11 जुलाई 2026
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तेलंगाना: किसानों की फसल खरीदने की बात कहना पड़ा महंगा, TGSRTC बस ड्राइवर अशोक की नौकरी गई

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तेलंगाना: किसानों की फसल खरीदने की बात कहना पड़ा महंगा, TGSRTC बस ड्राइवर अशोक की नौकरी गई

सारांश

तेलंगाना में एक बस ड्राइवर की नौकरी इसलिए चली गई क्योंकि उसने कांग्रेस नेताओं से किसानों की फसल खरीदने को कहा। BRS और TRS ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए बहाली की माँग की है — और कानूनी लड़ाई की चेतावनी भी दी है।

मुख्य बातें

TGSRTC ने 26 मई 2026 को जगतियाल के पीएचबी ड्राइवर अशोक को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटाने का आदेश दिया।
आरोप है कि अशोक ने पेट्रोल-डीजल विरोध प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस नेताओं पर टिप्पणी की थी; अशोक ने कहा उन्होंने केवल किसानों की फसल खरीद की बात की थी।
शिकायत कांग्रेस के धर्मपुरी मंडल अध्यक्ष सी.
लक्ष्मण ने जगतियाल डिपो मैनेजर से की थी।
हरीश राव ने कार्रवाई की निंदा की और कानूनी सहायता का वादा किया।
कविता ने इसे 'ज़हरीली सरकार' का रवैया बताया और बहाली न होने पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी।

तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (TGSRTC) ने 26 मई 2026 को एक निजी किराए की बस (पीएचबी) के ड्राइवर अशोक को सेवा से हटाने का आदेश जारी किया। आरोप है कि अशोक ने जगतियाल में पेट्रोल-डीजल मूल्यवृद्धि के विरोध में धरना दे रहे कांग्रेस नेताओं पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी ने शिकायत दर्ज कराई। विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को 'तानाशाही' करार देते हुए ड्राइवर की तत्काल बहाली की माँग की है।

मुख्य घटनाक्रम

सोमवार को अशोक अपनी बस जगतियाल से धर्मपुरी ले जा रहा था। रास्ते में जगतियाल में कांग्रेस नेताओं का एक विरोध प्रदर्शन चल रहा था, जिसमें राज्य मंत्री अड्लूरी लक्ष्मण और कांग्रेस विधायक भी शामिल थे। खबरों के मुताबिक, अशोक ने उस धरने में शामिल अपने गाँव के एक परिचित से बात करते हुए कहा कि नेताओं को डीजल-पेट्रोल की बात करने से पहले गोदामों में पड़ी कपास और मक्का की फसल किसानों से खरीदनी चाहिए।

इसके बाद कांग्रेस के धर्मपुरी मंडल अध्यक्ष सी. लक्ष्मण ने जगतियाल डिपो मैनेजर से शिकायत की। डिपो मैनेजर ने पीएचबी मालिक चुक्का वेणुगोपाल को पत्र लिखकर अशोक को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटाने का निर्देश दिया।

ड्राइवर की सफाई

अशोक ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने किसी राजनीतिक दल या नेता की आलोचना नहीं की थी। उनके अनुसार, वे केवल अपने गाँव के एक परिचित से बात कर रहे थे और उन्होंने सुझाव दिया था कि सरकार को किसानों की फसल खरीदने को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'मैंने केवल किसानों की बात की थी, किसी नेता या पार्टी की नहीं।'

विपक्ष की प्रतिक्रिया

भारत राष्ट्र समिति (BRS) के नेता और पूर्व मंत्री टी. हरीश राव ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि अशोक एक किसान परिवार से आता है और इसीलिए उसने फसल खरीद का आग्रह किया था। हरीश राव ने घोषणा की कि BRS अशोक के परिवार के साथ खड़ी रहेगी और ज़रूरत पड़ने पर उनकी ओर से कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी।

