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पशु चिकित्सा टीकों की जाँच क्षमता 2 से बढ़कर 42 हुई, सरकार ने CCS-NIAH बागपत को किया अधिकृत

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पशु चिकित्सा टीकों की जाँच क्षमता 2 से बढ़कर 42 हुई, सरकार ने CCS-NIAH बागपत को किया अधिकृत

सारांश

भारत सरकार ने बागपत स्थित सीसीएस-एनआईएएच की परीक्षण क्षमता 2 से बढ़ाकर 42 पशु चिकित्सा टीकों तक कर दी है। यह 21 गुना विस्तार नियामक मंजूरी को तेज़ करेगा और देश की पशुधन स्वास्थ्य प्रणाली को मज़बूत आधार देगा।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 28 जनवरी 2026 को राजपत्र अधिसूचना जीएसआर 65(ई) के ज़रिए औषधि नियम, 1945 में संशोधन किया।
सीसीएस-एनआईएएच, बागपत अब 42 पशु चिकित्सा टीकों का परीक्षण कर सकता है — पहले यह संख्या केवल 2 थी।
परीक्षण के दायरे में कैनाइन डिस्टेंपर, डक प्लेग, फाउल पॉक्स, साल्मोनेला और टेटनस सहित कुत्ते, घोड़े, मुर्गी व पशुधन के टीके शामिल हैं।
विस्तारित क्षमता से पशु चिकित्सा जैविक उत्पादों के आयात और नियामक अनुमोदन की प्रक्रिया सरल और तेज़ होगी।
भारत वैश्विक स्तर पर पशु चिकित्सा टीकों के अग्रणी उत्पादकों में से एक है; यह कदम उस स्थिति को और सुदृढ़ करता है।

केंद्र सरकार ने 28 जनवरी 2026 को राजपत्र अधिसूचना जीएसआर 65(ई) के ज़रिए औषधि नियम, 1945 में संशोधन अधिसूचित कर उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान (सीसीएस-एनआईएएच) में स्थापित केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) को 42 पशु चिकित्सा टीकों के परीक्षण के लिए अधिकृत किया है। इससे पहले यह संस्थान केवल 2 पशु चिकित्सा टीकों के परीक्षण के लिए अधिसूचित था — यानी परीक्षण क्षमता में 21 गुना की वृद्धि हुई है।

संशोधन का कानूनी आधार

ये संशोधन औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के प्रावधानों के अंतर्गत भारत के राजपत्र, असाधारण, भाग दो, खंड 3, उपखंड (i) में अधिसूचित किए गए हैं। यह कदम देश में वैक्सीन और जैविक परीक्षण क्षमता को सुदृढ़ करने तथा नियामक ढाँचे को और प्रभावी बनाने के सरकार के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।

किन टीकों का होगा परीक्षण

विस्तारित दायरे में कुत्ते, घोड़े, मुर्गी और अन्य पशुधन को प्रभावित करने वाली बीमारियों के टीके शामिल हैं। इनमें कैनाइन डिस्टेंपर, कैनाइन कोरोनावायरस, डक प्लेग, फाउल पॉक्स, साल्मोनेला और टेटनस जैसी बीमारियों की रोकथाम व नियंत्रण के लिए उपयोग किए जाने वाले टीके सम्मिलित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पशुधन क्षेत्र में संक्रामक रोगों से होने वाले नुकसान को कम करने की माँग लगातार बढ़ रही है।

आयात और नियामक मंजूरी पर असर

सीसीएस-एनआईएएच में बढ़ी हुई परीक्षण क्षमता से पशु चिकित्सा जैविक उत्पादों के आयात और नियामक अनुमोदन की प्रक्रिया सरल होने की उम्मीद है। विस्तारित कार्यक्षेत्र से परीक्षण में लगने वाले समय को कम करने और निर्माताओं के लिए परिणाम प्राप्ति समय को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी। गौरतलब है कि भारत विश्व स्तर पर पशु चिकित्सा टीकों के अग्रणी उत्पादकों में से एक है, और यह कदम उस स्थिति को और मज़बूत करता है।

पशु स्वास्थ्य और पशुधन उत्पादकता पर प्रभाव

राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली के सुदृढ़ीकरण से देशभर में गुणवत्ता-सुनिश्चित टीकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे न केवल पशु स्वास्थ्य की सुरक्षा होगी, बल्कि पशुपालकों की आजीविका और पशुधन उत्पादकता को भी बल मिलेगा। आने वाले समय में यह व्यवस्था भारत के पशु चिकित्सा टीका निर्यात को भी गति दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या सीसीएस-एनआईएएच में मानव संसाधन, उपकरण और प्रत्यायन ढाँचा इस बोझ को वास्तव में वहन कर सकता है। भारत के पशु चिकित्सा टीका निर्यात की वृद्धि तभी टिकाऊ होगी जब परीक्षण की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरे। अधिसूचना नियामक दायरा तो बढ़ाती है, पर क्रियान्वयन की समयसीमा और संसाधन आवंटन पर स्पष्टता अभी बाकी है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीसीएस-एनआईएएच बागपत में पशु चिकित्सा टीका परीक्षण क्षमता में क्या बदलाव हुआ है?
28 जनवरी 2026 की राजपत्र अधिसूचना जीएसआर 65(ई) के तहत सीसीएस-एनआईएएच अब 42 पशु चिकित्सा टीकों का परीक्षण कर सकता है, जबकि पहले केवल 2 टीकों के परीक्षण की अनुमति थी। यह 21 गुना की वृद्धि है।
इस संशोधन का कानूनी आधार क्या है?
यह संशोधन औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के प्रावधानों के अंतर्गत औषधि नियम, 1945 में किया गया है। इसे भारत के राजपत्र, असाधारण, भाग दो, खंड 3, उपखंड (i) में अधिसूचित किया गया है।
नई अधिसूचना में कौन-कौन से पशु चिकित्सा टीके शामिल हैं?
विस्तारित सूची में कुत्ते, घोड़े, मुर्गी और अन्य पशुधन की बीमारियों के टीके शामिल हैं — जैसे कैनाइन डिस्टेंपर, कैनाइन कोरोनावायरस, डक प्लेग, फाउल पॉक्स, साल्मोनेला और टेटनस। कुल 42 टीकों को परीक्षण के दायरे में लाया गया है।
इस कदम से पशु चिकित्सा टीकों के आयात और निर्माताओं पर क्या असर पड़ेगा?
बढ़ी हुई परीक्षण क्षमता से पशु चिकित्सा जैविक उत्पादों के आयात और नियामक अनुमोदन की प्रक्रिया सरल होने की उम्मीद है। निर्माताओं के लिए परिणाम प्राप्ति समय में भी सुधार आएगा।
यह कदम भारत के पशुधन क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत वैश्विक स्तर पर पशु चिकित्सा टीकों के अग्रणी उत्पादकों में से एक है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली के मज़बूत होने से गुणवत्ता-सुनिश्चित टीकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जो पशु स्वास्थ्य और पशुपालकों की आजीविका दोनों के लिए लाभकारी है।
राष्ट्र प्रेस
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