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रोहित वेमुला बिल का मसौदा तीन महीने में: तेलंगाना के उप CM भट्टी विक्रमार्क का निर्देश

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रोहित वेमुला बिल का मसौदा तीन महीने में: तेलंगाना के उप CM भट्टी विक्रमार्क का निर्देश

सारांश

दस साल पहले रोहित वेमुला की मौत ने जो सवाल खड़े किए थे, तेलंगाना सरकार उन्हें कानून की शक्ल देने की कोशिश में है। उप CM भट्टी विक्रमार्क ने तीन महीने की समय-सीमा तय की है — अब परीक्षा यह है कि चुनावी वादा जमीन पर उतरता है या फिर एक और मसौदे में सिमट जाता है।

मुख्य बातें

तेलंगाना सरकार ने 'रोहित वेमुला तेलंगाना विधेयक' का मसौदा तीन महीने के भीतर तैयार करने का निर्देश दिया।
उप मुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने 16 अक्टूबर 2026 को तेलंगाना सचिवालय में वरिष्ठ सिविल सेवकों की समिति की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की।
मसौदे का नेतृत्व अनुसूचित जाति विकास विभाग (SCDD) करेगा; NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ की कानूनी विशेषज्ञता ली जाएगी।
दलित शोध छात्र रोहित वेमुला ने 17 जनवरी 2016 को जातिगत भेदभाव का आरोप लगाते हुए हैदराबाद विश्वविद्यालय में आत्महत्या की थी।
कांग्रेस ने 2023 के तेलंगाना चुनावों में यह एक्ट लाने का वादा किया था; राहुल गांधी ने भी इसकी माँग की थी।

तेलंगाना सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को समाप्त करने के लिए 'रोहित वेमुला तेलंगाना विधेयक' का मसौदा तीन महीने के भीतर तैयार करने का फ़ैसला किया है। उप मुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को तेलंगाना सचिवालय, हैदराबाद में वरिष्ठ सिविल सेवकों की समिति की दूसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए। यह विधेयक विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों को जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव से कानूनी सुरक्षा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

बैठक में क्या हुआ

तेलंगाना सचिवालय में हुई इस बैठक में मसौदा तैयार करने की रणनीति, समिति की संरचना, कानूनी पहलुओं और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ परामर्श की प्रक्रिया पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि विधेयक का मसौदा तैयार होने के बाद वरिष्ठ सिविल सेवकों की समिति को तीन महीने की निर्धारित समय-सीमा के भीतर सौंपा जाए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समिति के गठन से लेकर हितधारकों के साथ परामर्श तक के सभी चरण तय समय में पूरे होने चाहिए — किसी भी स्तर पर देरी स्वीकार्य नहीं होगी।

मसौदे की संरचना और नेतृत्व

भट्टी विक्रमार्क ने सुझाव दिया कि विधेयक के मसौदे की प्रक्रिया का नेतृत्व अनुसूचित जाति विकास विभाग (SCDD) करे। उन्होंने यह भी कहा कि समिति में विधि विभाग, शिक्षा विभाग, गृह विभाग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

कानूनी और तकनीकी पहलुओं के लिए NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ की विशेषज्ञता लेने का भी निर्णय किया गया। हितधारकों की सूची में छात्र, शिक्षक, कानूनी विशेषज्ञ, नागरिक समाज संगठन और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल किए जाएंगे।

रोहित वेमुला: पृष्ठभूमि

हैदराबाद विश्वविद्यालय के 26 वर्षीय दलित शोध छात्र रोहित वेमुला ने 17 जनवरी 2016 को आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया था। कथित तौर पर, ABVP सदस्यों के साथ एक विवाद के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी पीएचडी निलंबित कर दी थी और उनका वजीफ़ा रद्द कर दिया था।

रोहित की मौत के बाद देशभर के विश्वविद्यालय परिसरों में जातिगत भेदभाव के विरुद्ध बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे — यह आंदोलन आज भी उच्च शिक्षा सुधार की मांग का प्रतीक बना हुआ है।