तेलंगाना रक्षा समिति (TRS) की नेता के. कविता ने कहा कि कांग्रेस विपक्ष में रहते हुए लोकतंत्र की दुहाई देती थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद उसी लोकतंत्र को कमज़ोर कर रही है। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र को बहाल करना सातवीं गारंटी है। क्या जनता की सरकार का मतलब यह है कि सवाल उठाने वालों की रोज़ी-रोटी छीन ली जाए? इसीलिए हम इसे एक ज़हरीली सरकार कह रहे हैं।' उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अशोक को वापस काम पर नहीं रखा गया तो TRS विरोध प्रदर्शन करेगी।

विपक्षी नेताओं ने एकजुट होकर माँग की कि यह 'तानाशाही रवैया' — जिसमें सवाल पूछने पर नौकरी छीन ली जाती है — तत्काल बंद होना चाहिए और अशोक को बिना देरी के बहाल किया जाए।

आम जनता और किसानों पर असर

यह मामला तेलंगाना में किसानों की फसल खरीद को लेकर गहरी नाराज़गी को उजागर करता है। गौरतलब है कि राज्य के कई ज़िलों में कपास और मक्का की फसल गोदामों में पड़ी है और किसान सरकारी खरीद के इंतज़ार में हैं। अशोक का मामला इस कृषि संकट की व्यापक पृष्ठभूमि में सामने आया है।

क्या होगा आगे

विपक्षी दलों की माँग के बाद यह देखना होगा कि TGSRTC और तेलंगाना सरकार इस मामले पर क्या रुख अपनाती है। BRS ने कानूनी सहायता का वादा किया है, जबकि TRS ने विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। यह प्रकरण राज्य में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकारी संस्थाओं के इस्तेमाल को लेकर बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसके नेताओं की शिकायत पर एक सरकारी निगम का एक आम कर्मचारी को नौकरी से हटाना गहरी विरोधाभासी तस्वीर पेश करता है। असल सवाल यह है कि क्या TGSRTC ने स्वतंत्र रूप से यह निर्णय लिया या राजनीतिक दबाव में — और इसका जवाब राज्य सरकार को देना होगा। किसानों की फसल खरीद का मुद्दा, जिसे अशोक ने उठाया, वह अपने आप में एक वैध सार्वजनिक सवाल है जिसे दबाना सरकार के लिए और भी महंगा साबित हो सकता है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना में बस ड्राइवर अशोक को नौकरी से क्यों निकाला गया?
TGSRTC ने अशोक को इसलिए सेवा से हटाया क्योंकि कांग्रेस के धर्मपुरी मंडल अध्यक्ष ने शिकायत की थी कि उसने जगतियाल में धरना दे रहे कांग्रेस नेताओं की आलोचना की। अशोक का कहना है कि उन्होंने केवल किसानों की फसल खरीद की बात की थी और किसी नेता या पार्टी की आलोचना नहीं की।
TGSRTC क्या है और इस मामले में उसकी क्या भूमिका है?
TGSRTC यानी तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम तेलंगाना सरकार का बस परिवहन उपक्रम है। इस मामले में जगतियाल डिपो मैनेजर ने पीएचबी मालिक चुक्का वेणुगोपाल को पत्र लिखकर अशोक को तत्काल सेवा से हटाने का निर्देश दिया।
BRS और TRS ने इस मामले पर क्या कहा?
BRS नेता टी. हरीश राव ने कार्रवाई की निंदा करते हुए अशोक की बहाली की माँग की और कानूनी सहायता का वादा किया। TRS नेता के. कविता ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया और चेतावनी दी कि बहाली न होने पर TRS विरोध प्रदर्शन करेगी।
अशोक ने धरने पर क्या टिप्पणी की थी?
अशोक के अनुसार, उन्होंने धरने में शामिल अपने गाँव के एक परिचित से कहा था कि नेताओं को डीजल-पेट्रोल की बात करने से पहले गोदामों में पड़ी कपास और मक्का की फसल किसानों से खरीदनी चाहिए। उन्होंने किसी राजनीतिक दल या नेता की आलोचना से इनकार किया।
क्या अशोक को वापस नौकरी मिलेगी?
अभी तक TGSRTC या तेलंगाना सरकार की ओर से बहाली की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। BRS ने कानूनी लड़ाई और TRS ने विरोध प्रदर्शन का वादा किया है, जिससे यह मामला राजनीतिक रूप से और तेज़ हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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