तेलंगाना आंदोलनकारियों की पहचान के लिए चार श्रेणियाँ तय, समिति ने बनाए सख्त मानदंड

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तेलंगाना आंदोलनकारियों की पहचान के लिए चार श्रेणियाँ तय, समिति ने बनाए सख्त मानदंड

सारांश

तेलंगाना सरकार ने आंदोलनकारियों की पहचान के लिए चार श्रेणियाँ तय कीं — शहीद, घायल, गिरफ्तार और जमीनी कार्यकर्ता। के. केशव राव की अध्यक्षता वाली समिति ने राजनीतिक पक्षपात से मुक्त चयन का संकल्प लिया और 1969, 1972 व 1996 के आंदोलनकारियों से परामर्श का फैसला किया।

मुख्य बातें

तेलंगाना सरकार की उच्चस्तरीय समिति ने 17 मई 2026 को पहली बैठक में आंदोलनकारियों की पहचान के लिए चार श्रेणियाँ निर्धारित कीं।
पहली श्रेणी — आंदोलन में जान गंवाने वाले शहीद; दूसरी — घायल कार्यकर्ता; तीसरी — गिरफ्तार या मुकदमे झेलने वाले; चौथी — जमीनी स्तर के सक्रिय कार्यकर्ता।
चौथी श्रेणी के लिए अखबारों की कतरनें प्रमाण के रूप में स्वीकार की जाएंगी।
1969 , 1972 और 1996 के आंदोलनकारियों से परामर्श कर सुझाव लिए जाएंगे।
चयन प्रक्रिया को राजनीतिक दलों से पूरी तरह स्वतंत्र रखने का संकल्प; पिछली सरकार पर पक्षपात का आरोप।
समिति का कार्यालय हैदराबाद के 'अमरवीरुला ज्योति' परिसर में स्थापित होगा।

तेलंगाना सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ने 17 मई 2026 को अपनी पहली बैठक में 'तेलंगाना उद्यमकारुलु' — यानी राज्य आंदोलन के कार्यकर्ताओं — की पहचान के लिए चार स्पष्ट श्रेणियाँ निर्धारित कीं। सरकारी जनसंपर्क एवं शिक्षा सलाहकार के. केशव राव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मंत्री पोनम प्रभाकर, एमएलसी प्रो. कोदंडराम, एमएलसी अडांकी दयाकर, पूर्व एमएलसी रामुलु नाइक और मोथे शोभन रेड्डी सहित समिति के सभी सदस्य उपस्थित रहे।

चार श्रेणियों का ढाँचा

आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, पहली श्रेणी में उन लोगों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी जिन्होंने तेलंगाना आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाई। दूसरी श्रेणी में आंदोलन के दौरान घायल हुए कार्यकर्ता शामिल होंगे।

तीसरी श्रेणी में उन लोगों को मान्यता दी जाएगी जिन्हें आंदोलन के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया, जेल भेजा गया या जिन पर कानूनी मामले दर्ज हुए। चौथी श्रेणी में वे जमीनी स्तर के कार्यकर्ता आएंगे जिन्होंने विभिन्न राज्यों में सक्रिय भूमिका निभाई — इनकी पहचान के लिए अखबारों की कतरनों को प्रमाण के रूप में स्वीकार करने का सुझाव दिया गया है।

व्यापक परामर्श की योजना

समिति ने नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से भी प्रस्ताव आमंत्रित करने का निर्णय लिया है। 1969, 1972 और 1996 के आंदोलनों से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ विशेष परामर्श सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा तेलंगाना आंदोलन कार्यकर्ताओं की संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी), कर्मचारी संगठनों, कलाकार जेएसी, वकील जेएसी और विभिन्न जिलों के आंदोलन संगठनों से भी सुझाव माँगे जाएंगे। पैनल जल्द ही एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की भी योजना बना रहा है।

