उरी एलओसी धमाका: जम्मू-कश्मीर के कमलकोट में दो जवान शहीद, दोनों महाराष्ट्र के
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के निकट कमलकोट इलाके में हुए एक धमाके में 8 राष्ट्रीय राइफल्स के दो जवान शहीद हो गए। अधिकारियों ने मंगलवार, 10 जून 2025 को यह जानकारी दी। दोनों जवान महाराष्ट्र के निवासी थे और घटनास्थल पर गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें उपचार के लिए श्रीनगर लाया गया था।
मुख्य घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, धमाका उरी सेक्टर के कमलकोट इलाके में हुआ। गंभीर रूप से घायल दोनों जवानों को तत्काल श्रीनगर स्थित बादामीबाग छावनी के सेना के बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
शहीद जवानों की पहचान अर्जुन जाधव और विक्रम बालकृष्ण के रूप में हुई है। दोनों महाराष्ट्र के निवासी थे और 8 राष्ट्रीय राइफल्स से संबद्ध थे।
धमाके के कारण अज्ञात
अधिकारियों ने बताया कि धमाके के सटीक कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है और जाँच जारी है। विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब एलओसी पर सुरक्षा बलों की सतर्कता पहले से बढ़ी हुई है।
एलओसी की सुरक्षा व्यवस्था
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में बारामूला, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों से होकर लगभग 740 किलोमीटर लंबी एलओसी गुजरती है। जम्मू डिवीजन में यह पुंछ, राजौरी और आंशिक रूप से जम्मू जिले तक फैली है। एलओसी की सुरक्षा भारतीय सेना के जिम्मे है, जबकि लगभग 240 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) करता है।
ड्रोन और घुसपैठ का खतरा
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, सीमा पार से घुसपैठ, तस्करी और ड्रोन गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए दोनों बल सीमा क्षेत्रों में तैनात रहते हैं। ड्रोन खतरों से निपटने के लिए एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन प्रणालियाँ तैनात की गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान स्थित आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े तत्व ड्रोन के ज़रिए हथियार, गोला-बारूद, नकदी और मादक पदार्थ भारतीय क्षेत्र में पहुँचाने का प्रयास करते हैं, जिन्हें ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) एकत्र कर जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों तक पहुँचाते हैं।
धमाके की जाँच जारी है और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से आगे की जानकारी मिलने की उम्मीद है।