तेलंगाना आंदोलनकारियों की पहचान के लिए चार श्रेणियाँ तय, समिति ने बनाए सख्त मानदंड
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ने 17 मई 2026 को अपनी पहली बैठक में 'तेलंगाना उद्यमकारुलु' — यानी राज्य आंदोलन के कार्यकर्ताओं — की पहचान के लिए चार स्पष्ट श्रेणियाँ निर्धारित कीं। सरकारी जनसंपर्क एवं शिक्षा सलाहकार के. केशव राव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मंत्री पोनम प्रभाकर, एमएलसी प्रो. कोदंडराम, एमएलसी अडांकी दयाकर, पूर्व एमएलसी रामुलु नाइक और मोथे शोभन रेड्डी सहित समिति के सभी सदस्य उपस्थित रहे।
चार श्रेणियों का ढाँचा
आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, पहली श्रेणी में उन लोगों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी जिन्होंने तेलंगाना आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाई। दूसरी श्रेणी में आंदोलन के दौरान घायल हुए कार्यकर्ता शामिल होंगे।
तीसरी श्रेणी में उन लोगों को मान्यता दी जाएगी जिन्हें आंदोलन के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया, जेल भेजा गया या जिन पर कानूनी मामले दर्ज हुए। चौथी श्रेणी में वे जमीनी स्तर के कार्यकर्ता आएंगे जिन्होंने विभिन्न राज्यों में सक्रिय भूमिका निभाई — इनकी पहचान के लिए अखबारों की कतरनों को प्रमाण के रूप में स्वीकार करने का सुझाव दिया गया है।
व्यापक परामर्श की योजना
समिति ने नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से भी प्रस्ताव आमंत्रित करने का निर्णय लिया है। 1969, 1972 और 1996 के आंदोलनों से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ विशेष परामर्श सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा तेलंगाना आंदोलन कार्यकर्ताओं की संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी), कर्मचारी संगठनों, कलाकार जेएसी, वकील जेएसी और विभिन्न जिलों के आंदोलन संगठनों से भी सुझाव माँगे जाएंगे। पैनल जल्द ही एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की भी योजना बना रहा है।
गैर-पक्षपातपूर्ण चयन पर जोर
समिति ने स्पष्ट किया कि आंदोलनकारियों का चयन राजनीतिक संबद्धताओं से पूरी तरह ऊपर रखा जाएगा। समिति ने माना कि पिछली सरकार ने केवल चुनिंदा लोगों को ही सहायता प्रदान की थी, इसलिए इस बार चयन प्रक्रिया को पूर्णतः निष्पक्ष और दलगत राजनीति से मुक्त रखने का संकल्प लिया गया है। समिति का उद्देश्य एक व्यापक डेटाबेस तैयार करना है जो वास्तविक आंदोलनकारियों के कल्याण और राजकीय सम्मान का आधार बनेगा।
कार्यालय और अगले कदम
समिति ने अपना कार्यालय हैदराबाद स्थित 'अमरवीरुला ज्योति' (शहीद स्मारक ज्योति) परिसर में स्थापित करने का निर्णय लिया है। पैनल जिलों का दौरा कर व्यापक जनपरामर्श और लोगों की राय भी जुटाएगा। यह समिति मात्र दो दिन पहले मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के निर्देश पर गठित की गई थी, और बैठक में सदस्यों ने इस पहल के लिए उनका आभार व्यक्त किया। यह कदम तेलंगाना आंदोलन की विरासत को आधिकारिक रूप से संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।