14 जुलाई 2026
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कलबुर्गी सेंट्रल जेल से तीन हत्यारोपी दोषी फरार, कपड़ों की रस्सी से फाँदी 20 फीट ऊँची दीवार

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कलबुर्गी सेंट्रल जेल से तीन हत्यारोपी दोषी फरार, कपड़ों की रस्सी से फाँदी 20 फीट ऊँची दीवार

सारांश

कलबुर्गी की हाई-सिक्योरिटी जेल से तीन हत्या-दोषी कैदी कपड़ों से बनी रस्सी के सहारे 20 फीट ऊँची दीवार फाँदकर भाग गए — और यह तब हुआ जब परिसर में CISF जवान और सीसीटीवी कैमरे मौजूद थे। अंदरूनी मिलीभगत की आशंका ने इस मामले को और पेचीदा बना दिया है।

मुख्य बातें

मस्तान, संतोष और सागर — तीनों हत्या मामले के दोषी — 14 जुलाई को तड़के रात 3 बजे कलबुर्गी केंद्रीय कारागार से फरार हुए।
कैदियों ने कंबल, कपड़े और तकिए के कवर से रस्सी बनाकर 15–20 फीट ऊँची दीवार पार की।
जाँच में सामने आया कि फरारी की योजना 2–3 दिन पहले से बनाई जा रही थी।
जेल में CISF जवान, सीसीटीवी कैमरे और सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात होने के बावजूद चूक हुई।
कलबुर्गी पुलिस आयुक्त एस.डी.
शरणप्पा ने घटनास्थल का निरीक्षण किया; फरहताबाद थाने में FIR दर्ज।
जेल कर्मचारियों की अंदरूनी मिलीभगत की आशंका के चलते पूछताछ जारी; राज्यभर में हाई अलर्ट ।

कलबुर्गी केंद्रीय कारागार से मंगलवार, 14 जुलाई की तड़के करीब रात 3 बजे तीन दोषी कैदी — मस्तान, संतोष और सागर — फरार हो गए। तीनों एक हत्या मामले में सज़ा काट रहे थे। घटना के बाद कर्नाटक पुलिस ने राज्यभर में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और फरार कैदियों की तलाश में कई विशेष दल गठित किए गए हैं।

कैसे हुई फरारी

प्रारंभिक जाँच के अनुसार, तीनों कैदियों ने कंबल, कपड़े और तकिए के कवर को आपस में बाँधकर एक अस्थायी रस्सी तैयार की। इसी रस्सी की मदद से वे जेल की 15 से 20 फीट ऊँची परिसर दीवार फाँदने में सफल रहे। जाँचकर्ताओं का मानना है कि तीनों ने यह योजना दो से तीन दिन पहले से बनानी शुरू कर दी थी।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

यह घटना इसलिए और गंभीर मानी जा रही है क्योंकि जेल परिसर में 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी, सशस्त्र सुरक्षाकर्मी और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवान भी तैनात हैं। इतनी चाक-चौबंद सुरक्षा के बावजूद कैदियों का फरार होना अधिकारियों ने बड़ी सुरक्षा चूक माना है।

गौरतलब है कि कलबुर्गी कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे का गृह जिला है, जिससे इस घटना का राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।

अंदरूनी मिलीभगत की आशंका

जाँच एजेंसियाँ इस संभावना की भी पड़ताल कर रही हैं कि कैदियों को जेल के भीतर किसी कर्मचारी या अधिकारी की मदद मिली हो। अधिकारियों के अनुसार, रात के समय कैदियों का बैरक से बाहर होना ही अपने आप में संदिग्ध है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज की जाँच कर रही है और जेल कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है। यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या संलिप्तता सिद्ध होती है, तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस की प्रतिक्रिया

घटना की सूचना मिलते ही कलबुर्गी पुलिस आयुक्त एस.डी. शरणप्पा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी जेल पहुँचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। फरहताबाद पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पड़ोसी जिलों को भी सतर्क कर दिया गया है ताकि तीनों फरार कैदी राज्य की सीमा पार न कर सकें।

आगे क्या होगा

जाँच दल यह भी पता लगाने में जुटा है कि फरारी के बाद कैदियों को बाहर से किसी ने सहायता दी या नहीं। फरार कैदियों की गिरफ्तारी तक राज्यभर में अलर्ट जारी रहेगा। इस घटना के बाद कर्नाटक की जेल सुरक्षा नीति की समीक्षा की माँग भी उठने लगी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि प्रणालीगत विफलता का संकेत है। अंदरूनी मिलीभगत की आशंका इस सवाल को और तीखा बनाती है कि क्या हाई-सिक्योरिटी जेलों का ऑडिट केवल कागज़ों पर होता है। यह घटना कर्नाटक के गृह मंत्री के गृह जिले में हुई है — जो राजनीतिक दबाव को और बढ़ाती है और निष्पक्ष जाँच की माँग को अपरिहार्य बनाती है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलबुर्गी जेल से कौन से कैदी फरार हुए और वे किस मामले में दोषी थे?
फरार कैदियों की पहचान मस्तान, संतोष और सागर के रूप में हुई है। तीनों एक हत्या मामले में दोषी ठहराए जा चुके थे और सज़ा काट रहे थे।
कैदी जेल से कैसे फरार हुए?
कैदियों ने कंबल, कपड़े और तकिए के कवर को आपस में बाँधकर एक अस्थायी रस्सी बनाई और 14 जुलाई की तड़के रात करीब 3 बजे जेल की 15 से 20 फीट ऊँची दीवार फाँदकर भाग गए। जाँचकर्ताओं के अनुसार यह योजना 2–3 दिन पहले से बनाई जा रही थी।
क्या जेल में किसी कर्मचारी की मिलीभगत की आशंका है?
अधिकारियों को संदेह है कि रात के समय कैदियों का बैरक से बाहर पहुँचना बिना किसी अंदरूनी सहायता के संभव नहीं था। जेल कर्मचारियों से पूछताछ जारी है और सीसीटीवी फुटेज की जाँच की जा रही है।
इस घटना के बाद कर्नाटक पुलिस ने क्या कदम उठाए हैं?
कलबुर्गी पुलिस आयुक्त एस.डी. शरणप्पा सहित वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे। फरहताबाद थाने में FIR दर्ज की गई है, राज्यभर में हाई अलर्ट जारी है और पड़ोसी जिलों को भी सतर्क किया गया है।
इस घटना का राजनीतिक महत्व क्यों है?
कलबुर्गी कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे का गृह जिला है। उनके गृह जिले की हाई-सिक्योरिटी जेल में इस तरह की सुरक्षा चूक ने राज्य की जेल प्रशासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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