तमिलनाडु में STAR 3.0 से ऑनलाइन प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन शुरू, सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जाने की जरूरत नहीं
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु रजिस्ट्रेशन विभाग ने 22 अगस्त 2026 को STAR 3.0 सॉफ्टवेयर के माध्यम से एक पाँच-चरणीय ऑनलाइन प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रणाली लागू की है, जिससे खरीदार और विक्रेता अब सब-रजिस्ट्रार कार्यालय की कतार में लगे बिना संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़ पंजीकृत करा सकते हैं। यह पहल नागरिकों को घर बैठे या अधिकृत केंद्रों से रजिस्ट्रेशन पूरा करने की सुविधा देती है।
किन दस्तावेज़ों पर लागू होती है यह व्यवस्था
प्रारंभिक चरण में यह सुविधा नए अपार्टमेंट, आवासीय मकानों और रिहायशी प्लॉट की सेल डीड (बिक्री विलेख) के लिए उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, होम लोन के लिए टाइटल डीड जमा करने का मेमोरेंडम, मॉर्गेज डीड और लोन बंद होने की पुष्टि करने वाली रसीदें भी इस ऑनलाइन प्रणाली के जरिए पंजीकृत की जा सकती हैं।
चूँकि सभी नागरिकों के घरों में बायोमेट्रिक उपकरण उपलब्ध नहीं होते, इसलिए प्रॉपर्टी डेवलपर्स और आवासीय संपत्ति बेचने वाली कंपनियों के कार्यालयों में अधिकृत केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहाँ फिंगरप्रिंट, आइरिस-स्कैनिंग और वेबकैम की सुविधाएँ मौजूद हैं।
पाँच चरणों की प्रक्रिया
पहले चरण में आवेदक को रजिस्ट्रेशन विभाग की वेबसाइट पर खाता बनाना होगा और पंजीकृत कराए जाने वाले दस्तावेज़ का चयन करना होगा। प्रॉपर्टी के पिछले टाइटल डीड की जानकारी, खरीदार-विक्रेता-गवाहों के नाम, पते, पहचान-विवरण, सर्वे नंबर, क्षेत्रफल, सीमाएँ और कानूनी स्थिति (लंबित मुकदमे सहित) दर्ज करनी होगी। इन विवरणों के आधार पर सिस्टम स्वतः ड्राफ्ट डीड तैयार करेगा और स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन शुल्क, कंप्यूटर चार्ज एवं डॉक्यूमेंट राइटर वेलफेयर फंड में योगदान की गणना कर प्रदर्शित करेगा।
दूसरे चरण में सहेजे गए दस्तावेज़ को 'माय डॉक्यूमेंट्स' अनुभाग से सबमिट करना होगा। इसके बाद आधार ऑथेंटिकेशन पूरा करना होगा और संबंधित सभी पक्षों के फिंगरप्रिंट, फोटो और आइरिस की जानकारी दर्ज की जाएगी।
तीसरे चरण में स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करना होता है। चौथे चरण में भुगतान के उपरांत आवेदक दस्तावेज़ जमा करने के लिए ऑनलाइन सहमति देता है, जिससे उसकी प्रक्रिया संपन्न हो जाती है।
पाँचवें और अंतिम चरण में संबंधित अधिकार क्षेत्र के रजिस्ट्रार 24 घंटे के भीतर डीड, सहायक अभिलेखों और पहचान दस्तावेज़ों की जाँच करेंगे। सब कुछ सही पाए जाने पर रजिस्ट्रार डिजिटल हस्ताक्षर से डीड को पंजीकृत करेंगे और पंजीकृत दस्तावेज़ आवेदक के लॉगिन से डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो जाएगा।
आम नागरिकों पर असर
यह व्यवस्था उन लाखों संपत्ति खरीदारों के लिए राहत लेकर आई है जिन्हें पहले सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में लंबी कतारों और कई बार के चक्करों का सामना करना पड़ता था। अब टोकन लेने या कार्यालय में उपस्थित होने की बाध्यता समाप्त हो गई है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकारें नागरिक सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करने की दिशा में तेज़ी से काम कर रही हैं।
क्या होगा आगे
फिलहाल यह प्रणाली आवासीय संपत्तियों तक सीमित है। आने वाले समय में विभाग द्वारा इसे अन्य श्रेणियों के दस्तावेज़ों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे रजिस्ट्रेशन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर खाता बनाएँ और प्रक्रिया की जानकारी लें।