटाला क्या है?
एचपीजेड टोकन एक ऐप-आधारित क्रिप्टोकरेंसी निवेश योजना थी जिसने निवेशकों को बिटकॉइन माइनिंग मशीनों में निवेश पर कई गुना मुनाफे का झूठा वादा किया। जून 2021 में शुरू होकर अगस्त 2021 में बंद हो जाने से हज़ारों निवेशकों का पैसा डूब गया और अपराध से अर्जित धनराशि ₹2,200 करोड़ आँकी गई है।
ईडी की दूसरी पूरक चार्जशीट में कितने नए आरोपी हैं?
दूसरी पूरक अभियोजन शिकायत में 87 नए आरोपी जोड़े गए हैं। इससे पहले की मुख्य शिकायत और पहली पूरक शिकायत में 350 आरोपी थे, जिससे कुल संख्या अब 437 हो गई है।
इस मामले में चीनी कंपनियों की क्या भूमिका है?
जांच के अनुसार, मेसर्स झूदाओ इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड सहित कई चीन से जुड़ी कंपनियाँ बिना आरबीआई लाइसेंस के पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में काम कर रही थीं। इन कंपनियों ने घोटाले से प्राप्त अपराध की कमाई को कई परतों में छिपाने में कथित तौर पर मदद की।
ईडी ने अब तक कितनी संपत्ति कुर्क की है?
ईडी ने इस मामले में अब तक ₹662 करोड़ से अधिक की संपत्ति कुर्क या फ्रीज की है। कुल अपराध से अर्जित धनराशि लगभग ₹2,200 करोड़ आँकी गई है और जांच अभी जारी है।
इस मामले में पहली बार शिकायत कब दर्ज हुई थी?
मुख्य अभियोजन शिकायत 4 मार्च 2024 को दाखिल की गई थी। इससे पहले 12 अप्रैल 2022 को ईसीआईआर दर्ज हुआ था, जो कोहिमा, गुवाहाटी और दिल्ली में दर्ज तीन एफआईआर पर आधारित था।
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