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व्हाट्सऐप मैलवेयर अभियान से 10,000 से अधिक भारतीय बचाए गए, गृह मंत्रालय ने बताया कैसे

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व्हाट्सऐप मैलवेयर अभियान से 10,000 से अधिक भारतीय बचाए गए, गृह मंत्रालय ने बताया कैसे

सारांश

सरकारी दस्तावेज़ों की आड़ में भेजी जा रही ZIP फाइलों के ज़रिए व्हाट्सऐप अकाउंट हाईजैक करने वाले एक परिष्कृत मैलवेयर अभियान से I4C ने 10,000 से अधिक भारतीयों को बचाया। C2 सर्वर जियो-ब्लॉक किए गए, लेकिन संक्रमण की शृंखला कॉर्पोरेट नेटवर्क तक पहुँचने का खतरा अभी भी बनी हुई है।

मुख्य बातें

I4C की कार्रवाई से 7 अगस्त 2026 तक 10,000 से अधिक भारतीयों को व्हाट्सऐप मैलवेयर अभियान से बचाया गया।
हमले में RBI.zip, MCA.zip, Statement of Account.zip जैसी फर्जी ZIP फाइलें भेजी जाती हैं जो खोलने पर ट्रोजन मैलवेयर इंस्टॉल करती हैं।
मैलवेयर पीड़ित के व्हाट्सऐप वेब सेशन को हाईजैक कर संपर्कों और ग्रुप्स में संक्रमित फाइल फैलाता है।
प्रभावित राज्यों में दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान शामिल हैं।
I4C ने 22 जून को एडवाइज़री जारी की थी; C2 सर्वर सहयोग पोर्टल के ज़रिए जियो-ब्लॉक किए जा रहे हैं।
साइबर धोखाधड़ी की शिकायत के लिए हेल्पलाइन 1930 या www.cybercrime.gov.in पर संपर्क करें।

गृह मंत्रालय (MHA) ने 7 अगस्त 2026 को खुलासा किया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की समन्वित कार्रवाई के ज़रिए व्हाट्सऐप अकाउंट को निशाना बनाने वाले एक बड़े मैलवेयर अभियान से 10,000 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। मंत्रालय के अनुसार, सहयोग पोर्टल के माध्यम से कमांड एंड कंट्रोल (C2) सर्वरों को जियो-ब्लॉक करने सहित कई तकनीकी कदम उठाए गए, जिससे इस साइबर हमले की पहुँच को प्रभावी रूप से सीमित किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर हाल के दिनों में व्हाट्सऐप अकाउंट टेकओवर से जुड़ी शिकायतों में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है। ये हमले ऐसे मैलवेयर के ज़रिए किए जा रहे हैं जिन्हें बैंक स्टेटमेंट या किसी सरकारी नियामक संस्था के आधिकारिक दस्तावेज़ के रूप में छिपाकर भेजा जाता है। I4C ने इससे पहले 22 जून को एक एडवाइज़री जारी कर नागरिकों को ऐसे हमलों के प्रति सतर्क किया था।

हमले का तरीका

साइबर अपराधी व्हाट्सऐप, एसएमएस या ई-मेल के माध्यम से 'Statement of Account.zip', 'RBI.zip' या 'MCA.zip' जैसे नामों वाली संपीड़ित (.zip) फाइलें भेजते हैं। कई मामलों में फाइल के नाम के साथ तारीख भी जोड़ी जाती है ताकि वे अधिक विश्वसनीय लगें। ये संदेश इस तरह तैयार किए जाते हैं कि वे किसी बैंक खाते के विवरण, वित्तीय दस्तावेज़ या किसी नियामक संस्था की तत्काल सूचना जैसे प्रतीत हों।

मंत्रालय के अनुसार, "जब कोई व्यक्ति अपने विंडोज़ डेस्कटॉप या लैपटॉप पर इन ZIP फाइलों को एक्सट्रैक्ट कर खोलता है, तो उसके सिस्टम में एक ट्रोजन मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है जो डिवाइस को हैक कर लेता है और पीड़ित के सक्रिय व्हाट्सऐप वेब सेशन को हाईजैक कर लेता है।" इसके अतिरिक्त, कई मामलों में साइबर अपराधी आयकर विभाग के नाम से फर्जी ई-मेल भी भेज रहे हैं।

