5 अगस्त 2026
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साइबर-हॉक 5.0: दिल्ली पुलिस ने CEO धोखाधड़ी गिरोह के 5 सदस्य दबोचे, ₹9 लाख की निकासी रोकी

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साइबर-हॉक 5.0: दिल्ली पुलिस ने CEO धोखाधड़ी गिरोह के 5 सदस्य दबोचे, ₹9 लाख की निकासी रोकी

सारांश

दिल्ली पुलिस के साइबर-हॉक 5.0 अभियान ने एक बड़े CEO फ्रॉड नेटवर्क की कड़ी पकड़ी है — पाँच गिरफ्तारियाँ, ₹9 लाख की निकासी रोकी और मुंबई के ₹10.40 करोड़ के मामले से सीधा संबंध। जाँचकर्ताओं के अनुसार यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हो सकता है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 17 जून 2026 को साइबर-हॉक 5.0 के तहत सरिता विहार से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त लगभग ₹9 लाख की अवैध निकासी समय रहते रोकी गई।
गिरोह का संबंध मुंबई के CEO/व्हाट्सएप फ्रॉड मामले से — 3 से 15 जून के बीच 63 लेन-देनों में ₹10.40 करोड़ की हेराफेरी का आरोप।
जाँचकर्ताओं के अनुसार कुल संदिग्ध लेन-देन ₹10 करोड़ से अधिक , कई राज्यों में नेटवर्क सक्रिय होने की संभावना।
गिरफ्तार आरोपी: विकास (22), वंश (21), फैयाज आलम (22), अमित (28), बलवीर कुमार (23) — सभी दिल्ली निवासी।
गिरोह के कुछ सदस्य अभी भी फरार ; आगे की जाँच जारी।

दिल्ली पुलिस की सरिता विहार टीम ने साइबर-हॉक 5.0 अभियान के तहत बुधवार, 17 जून 2026 को एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया और पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त लगभग ₹9 लाख की अवैध निकासी को समय रहते रोक दिया गया। जाँचकर्ताओं के अनुसार, यह गिरोह मुंबई में दर्ज एक बड़े CEO/व्हाट्सएप धोखाधड़ी मामले से सीधे जुड़ा हुआ है, जिसमें ₹10.40 करोड़ की हेराफेरी का आरोप है।

ऑपरेशन की शुरुआत कैसे हुई

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की जसोला शाखा के प्रबंधक ने पुलिस को संदिग्ध लेन-देन की सूचना दी, जिसके बाद सरिता विहार पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 297/2026 दर्ज की गई। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 338, 340(2) और 3(5) के तहत पंजीकृत किया गया। यह ऑपरेशन साइबर-हॉक 5.0 के ढाँचे के अंतर्गत चलाया गया, जो दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में साइबर अपराध पर नकेल कसने की बड़ी मुहिम का हिस्सा है।

मुंबई के ₹10.40 करोड़ के मामले से कनेक्शन

जाँच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी मुंबई में एक निजी कंपनी को निशाना बनाए गए CEO फ्रॉड से जुड़े हैं। कथित तौर पर 3 जून से 15 जून 2026 के बीच 63 लेन-देनों के ज़रिये उस कंपनी से ₹10.40 करोड़ की ठगी की गई। यह मामला मुंबई क्राइम ब्रांच के साउथ साइबर पुलिस स्टेशन में पहले से दर्ज है। जाँचकर्ताओं के अनुसार, जाँच के दायरे में आए कुल वित्तीय लेन-देन ₹10 करोड़ से अधिक हो सकते हैं, जो कई राज्यों में सक्रिय एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

गिरफ्तार आरोपियों का ब्यौरा

पुलिस ने जिन पाँच आरोपियों को हिरासत में लिया, वे सभी दिल्ली निवासी हैं — विकास (22), वंश (21), फैयाज आलम (22), अमित (28) और बलवीर कुमार (23)। ये आरोपी कमीशन के आधार पर धोखाधड़ी से प्राप्त धन को खातों से निकालने का काम करते थे। पुलिस ने बताया कि गिरोह के कुछ अन्य सदस्य अभी भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।

अभियान का नेतृत्व

यह ऑपरेशन इंस्पेक्टर युद्धवीर सिंह और सब-इंस्पेक्टर वैभव सिंह, सतीश भाटी, हेड कांस्टेबल नितेश तथा कांस्टेबल ओम प्रकाशमनीष की टीम ने मिलकर अंजाम दिया। पूरा अभियान एसीपी अनिल शर्मा की देखरेख और दक्षिण-पूर्वी जिले के अतिरिक्त डीसीपी (सेकेंड) जसबीर सिंह के समग्र मार्गदर्शन में चला।

आगे की जाँच

पुलिस अब अन्य लाभार्थियों की पहचान करने, धन के स्रोत का पता लगाने और गिरोह के पूरे संचालन-तंत्र को उजागर करने में जुटी है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब CEO/व्हाट्सएप फ्रॉड के मामले देशभर में तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जिनमें संगठित गिरोह परिष्कृत तकनीकों से कई राज्यों में एक साथ काम करते हैं। आने वाले दिनों में अन्य राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय से और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ₹10.40 करोड़ की ठगी के बाद भी आरोपी कमीशन एजेंट स्तर के ही पकड़े गए — मास्टरमाइंड अभी भी फरार हैं। CEO फ्रॉड के मामले देशभर में बढ़ रहे हैं क्योंकि गिरोह 'मनी म्यूल' नेटवर्क के ज़रिये धन को कई खातों में बाँट देते हैं, जिससे स्रोत तक पहुँचना मुश्किल हो जाता है। बहु-राज्यीय समन्वय और केंद्रीय साइबर एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी के बिना ऐसे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ना मुश्किल रहेगा।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साइबर-हॉक 5.0 अभियान क्या है?
साइबर-हॉक 5.0 दिल्ली पुलिस का एक विशेष साइबर अपराध-रोधी अभियान है जो दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में संगठित ऑनलाइन ठगी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए चलाया जा रहा है। इसी ढाँचे के तहत सरिता विहार पुलिस ने 17 जून 2026 को CEO फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़ किया।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया और वे कौन हैं?
पुलिस ने पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया — विकास (22), वंश (21), फैयाज आलम (22), अमित (28) और बलवीर कुमार (23), सभी दिल्ली निवासी। ये लोग कमीशन के आधार पर धोखाधड़ी से प्राप्त धन को बैंक खातों से निकालने का काम करते थे।
इस मामले का मुंबई से क्या संबंध है?
जाँच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी मुंबई के एक CEO/व्हाट्सएप फ्रॉड मामले से जुड़े हैं, जिसमें 3 से 15 जून 2026 के बीच 63 लेन-देनों के ज़रिये एक निजी कंपनी से कथित तौर पर ₹10.40 करोड़ की ठगी की गई। वह मामला मुंबई क्राइम ब्रांच के साउथ साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज है।
₹9 लाख की निकासी कैसे रोकी गई?
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की जसोला शाखा के प्रबंधक ने संदिग्ध लेन-देन की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद सरिता विहार पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खाते से लगभग ₹9 लाख की अवैध निकासी रोक दी और आरोपियों को दबोच लिया।
क्या इस गिरोह के और सदस्य फरार हैं?
हाँ, पुलिस के अनुसार गिरोह के कुछ अन्य सदस्य अभी भी फरार हैं। जाँच जारी है — अन्य लाभार्थियों की पहचान, धन के स्रोत का पता लगाना और पूरे नेटवर्क का खुलासा करना प्राथमिकता है।
राष्ट्र प्रेस
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