राजनीतिक संदर्भ और प्रतिबद्धता

कांग्रेस ने 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनावों में 'रोहित वेमुला एक्ट' लाने का वादा किया था। इसके बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हैदराबाद विश्वविद्यालय के दौरे के दौरान तेलंगाना सरकार से यह कानून लागू करने का आग्रह किया था। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में दलित छात्रों के संस्थागत उत्पीड़न के मामले बार-बार सुर्खियों में आते रहे हैं।

गौरतलब है कि यह तेलंगाना में इस विषय पर पहली विधायी पहल होगी जो नामांकित व्यक्ति के नाम पर है — एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्त्वपूर्ण कदम।

बैठक में उपस्थित प्रमुख व्यक्ति

बैठक में मंत्री पोन्नम प्रभाकर और अदलुरी लक्ष्मण कुमार, विशेष मुख्य सचिव सब्यसाची घोष, वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी देवेंद्र सिंह चौहान, आईएएस अधिकारी योगिता राणा और विजयेन्द्र बोयी, तथा अधिवक्ता दिशा वाडेकर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। आने वाले तीन महीनों में मसौदे की दिशा और इसकी क़ानूनी मज़बूती यह तय करेगी कि यह विधेयक महज़ प्रतीकात्मक रहेगा या संस्थागत बदलाव का औज़ार बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली कसौटी मसौदे की कानूनी धार और क्रियान्वयन तंत्र होगी। कांग्रेस ने यह वादा 2023 में सत्ता में आने के लिए किया था, और तीन साल बाद अब 'दूसरी बैठक' हो रही है — यह रफ़्तार संदेह पैदा करती है। असली सवाल यह है कि क्या यह विधेयक शिकायत निवारण, दंड और स्वतंत्र निगरानी का ठोस ढाँचा लेकर आएगा, या फिर यह मौजूदा UGC दिशानिर्देशों का पुनर्पाठ मात्र बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोहित वेमुला तेलंगाना विधेयक क्या है?
यह तेलंगाना सरकार द्वारा प्रस्तावित एक कानून है जो राज्य के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों को जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर होने वाले भेदभाव से कानूनी सुरक्षा देगा। यह विधेयक 2016 में हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित शोध छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद उठी माँगों के जवाब में बनाया जा रहा है।
रोहित वेमुला विधेयक का मसौदा कब तक तैयार होगा?
उप मुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने 16 अक्टूबर 2026 को निर्देश दिया कि मसौदा तीन महीने के भीतर वरिष्ठ सिविल सेवकों की समिति को सौंप दिया जाए। समिति के गठन से लेकर हितधारक परामर्श तक सभी चरण इसी समय-सीमा में पूरे होने हैं।
रोहित वेमुला कौन थे और उनकी मौत क्यों हुई?
रोहित वेमुला हैदराबाद विश्वविद्यालय के 26 वर्षीय दलित शोध छात्र थे, जिन्होंने 17 जनवरी 2016 को आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया था; कथित तौर पर ABVP सदस्यों के साथ विवाद के बाद उनकी पीएचडी निलंबित कर दी गई थी और उनका वजीफ़ा रद्द कर दिया गया था।
विधेयक का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में कौन शामिल होगा?
अनुसूचित जाति विकास विभाग (SCDD) इस प्रक्रिया का नेतृत्व करेगा। इसमें विधि विभाग, शिक्षा विभाग, गृह विभाग और UGC की भागीदारी होगी। कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञता के लिए NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ का सहयोग लिया जाएगा, और छात्रों, शिक्षकों, नागरिक समाज तथा कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श किया जाएगा।
कांग्रेस ने रोहित वेमुला एक्ट का वादा कब किया था?
कांग्रेस ने 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनावों में 'रोहित वेमुला एक्ट' लाने का वादा किया था। इसके बाद राहुल गांधी ने हैदराबाद विश्वविद्यालय के दौरे के दौरान भी तेलंगाना सरकार से यह कानून लागू करने का आग्रह किया था।
राष्ट्र प्रेस
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