संक्रमण की शृंखला और खतरे का दायरा

एक बार व्हाट्सऐप अकाउंट हैक होने के बाद अपराधी उसी अकाउंट का उपयोग पीड़ित के सभी संपर्कों और ग्रुप्स में वही संक्रमित फाइल भेजने के लिए करते हैं। अक्सर संदेश में यह निर्देश होता है कि फाइल को 'कंपनी के फाइनेंस मैनेजर को वेरिफिकेशन के लिए भेजें' और कंप्यूटर पर खोलें। सरकार के अनुसार, इस तरीके से संक्रमण की शृंखला तेज़ी से फैलती है और कई बार कॉर्पोरेट नेटवर्क तक पहुँचकर बड़े पैमाने पर साइबर सुरक्षा खतरा पैदा कर सकती है। यह अभियान दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्यों में सक्रिय पाया गया है।

सरकार की प्रतिक्रिया और नागरिकों के लिए सलाह

गृह मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान या संदिग्ध ZIP फाइल को डाउनलोड या खोलें नहीं। यदि कोई संदेश RBI, MCA, आयकर विभाग या किसी अन्य सरकारी संस्था के नाम से प्राप्त हो, तो उसकी सत्यता आधिकारिक माध्यमों से अवश्य जाँचें। साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर या www.cybercrime.gov.in पर तत्काल शिकायत दर्ज करें।

आगे क्या

I4C के अनुसार, सहयोग पोर्टल के ज़रिए मैलवेयर से जुड़े सर्वरों को लगातार ब्लॉक करने का काम जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में साइबर अपराध के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और सरकारी संस्थाओं के नाम का दुरुपयोग कर आम नागरिकों को ठगने के प्रयास अधिक परिष्कृत होते जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो RBI और आयकर विभाग जैसे नामों पर आम नागरिकों के भरोसे को तोड़ता है। I4C की त्वरित प्रतिक्रिया सराहनीय है, लेकिन 10,000 की संख्या उन लोगों की है जो बच गए — यह स्पष्ट नहीं है कि इससे पहले कितने प्रभावित हुए। जब तक डिजिटल साक्षरता और ZIP फाइल जोखिम के बारे में व्यापक जागरूकता नहीं बढ़ती, C2 सर्वर ब्लॉक करना एक अस्थायी उपाय ही रहेगा — अपराधी नए सर्वर पर जाने में देर नहीं लगाते।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

व्हाट्सऐप ZIP मैलवेयर हमला क्या है और यह कैसे काम करता है?
यह एक साइबर अभियान है जिसमें अपराधी RBI, MCA या बैंक स्टेटमेंट के नाम पर ZIP फाइलें भेजते हैं। विंडोज़ पर फाइल खोलने पर ट्रोजन मैलवेयर इंस्टॉल होता है जो व्हाट्सऐप वेब सेशन हाईजैक कर लेता है और पीड़ित के संपर्कों में वही संक्रमित फाइल फैला देता है।
I4C ने इस मैलवेयर अभियान को कैसे रोका?
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने सहयोग पोर्टल के माध्यम से मैलवेयर से जुड़े कमांड एंड कंट्रोल (C2) सर्वरों को जियो-ब्लॉक किया। इन समन्वित प्रयासों से 7 अगस्त 2026 तक 10,000 से अधिक भारतीयों को इस अभियान से सुरक्षित बचाया जा चुका है।
कौन से राज्य इस साइबर हमले से सबसे अधिक प्रभावित हैं?
गृह मंत्रालय के अनुसार, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्यों में ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं। NCRP पर इन राज्यों से व्हाट्सऐप अकाउंट टेकओवर की शिकायतों में हाल के दिनों में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है।
साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत क्या करें?
यदि आप किसी संदिग्ध ZIP फाइल के शिकार हो जाएँ, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। किसी भी अनजान ZIP फाइल को डाउनलोड या खोलने से पहले प्रेषक की पहचान आधिकारिक माध्यमों से सत्यापित करें।
क्या यह मैलवेयर केवल आम नागरिकों को नुकसान पहुँचाता है?
नहीं, गृह मंत्रालय के अनुसार यह मैलवेयर कॉर्पोरेट नेटवर्क तक भी पहुँच सकता है। हैक किए गए अकाउंट से 'कंपनी के फाइनेंस मैनेजर को वेरिफिकेशन के लिए भेजें' जैसे निर्देश के साथ संक्रमित फाइल फैलाई जाती है, जिससे व्यावसायिक नेटवर्क में बड़े पैमाने पर साइबर सुरक्षा खतरा पैदा हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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