हिरासत से छूटे तुषार गांधी बोले — यह जनता का नो कॉन्फिडेंस मोशन है, आंदोलन जारी रहेगा
सारांश
मुख्य बातें
महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने 11 अक्टूबर 2026 को मुंबई में हिरासत से छूटने के बाद केंद्र सरकार पर कड़े शब्दों में हमला बोला। उन्होंने कहा कि उन्हें और अन्य आयोजकों को हिरासत में लेने के बावजूद मुंबई की जनता स्वतः अगस्त क्रांति मैदान पहुँचती रही — और यह आम नागरिकों की ओर से सरकार के खिलाफ एक जनांदोलन बन गया है।
हिरासत के बाद का हाल
तुषार गांधी ने बताया, 'शनिवार शाम 6 बजे मुझे बताया गया कि मुझे जाने दिया जाएगा, लेकिन मेरा फोन अभी भी वापस नहीं किया गया था। मेरे साथ जो कांस्टेबल था, उसके पास मेरा फोन था लेकिन उसे लौटाया नहीं गया। इसके बाद चार अधिकारियों ने मुझे उसी गाड़ी में बैठाकर घर छोड़ा।' उनके अनुसार यह प्रक्रिया पारदर्शिता के किसी मानक पर खरी नहीं उतरती।
जनता की स्वतःस्फूर्त भागीदारी
तुषार गांधी के मुताबिक, आयोजकों की अनुपस्थिति के बावजूद नागरिक अगस्त क्रांति मैदान पहुँचते रहे और पुलिस के सामने डटे रहे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी नेता की देन नहीं, बल्कि आम जनता की अपनी इच्छाशक्ति का प्रतिफल है। 'एक तरह से यह जनता की ओर से सरकार के खिलाफ नो कॉन्फिडेंस मोशन है,' — ये उनके शब्द थे।
सरकार पर गंभीर आरोप
तुषार गांधी ने आरोप लगाया कि मौजूदा मोदी सरकार धांधली पर उतर आई है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक ज्ञानेश कुमार और मौजूदा सरकार सत्ता में रहेगी, तब तक वह हर हफ्ते पूरे भारत में ऐसे ही विरोध-प्रदर्शन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि यह देश और यहाँ के नागरिक कभी भी लोकतंत्र की रक्षा में कमज़ोर नहीं पड़े हैं।
सोनम वांगचुक को संदेश
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के संदर्भ में तुषार गांधी ने कहा, 'मैं सोनम वांगचुक से यही कहूँगा कि बयानबाजी मत करिए, रास्तों पर उतरिए।' उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन केवल नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि पुलिस की स्वायत्तता और आज़ादी के लिए भी लड़ा जा रहा है।
आगे क्या होगा
तुषार गांधी के अनुसार जंतर-मंतर पर शनिवार को हुई घटनाएँ और मुंबई में उभरे विरोध यह साफ संकेत देते हैं कि असंतोष किसी एक मंच तक सीमित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक माँगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन रुकने वाला नहीं है। यह देखना होगा कि सरकार इन बढ़ते प्रदर्शनों पर किस तरह की प्रतिक्रिया देती है।