व्हाट्सऐप मैलवेयर अभियान से 10,000 से अधिक भारतीय बचाए गए, गृह मंत्रालय ने बताया कैसे
सारांश
मुख्य बातें
गृह मंत्रालय (MHA) ने 7 अगस्त 2026 को खुलासा किया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की समन्वित कार्रवाई के ज़रिए व्हाट्सऐप अकाउंट को निशाना बनाने वाले एक बड़े मैलवेयर अभियान से 10,000 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। मंत्रालय के अनुसार, सहयोग पोर्टल के माध्यम से कमांड एंड कंट्रोल (C2) सर्वरों को जियो-ब्लॉक करने सहित कई तकनीकी कदम उठाए गए, जिससे इस साइबर हमले की पहुँच को प्रभावी रूप से सीमित किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर हाल के दिनों में व्हाट्सऐप अकाउंट टेकओवर से जुड़ी शिकायतों में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है। ये हमले ऐसे मैलवेयर के ज़रिए किए जा रहे हैं जिन्हें बैंक स्टेटमेंट या किसी सरकारी नियामक संस्था के आधिकारिक दस्तावेज़ के रूप में छिपाकर भेजा जाता है। I4C ने इससे पहले 22 जून को एक एडवाइज़री जारी कर नागरिकों को ऐसे हमलों के प्रति सतर्क किया था।
हमले का तरीका
साइबर अपराधी व्हाट्सऐप, एसएमएस या ई-मेल के माध्यम से 'Statement of Account.zip', 'RBI.zip' या 'MCA.zip' जैसे नामों वाली संपीड़ित (.zip) फाइलें भेजते हैं। कई मामलों में फाइल के नाम के साथ तारीख भी जोड़ी जाती है ताकि वे अधिक विश्वसनीय लगें। ये संदेश इस तरह तैयार किए जाते हैं कि वे किसी बैंक खाते के विवरण, वित्तीय दस्तावेज़ या किसी नियामक संस्था की तत्काल सूचना जैसे प्रतीत हों।
मंत्रालय के अनुसार, "जब कोई व्यक्ति अपने विंडोज़ डेस्कटॉप या लैपटॉप पर इन ZIP फाइलों को एक्सट्रैक्ट कर खोलता है, तो उसके सिस्टम में एक ट्रोजन मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है जो डिवाइस को हैक कर लेता है और पीड़ित के सक्रिय व्हाट्सऐप वेब सेशन को हाईजैक कर लेता है।" इसके अतिरिक्त, कई मामलों में साइबर अपराधी आयकर विभाग के नाम से फर्जी ई-मेल भी भेज रहे हैं।
संक्रमण की शृंखला और खतरे का दायरा
एक बार व्हाट्सऐप अकाउंट हैक होने के बाद अपराधी उसी अकाउंट का उपयोग पीड़ित के सभी संपर्कों और ग्रुप्स में वही संक्रमित फाइल भेजने के लिए करते हैं। अक्सर संदेश में यह निर्देश होता है कि फाइल को 'कंपनी के फाइनेंस मैनेजर को वेरिफिकेशन के लिए भेजें' और कंप्यूटर पर खोलें। सरकार के अनुसार, इस तरीके से संक्रमण की शृंखला तेज़ी से फैलती है और कई बार कॉर्पोरेट नेटवर्क तक पहुँचकर बड़े पैमाने पर साइबर सुरक्षा खतरा पैदा कर सकती है। यह अभियान दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्यों में सक्रिय पाया गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया और नागरिकों के लिए सलाह
गृह मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान या संदिग्ध ZIP फाइल को डाउनलोड या खोलें नहीं। यदि कोई संदेश RBI, MCA, आयकर विभाग या किसी अन्य सरकारी संस्था के नाम से प्राप्त हो, तो उसकी सत्यता आधिकारिक माध्यमों से अवश्य जाँचें। साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर या www.cybercrime.gov.in पर तत्काल शिकायत दर्ज करें।
आगे क्या
I4C के अनुसार, सहयोग पोर्टल के ज़रिए मैलवेयर से जुड़े सर्वरों को लगातार ब्लॉक करने का काम जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में साइबर अपराध के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और सरकारी संस्थाओं के नाम का दुरुपयोग कर आम नागरिकों को ठगने के प्रयास अधिक परिष्कृत होते जा रहे हैं।