12 जुलाई 2026
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असम UCC बिल पर TMC विधायक शेरमन अली का वॉकआउट, BJP-NDA सरकार पर 'दुर्भावना' का आरोप

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असम UCC बिल पर TMC विधायक शेरमन अली का वॉकआउट, BJP-NDA सरकार पर 'दुर्भावना' का आरोप

सारांश

असम विधानसभा में UCC बिल पर बहस के दौरान TMC विधायक शेरमन अली अहमद ने वॉकआउट कर BJP-NDA सरकार पर 'दुर्भावना' का आरोप लगाया। बिल में बहुविवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीकरण का प्रावधान है, जबकि अनुसूचित जनजातियों को छूट दी गई है।

मुख्य बातें

TMC विधायक शेरमन अली अहमद ने 27 मई 2026 को असम विधानसभा से UCC बिल पर चर्चा के दौरान वॉकआउट किया।
अहमद ने BJP-NDA सरकार पर 'दुर्भावना' से प्रेरित होकर बिल लाने का आरोप लगाया।
बिल में बहुविवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीकरण का प्रावधान; उल्लंघन पर सात साल से आजीवन कारावास तक की सज़ा।
अहमद ने अनुसूचित जनजातियों को छूट देने पर सवाल उठाते हुए इसे UCC की 'एकरूपता' का विरोधाभास बताया।
विधायक ने कुछ प्रावधानों को कुरान की शिक्षाओं के विरुद्ध बताया और संवैधानिक सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगाया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक शेरमन अली अहमद ने 27 मई 2026 को असम विधानसभा से उस समय वॉकआउट किया जब सदन में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पर चर्चा चल रही थी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP)-NDA सरकार पर आरोप लगाया कि यह बिल 'दुर्भावना' से प्रेरित होकर विरोध के प्रतीक के रूप में लाया गया है।

विधायक की आंशिक सहमति और असहमति

वॉकआउट से पहले अहमद ने सदन में विस्तार से अपना पक्ष रखा। उन्होंने विवाह के लिए न्यूनतम आयु निर्धारित करने और लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी दायरे में लाने के प्रावधानों पर सहमति जताई। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बिल के कुछ बिंदु सीधे तौर पर संवैधानिक और धार्मिक सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं।

सदन छोड़ने से पहले उन्होंने कहा, 'यह सरकार दुर्भावना से ग्रसित होकर एक विरोध के रूप में यह बिल लेकर आई है, इसलिए मैं बाहर जा रहा हूँ।'

असम UCC बिल में क्या है

असम सरकार ने सोमवार, 26 मई को यह विधेयक सदन में पेश किया। बिल में विवाह, तलाक, विरासत और उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत कानूनों को एकीकृत ढाँचे में लाने की रूपरेखा तैयार की गई है। प्रमुख प्रावधानों में बहुविवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण शामिल हैं।

बिल के अनुसार, संबंधित अपराधों के लिए सात साल से आजीवन कारावास तक की सज़ा का प्रावधान है। लिव-इन रिलेशनशिप को पंजीकृत न करने पर तीन साल की सज़ा का प्रावधान किया गया है।

अनुसूचित जनजातियों को छूट पर सवाल

अहमद ने बिल में असम के अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) समुदायों को दी गई छूट पर तीखा सवाल उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि UCC वास्तव में एक समान और न्यायसंगत कानून है, तो जनजातीय समूहों को उससे बाहर क्यों रखा जा रहा है। उनके अनुसार, यह छूट स्वयं UCC की 'एकरूपता' की अवधारणा को कमज़ोर करती है।

धार्मिक प्रावधानों पर आपत्ति

तृणमूल विधायक ने यह भी कहा कि विवाह से जुड़े कुछ प्रावधान कुरान की शिक्षाओं से मेल नहीं खाते। उन्होंने दावा किया कि इस्लाम में बहुविवाह से संबंधित सिद्धांत को जनता के बीच गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। अहमद ने कहा, 'कुरान में लिखी गई बातें सर्वोत्तम हैं और उनका उल्लंघन किसी भी कीमत पर नहीं हो सकता।'

आगे क्या

गौरतलब है कि उत्तराखंड के बाद असम UCC लागू करने वाला दूसरा राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह बिल ऐसे समय में आया है जब केंद्र स्तर पर भी UCC को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। विधानसभा में विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और बिल की आगे की विधायी यात्रा पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट एक गंभीर वैचारिक विरोधाभास उजागर करती है — 'समान' संहिता जो सभी पर समान रूप से लागू न हो, वह अपने मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े करती है। शेरमन अली अहमद का वॉकआउट महज़ प्रतीकात्मक नहीं है; यह उस व्यापक राजनीतिक विभाजन को दर्शाता है जो UCC को लेकर धार्मिक अल्पसंख्यक और जनजातीय समुदायों में गहरी चिंता के रूप में मौजूद है। मुख्यधारा की कवरेज वॉकआउट पर केंद्रित रही, लेकिन असली बहस यह है कि क्या राज्य-स्तरीय UCC संवैधानिक रूप से टिकाऊ है जब केंद्र ने अभी तक राष्ट्रीय UCC नहीं लाया।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम UCC बिल क्या है और इसमें क्या प्रावधान हैं?
असम सरकार द्वारा 26 मई 2026 को पेश किया गया यह विधेयक विवाह, तलाक, विरासत और उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत कानूनों को एकीकृत करता है। इसमें बहुविवाह पर प्रतिबंध, लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण और उल्लंघन पर सात साल से आजीवन कारावास तक की सज़ा का प्रावधान है।
TMC विधायक शेरमन अली अहमद ने वॉकआउट क्यों किया?
अहमद ने BJP-NDA सरकार पर 'दुर्भावना' से प्रेरित होकर बिल लाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि बिल के कुछ प्रावधान संवैधानिक और धार्मिक सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं, इसलिए उन्होंने विरोधस्वरूप सदन छोड़ा।
अनुसूचित जनजातियों को UCC से छूट देने पर विवाद क्यों है?
अहमद ने तर्क दिया कि यदि UCC एक समान और न्यायसंगत कानून है, तो जनजातीय समूहों को उससे बाहर रखना स्वयं इसकी 'एकरूपता' की अवधारणा को कमज़ोर करता है। उनके अनुसार यह छूट UCC के मूल उद्देश्य में विरोधाभास पैदा करती है।
क्या असम पहला राज्य है जो UCC लागू कर रहा है?
नहीं, उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य बना था। असम इस दिशा में आगे बढ़ने वाला दूसरा राज्य है। यह बिल ऐसे समय में आया है जब केंद्र स्तर पर भी UCC को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
लिव-इन रिलेशनशिप पंजीकरण न कराने पर क्या सज़ा है?
असम UCC बिल के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप को पंजीकृत न करने पर तीन साल की सज़ा का प्रावधान किया गया है। अन्य संबंधित अपराधों के लिए सात साल से आजीवन कारावास तक की सज़ा हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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