अमरेली में वाहन में जिंदा जलाए गए MP के 2 मजदूर, 16 वर्षीय किशोर भी शामिल; ₹60,000 के विवाद में हत्या
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के अमरेली जिले में मंगलवार को एक दर्दनाक हत्याकांड सामने आया, जिसमें मध्य प्रदेश के दो मजदूरों — एक 16 वर्षीय किशोर रवि बघेल और 21 वर्षीय नितिन पचया — को एक यात्री वाहन के अंदर सोते समय कथित तौर पर जिंदा जला दिया गया। पुलिस के अनुसार यह घटना ₹60,000 के बकाया भुगतान और गाड़ी वापस लिए जाने की रंजिश के चलते हुई।
घटनाक्रम
यह हत्याकांड लिलिया तालुका के गुंडारण गांव के बाहरी इलाके में आधी रात के आसपास हुआ। दोनों पीड़ित — शिकायतकर्ता कमलेश बघेल के बेटे और भतीजे — उस वक्त खेत में खड़ी पैसेंजर गाड़ी के भीतर सो रहे थे। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी विनोद डोडियार और उसके भाई राजू ने कथित तौर पर गाड़ी पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर उसमें आग लगा दी, जिससे अंदर सो रहे दोनों लोग बाहर नहीं निकल सके और आग की चपेट में आकर उनकी मौत हो गई।
विवाद की पृष्ठभूमि
पुलिस के अनुसार, विनोद डोडियार ने शिकायतकर्ता कमलेश बघेल से यह यात्री वाहन किस्तों पर खरीदा था। ₹60,000 का बकाया चुकाने में नाकाम रहने पर गाड़ी के मूल विक्रेता ने कमलेश को वाहन वापस अपने कब्जे में लेने का निर्देश दिया। कमलेश ने घटना से लगभग 10 दिन पहले गाड़ी वापस ले ली थी। अधिकारियों के अनुसार, इसी बात से नाराज होकर विनोद ने अपने भाई के साथ मिलकर प्रतिशोध की साजिश रची।
पुलिस की प्रतिक्रिया और जाँच
घटना की जानकारी मिलते ही लिलिया पुलिस, वरिष्ठ अधिकारी और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम मौके पर पहुँची। पुलिस ने दोनों आरोपियों — विनोद डोडियार और राजू डोडियार — को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
पीड़ितों की पहचान
मृतक रवि बघेल (16 वर्ष), शिकायतकर्ता कमलेश बघेल का बेटा था, जबकि नितिन पचया (21 वर्ष) उनका भतीजा था। दोनों मध्य प्रदेश के निवासी थे और गुजरात में मजदूरी करने आए थे। एक नाबालिग की इस तरह मौत ने इस घटना को और भी अधिक संवेदनशील बना दिया है।
आगे की जाँच
पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है कि इस साजिश में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं। गौरतलब है कि अंतरराज्यीय प्रवासी मजदूरों के साथ विवाद और हिंसा की घटनाएँ पूर्व में भी सामने आई हैं, जो श्रमिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। यह मामला इस बात की दर्दनाक याद दिलाता है कि भुगतान विवादों में कानूनी समाधान की जगह हिंसा का रास्ता चुनने के क्या भयावह परिणाम हो सकते हैं।