गैर-पक्षपातपूर्ण चयन पर जोर

समिति ने स्पष्ट किया कि आंदोलनकारियों का चयन राजनीतिक संबद्धताओं से पूरी तरह ऊपर रखा जाएगा। समिति ने माना कि पिछली सरकार ने केवल चुनिंदा लोगों को ही सहायता प्रदान की थी, इसलिए इस बार चयन प्रक्रिया को पूर्णतः निष्पक्ष और दलगत राजनीति से मुक्त रखने का संकल्प लिया गया है। समिति का उद्देश्य एक व्यापक डेटाबेस तैयार करना है जो वास्तविक आंदोलनकारियों के कल्याण और राजकीय सम्मान का आधार बनेगा।

कार्यालय और अगले कदम

समिति ने अपना कार्यालय हैदराबाद स्थित 'अमरवीरुला ज्योति' (शहीद स्मारक ज्योति) परिसर में स्थापित करने का निर्णय लिया है। पैनल जिलों का दौरा कर व्यापक जनपरामर्श और लोगों की राय भी जुटाएगा। यह समिति मात्र दो दिन पहले मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के निर्देश पर गठित की गई थी, और बैठक में सदस्यों ने इस पहल के लिए उनका आभार व्यक्त किया। यह कदम तेलंगाना आंदोलन की विरासत को आधिकारिक रूप से संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन चौथी श्रेणी में 'अखबारों की कतरनें' को एकमात्र प्रमाण मानना एक कमज़ोर कड़ी है — दशकों पुराने अभिलेखागार अधूरे हैं और यह मानदंड विवादों को आमंत्रित कर सकता है। समिति ने 'राजनीतिक निष्पक्षता' का दावा किया है, लेकिन स्वयं समिति के सदस्य सत्तारूढ़ दल से जुड़े हैं — यह अंतर्विरोध ध्यान देने योग्य है। 1969 से 2014 तक के लंबे आंदोलन में लाखों लोग शामिल थे; बिना स्वतंत्र सत्यापन तंत्र के यह डेटाबेस राजनीतिक चयन का औज़ार बनने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना आंदोलनकारियों की पहचान के लिए कौन-सी चार श्रेणियाँ तय की गई हैं?
समिति ने चार श्रेणियाँ निर्धारित की हैं — पहली: आंदोलन में जान गंवाने वाले शहीद; दूसरी: घायल कार्यकर्ता; तीसरी: गिरफ्तार या मुकदमे झेलने वाले; चौथी: जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता जिनकी पहचान अखबारों की कतरनों से की जाएगी।
इस समिति का गठन किसने और क्यों किया?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के निर्देश पर यह समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता सरकारी जनसंपर्क एवं शिक्षा सलाहकार के. केशव राव कर रहे हैं। इसका उद्देश्य वास्तविक तेलंगाना आंदोलनकारियों की पहचान कर उनके कल्याण और राजकीय सम्मान के लिए एक व्यापक डेटाबेस तैयार करना है।
क्या यह चयन प्रक्रिया राजनीतिक रूप से निष्पक्ष होगी?
समिति ने स्पष्ट किया है कि आंदोलनकारियों का चयन राजनीतिक संबद्धताओं से ऊपर उठकर किया जाएगा। समिति ने माना कि पिछली सरकार ने केवल चुनिंदा लोगों को सहायता दी थी, इसलिए इस बार प्रक्रिया को पूरी तरह गैर-पक्षपातपूर्ण रखने का संकल्प लिया गया है।
किन पुराने आंदोलनों के कार्यकर्ताओं से परामर्श किया जाएगा?
समिति ने 1969, 1972 और 1996 के तेलंगाना आंदोलनों से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ परामर्श कर सुझाव लेने का निर्णय लिया है। इसके अलावा जेएसी, कर्मचारी संगठनों, वकील जेएसी और विभिन्न जिलों के आंदोलन संगठनों से भी सुझाव माँगे जाएंगे।
समिति का कार्यालय कहाँ होगा और आगे की प्रक्रिया क्या है?
समिति का कार्यालय हैदराबाद स्थित 'अमरवीरुला ज्योति' (शहीद स्मारक ज्योति) परिसर में स्थापित होगा। पैनल जल्द ही सर्वदलीय बैठक बुलाएगा, जिलों का दौरा कर जनपरामर्श करेगा और नागरिक समाज से प्रस्ताव आमंत्रित करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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