ईडी की बड़ी कार्रवाई: साइबर धोखाधड़ी मामले में ₹187 करोड़ की संपत्तियां जब्त, अमेरिकी नागरिक थे निशाने पर
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने अवैध कॉल सेंटर संचालित कर विदेशी नागरिकों को ऑनलाइन ठगने वाले गिरोह के खिलाफ धन शोधन जांच के तहत ₹187.13 करोड़ की संपत्तियां जब्त की हैं। जब्त की गई इन संपत्तियों में हरियाणा, दिल्ली और गोवा में स्थित आलीशान फार्महाउस और विला शामिल हैं। यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय साइबर वित्तीय अपराध नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी जब्तियों में से एक मानी जा रही है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज उस एफआईआर के आधार पर शुरू की, जो अमेरिकी जांच एजेंसी FBI से प्राप्त सूचना पर आधारित थी। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत अमेरिकी नागरिकों से लाखों डॉलर की धोखाधड़ी करने का आरोप है। जांच में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधान लागू किए गए हैं।
कैसे चलाया जाता था धोखाधड़ी का नेटवर्क
जांच के अनुसार, डिजिकैप्स – द फ्यूचर ऑफ डिजिटल नामक अवैध कॉल सेंटर में जिगर अहमद, यश खुराना, इंदरजीत सिंह भाली और निखिल शर्मा सहित कुल 36 कर्मचारी कार्यरत थे। ये सभी जोनी उर्फ जोनी त्यागी, दक्षय सेठी और गौरव वर्मा की देखरेख में काम करते थे।
आरोपियों ने तकनीकी सहायता सेवा की आड़ में अमेरिकी पीड़ितों को निशाना बनाया। उन्होंने पीड़ितों की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी चुराई और उन्हें अमेरिकी आंतरिक राजस्व सेवा (IRS) द्वारा कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। इसके बाद पीड़ितों को अपनी राशि क्रिप्टो खातों में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया गया। इस तरह विदेशी पीड़ितों के खातों से निकाली गई क्रिप्टो मुद्रा को बाद में ब्लिस इन्फ्राप्रॉपर्टीज एलएलपी जैसी फर्जी कंपनियों के माध्यम से अचल संपत्तियों में लगाया गया।
तलाशी अभियान और बरामदगी
जनवरी और फरवरी 2026 के दौरान ईडी ने PMLA, 2002 के तहत पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में 13 स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान विभिन्न डिजिटल उपकरण बरामद किए गए, ₹34 लाख की बेहिसाब नकदी जब्त की गई और ऐसे आपत्तिजनक दस्तावेज़ मिले जो आरोपियों को भारत और विदेश में उच्च मूल्य के निवेश से जोड़ते हैं।
जब्त संपत्तियां और आरोपी
जांच में सामने आया कि जोनी उर्फ जोनी त्यागी, दक्षय सेठी, राघव सतीहा, निखिल वर्मा, गौरव वर्मा और गौतम ढिंगरा ने अपराध से अर्जित धन को हरियाणा, दिल्ली और गोवा में अचल संपत्तियों में निवेश किया। इसी आधार पर PMLA, 2002 के तहत ₹187.12 करोड़ मूल्य की संपत्तियां औपचारिक रूप से जब्त की गई हैं।
आगे की जांच
ईडी के अनुसार इस मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य संलिप्त व्यक्तियों तथा संपत्तियों की पहचान की प्रक्रिया चल रही है। यह मामला उस बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है जिसमें भारत स्थित साइबर अपराधी विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर अपराध की आय को देश में ही संपत्तियों में बदल रहे हैं।