तमिलनाडु में 2025 में 71,387 सड़क दुर्घटनाएं, वाहनों की बढ़ती संख्या बनी बड़ी वजह
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु 2025 में एक बार फिर राष्ट्रीय सड़क दुर्घटना सूची में सबसे ऊपर रहा, जहाँ 71,387 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं और 18,505 लोगों की जान गई। लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, राज्य में प्रति 100 दुर्घटनाओं पर लगभग 26 मौतें हुईं — जो उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे अधिक वाहन-स्वामित्व वाले राज्यों की तुलना में काफी कम है।
मुख्य आंकड़े और रुझान
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने केरल के सांसद बेनी बेहनन के एक प्रश्न के उत्तर में ये आंकड़े संसद में पेश किए। आंकड़े बताते हैं कि तमिलनाडु में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है — 2022 में 64,105 दुर्घटनाएं हुई थीं, जो तीन वर्षों में 7,000 से अधिक बढ़कर 2025 में 71,387 तक पहुँच गईं।
मृत्यु संख्या में भी क्रमिक वृद्धि दर्ज हुई है। 2022 में 17,884 मौतें हुई थीं, जो 2023 में 18,347, 2024 में 18,449 और 2025 में 18,505 हो गईं — हालांकि दुर्घटनाओं की तुलना में मृत्यु दर की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही है।
वाहनों की बढ़ती संख्या — एक प्रमुख कारण
1 अप्रैल 2025 तक तमिलनाडु में 3.76 करोड़ पंजीकृत वाहन थे। यह देशभर में उत्तर प्रदेश (5.05 करोड़ वाहन) और महाराष्ट्र (3.95 करोड़ वाहन) के बाद तीसरा सबसे अधिक आंकड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार वाहनों की यह तेज़ वृद्धि दुर्घटनाओं की उच्च संख्या के पीछे एक महत्वपूर्ण कारक है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में तमिलनाडु की तुलना में कम दुर्घटनाएं होने के बावजूद मृत्यु-दुर्घटना अनुपात क्रमशः 55.47% और 49% दर्ज किया गया — तमिलनाडु के 26% के मुकाबले काफी अधिक।
सरकार की प्रतिक्रिया और उपाय
केंद्र सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें परिवहन वाहनों के लिए अनिवार्य गति सीमा उपकरण शामिल हैं। हालांकि, दोपहिया, तिपहिया, चौपहिया वाहनों के अलावा दमकल, एम्बुलेंस और पुलिस वाहनों को इस नियम से छूट दी गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य प्रशासन की ओर से विभिन्न रोकथाम और निगरानी उपाय किए जा रहे हैं, फिर भी दुर्घटनाओं की संख्या में गिरावट नहीं आई है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि तमिलनाडु में अपेक्षाकृत कम मृत्यु दर का कारण आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और चिकित्सा सुविधाओं की बेहतर उपलब्धता हो सकती है। साथ ही, उन्होंने गति नियंत्रण को और सख्त करने की माँग की है — यह बताते हुए कि आधुनिक वाहन राजमार्गों के लिए निर्धारित गति सीमा से कहीं अधिक तेज़ चलने में सक्षम हैं।
विशेषज्ञों ने तेज़ गति और शराब पीकर गाड़ी चलाने के साथ-साथ चालकों की थकान को भी गंभीर जोखिम कारक बताया है, और इनसे निपटने के लिए ठोस नीतिगत कदमों की ज़रूरत पर बल दिया है।
आगे क्या
वाहनों की संख्या में वृद्धि का रुझान जारी रहने की संभावना को देखते हुए, सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ राज्य और केंद्र सरकार दोनों से अधिक समन्वित और डेटा-आधारित नीति की अपेक्षा कर रहे हैं। तमिलनाडु की अपेक्षाकृत बेहतर मृत्यु दर एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन बढ़ती दुर्घटनाओं की संख्या यह स्पष्ट करती है कि सड़क सुरक्षा के मोर्चे पर अभी बहुत काम बाकी है।