11 अक्टूबर 2026
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हिरासत से छूटे तुषार गांधी बोले — यह जनता का नो कॉन्फिडेंस मोशन है, आंदोलन जारी रहेगा

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हिरासत से छूटे तुषार गांधी बोले — यह जनता का नो कॉन्फिडेंस मोशन है, आंदोलन जारी रहेगा

सारांश

हिरासत से छूटने के बाद तुषार गांधी ने साफ कहा — यह सरकार के खिलाफ जनता का नो कॉन्फिडेंस मोशन है। ज्ञानेश कुमार और मोदी सरकार के जाने तक हर हफ्ते पूरे भारत में आंदोलन की चेतावनी दी। अगस्त क्रांति मैदान पर आयोजकों की अनुपस्थिति में भी जनता का जुटना उनकी दलील को बल देता है।

मुख्य बातें

तुषार गांधी को 11 अक्टूबर 2026 को हिरासत से छोड़ा गया, लेकिन उनका फोन हिरासत के दौरान वापस नहीं किया गया।
आयोजकों की गिरफ्तारी के बावजूद मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान पर नागरिक स्वतः जुटते रहे।
तुषार गांधी ने इस आंदोलन को जनता की ओर से सरकार के खिलाफ नो कॉन्फिडेंस मोशन करार दिया।
उन्होंने चेतावनी दी कि ज्ञानेश कुमार और मौजूदा सरकार के रहते हर हफ्ते देशभर में विरोध-प्रदर्शन होंगे।
सोनम वांगचुक को संदेश देते हुए कहा — 'बयानबाजी छोड़ो, रास्तों पर उतरो।'

महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने 11 अक्टूबर 2026 को मुंबई में हिरासत से छूटने के बाद केंद्र सरकार पर कड़े शब्दों में हमला बोला। उन्होंने कहा कि उन्हें और अन्य आयोजकों को हिरासत में लेने के बावजूद मुंबई की जनता स्वतः अगस्त क्रांति मैदान पहुँचती रही — और यह आम नागरिकों की ओर से सरकार के खिलाफ एक जनांदोलन बन गया है।

हिरासत के बाद का हाल

तुषार गांधी ने बताया, 'शनिवार शाम 6 बजे मुझे बताया गया कि मुझे जाने दिया जाएगा, लेकिन मेरा फोन अभी भी वापस नहीं किया गया था। मेरे साथ जो कांस्टेबल था, उसके पास मेरा फोन था लेकिन उसे लौटाया नहीं गया। इसके बाद चार अधिकारियों ने मुझे उसी गाड़ी में बैठाकर घर छोड़ा।' उनके अनुसार यह प्रक्रिया पारदर्शिता के किसी मानक पर खरी नहीं उतरती।

जनता की स्वतःस्फूर्त भागीदारी

तुषार गांधी के मुताबिक, आयोजकों की अनुपस्थिति के बावजूद नागरिक अगस्त क्रांति मैदान पहुँचते रहे और पुलिस के सामने डटे रहे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी नेता की देन नहीं, बल्कि आम जनता की अपनी इच्छाशक्ति का प्रतिफल है। 'एक तरह से यह जनता की ओर से सरकार के खिलाफ नो कॉन्फिडेंस मोशन है,' — ये उनके शब्द थे।

सरकार पर गंभीर आरोप

तुषार गांधी ने आरोप लगाया कि मौजूदा मोदी सरकार धांधली पर उतर आई है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक ज्ञानेश कुमार और मौजूदा सरकार सत्ता में रहेगी, तब तक वह हर हफ्ते पूरे भारत में ऐसे ही विरोध-प्रदर्शन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि यह देश और यहाँ के नागरिक कभी भी लोकतंत्र की रक्षा में कमज़ोर नहीं पड़े हैं।

सोनम वांगचुक को संदेश

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के संदर्भ में तुषार गांधी ने कहा, 'मैं सोनम वांगचुक से यही कहूँगा कि बयानबाजी मत करिए, रास्तों पर उतरिए।' उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन केवल नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि पुलिस की स्वायत्तता और आज़ादी के लिए भी लड़ा जा रहा है।

आगे क्या होगा

तुषार गांधी के अनुसार जंतर-मंतर पर शनिवार को हुई घटनाएँ और मुंबई में उभरे विरोध यह साफ संकेत देते हैं कि असंतोष किसी एक मंच तक सीमित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक माँगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन रुकने वाला नहीं है। यह देखना होगा कि सरकार इन बढ़ते प्रदर्शनों पर किस तरह की प्रतिक्रिया देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

'हर हफ्ते देशभर में आंदोलन' की घोषणा की व्यावहारिकता अभी परखी जानी बाकी है — संगठनात्मक ढाँचे और वित्तीय संसाधन बिना ऐसे वादे अक्सर क्षणिक साबित होते हैं। मुख्यधारा की कवरेज में ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग के पीछे की ठोस पृष्ठभूमि प्रायः अनदेखी रह जाती है, जो इस आंदोलन के असली मुद्दे को धुँधला करती है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुषार गांधी कौन हैं और उन्हें हिरासत में क्यों लिया गया था?
तुषार गांधी महात्मा गांधी के परपोते और एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्हें 11 अक्टूबर 2026 को मुंबई में अगस्त क्रांति मैदान पर आयोजित सरकार-विरोधी प्रदर्शन से पहले अन्य आयोजकों के साथ हिरासत में लिया गया था।
तुषार गांधी ने 'नो कॉन्फिडेंस मोशन' किस संदर्भ में कहा?
तुषार गांधी ने कहा कि आयोजकों के हिरासत में रहने के बावजूद मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान पर नागरिक स्वतः जुटते रहे। उनके अनुसार, यह जनता की स्वतःस्फूर्त भागीदारी ही सरकार के खिलाफ नो कॉन्फिडेंस मोशन है।
तुषार गांधी की मुख्य माँगें क्या हैं?
तुषार गांधी ने ज्ञानेश कुमार और मौजूदा मोदी सरकार के हटने की माँग की है। उन्होंने घोषणा की कि जब तक ये माँगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हर हफ्ते पूरे भारत में विरोध-प्रदर्शन जारी रहेंगे।
तुषार गांधी ने सोनम वांगचुक को क्या संदेश दिया?
तुषार गांधी ने सोनम वांगचुक से कहा कि बयानबाजी छोड़कर रास्तों पर उतरें। उनके अनुसार, केवल सार्वजनिक विरोध ही इस आंदोलन को आगे ले जा सकता है।
जंतर-मंतर और मुंबई में एक साथ प्रदर्शन क्यों हुए?
तुषार गांधी के अनुसार, जंतर-मंतर और मुंबई दोनों जगह शनिवार को एक साथ विरोध हुए, जो यह दर्शाता है कि यह असंतोष किसी एक शहर या संगठन तक सीमित नहीं है। यह आंदोलन के व्यापक राष्ट्रीय विस्तार का संकेत है।
राष्ट्र प्रेस
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