3 अगस्त 2026
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धीरन चिन्नामलाई की पुण्यतिथि पर तमिलनाडु CM विजय ने दी श्रद्धांजलि, बताया 'औपनिवेशिक प्रतिरोध का अमर प्रतीक'

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धीरन चिन्नामलाई की पुण्यतिथि पर तमिलनाडु CM विजय ने दी श्रद्धांजलि, बताया 'औपनिवेशिक प्रतिरोध का अमर प्रतीक'

सारांश

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 3 अगस्त को धीरन चिन्नामलाई की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। 1805 में संकागिरी में फाँसी पाने वाले इस वीर योद्धा ने ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध का नेतृत्व किया था। विजय ने उन्हें औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष का 'अमर प्रतीक' बताया।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय ने 3 अगस्त को धीरन चिन्नामलाई की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी।
चिन्नामलाई को 1805 में संकागिरी में ब्रिटिश सरकार ने फाँसी दी थी।
वे कोंगु क्षेत्र (वर्तमान तमिलनाडु) में जन्मे और ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध प्रतिरोध के प्रमुख नेता थे।
मुख्यमंत्री विजय ने उन्हें दक्षिण भारत में ब्रिटिश सत्ता को चुनौती देने वाले 'औपनिवेशिक प्रतिरोध के अमर प्रतीक' के रूप में याद किया।
उनकी पुण्यतिथि प्रतिवर्ष मनाई जाती है, विशेष रूप से तमिलनाडु के पश्चिमी जिलों में।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 3 अगस्त को दक्षिण भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी धीरन चिन्नामलाई की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने एक विशेष संदेश में चिन्नामलाई के सशस्त्र प्रतिरोध और मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान को स्मरण किया।

कौन थे धीरन चिन्नामलाई

वर्तमान तमिलनाडु के कोंगु क्षेत्र में तीर्थगिरी के नाम से जन्मे धीरन चिन्नामलाई दक्षिण भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के विस्तार के विरुद्ध उठने वाले शुरुआती और सबसे मुखर विरोधियों में से एक थे। उन्होंने ब्रिटिश सेनाओं के खिलाफ कई सशस्त्र मोर्चे संगठित किए और औपनिवेशिक कर नीतियों तथा राजनीतिक नियंत्रण का डटकर सामना किया। आखिरकार अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ लिया और 1805 में संकागिरी में फाँसी दे दी गई।

मुख्यमंत्री विजय का संदेश

मुख्यमंत्री विजय ने अपने संदेश में कहा, 'मैं स्वतंत्रता सेनानी धीरन चिन्नामलाई को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देता हूँ, जिन्होंने ब्रिटिश दमन के खिलाफ लड़ाई लड़ी और आज़ादी का नारा बुलंद किया।' उन्होंने चिन्नामलाई को एक ऐसा बहादुर योद्धा बताया जिन्होंने उस दौर में प्रतिरोध की आवाज़ उठाई जब ईस्ट इंडिया कंपनी देश के बड़े हिस्सों पर अपनी पकड़ मज़बूत कर रही थी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि चिन्नामलाई के साहस, देशभक्ति और बलिदान की भावना ने आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा दी और वे औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध प्रतिरोध के एक स्थायी प्रतीक बने रहे।

विरासत और ऐतिहासिक महत्व

विजय ने रेखांकित किया कि एक शक्तिशाली औपनिवेशिक प्रशासन का सामना करने की चिन्नामलाई की दृढ़ इच्छाशक्ति ने स्वाधीनता और अपने लोगों के अधिकारों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को प्रमाणित किया। उनके संघर्ष ने उन्हें दक्षिण भारत में ब्रिटिश सत्ता को चुनौती देने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों में एक स्थायी स्थान दिलाया। तमिलनाडु के पश्चिमी जिलों में, विशेष रूप से कोंगु क्षेत्र में, उनकी विरासत आज भी जनमानस में गहराई से बसी है।

आज की पीढ़ी को संदेश

स्वाधीनता संग्राम के बलिदानों को याद करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि आज की पीढ़ी को जो आज़ादी मिली है, वह अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग का परिणाम है, जिन्होंने देश के हितों को अपने प्राणों से भी ऊपर रखा। उन्होंने कहा, 'उस बहादुर नायक की महिमा हमेशा बनी रहे, जिसने अपनी जान इसलिए दी ताकि हम आज़ादी की हवा में साँस ले सकें।'

पुण्यतिथि का आयोजन

धीरन चिन्नामलाई की पुण्यतिथि प्रत्येक वर्ष मनाई जाती है, जिसमें नेता, सामाजिक संगठन और आम नागरिक उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। यह अवसर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उनके अदम्य संघर्ष और बलिदान को पुनः स्मरण करने का राष्ट्रीय अवसर बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि 1805 में संकागिरी की फाँसी ब्रिटिश विरोध के इतिहास में एक निर्णायक अध्याय है। यह अवसर इस बात की याद दिलाता है कि स्वाधीनता संग्राम केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं था।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धीरन चिन्नामलाई कौन थे?
धीरन चिन्नामलाई दक्षिण भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे, जो वर्तमान तमिलनाडु के कोंगु क्षेत्र में तीर्थगिरी के नाम से जन्मे थे। उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध का नेतृत्व किया और 1805 में संकागिरी में उन्हें फाँसी दी गई।
धीरन चिन्नामलाई की पुण्यतिथि कब मनाई जाती है?
धीरन चिन्नामलाई की पुण्यतिथि प्रत्येक वर्ष 3 अगस्त को मनाई जाती है। इस अवसर पर नेता, सामाजिक संगठन और आम नागरिक उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने धीरन चिन्नामलाई को क्यों याद किया?
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 3 अगस्त को चिन्नामलाई की पुण्यतिथि पर उनके सशस्त्र प्रतिरोध, देशभक्ति और बलिदान को सम्मान देने के लिए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने चिन्नामलाई को औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष का अमर प्रतीक बताया।
धीरन चिन्नामलाई का ऐतिहासिक योगदान क्या था?
चिन्नामलाई ने ईस्ट इंडिया कंपनी की कर नीतियों और राजनीतिक नियंत्रण का विरोध किया और ब्रिटिश सेनाओं के खिलाफ कई लड़ाइयाँ लड़ीं। वे दक्षिण भारत में ब्रिटिश विस्तार के शुरुआती और सबसे प्रमुख विरोधियों में गिने जाते हैं।
धीरन चिन्नामलाई की विरासत आज कहाँ जीवित है?
तमिलनाडु के पश्चिमी जिलों, विशेष रूप से कोंगु क्षेत्र में, चिन्नामलाई की विरासत आज भी जनमानस में गहराई से बसी है। उनकी पुण्यतिथि पर प्रतिवर्ष आयोजित कार्यक्रमों में नेता और आम नागरिक उनके संघर्ष को याद करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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