26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उरी एलओसी धमाका: जम्मू-कश्मीर के कमलकोट में दो जवान शहीद, दोनों महाराष्ट्र के

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उरी एलओसी धमाका: जम्मू-कश्मीर के कमलकोट में दो जवान शहीद, दोनों महाराष्ट्र के

सारांश

जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में एलओसी के निकट कमलकोट में हुए धमाके में 8 राष्ट्रीय राइफल्स के दो जवान — अर्जुन जाधव और विक्रम बालकृष्ण — शहीद हो गए। दोनों महाराष्ट्र के निवासी थे। धमाके के कारणों की जाँच जारी है।

मुख्य बातें

उरी सेक्टर के कमलकोट में एलओसी के पास हुए धमाके में 8 राष्ट्रीय राइफल्स के दो जवान शहीद।
शहीद जवानों की पहचान अर्जुन जाधव और विक्रम बालकृष्ण के रूप में हुई; दोनों महाराष्ट्र के निवासी थे।
घायल जवानों को बादामीबाग छावनी, श्रीनगर के सेना बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उपचार के दौरान मृत्यु हुई।
धमाके के कारणों का अभी पता नहीं चला; जाँच जारी है।
एलओसी पर भारतीय सेना और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ तैनात है; ड्रोन खतरों से निपटने के लिए एंटी-ड्रोन प्रणालियाँ सक्रिय हैं।

जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के निकट कमलकोट इलाके में हुए एक धमाके में 8 राष्ट्रीय राइफल्स के दो जवान शहीद हो गए। अधिकारियों ने मंगलवार, 10 जून 2025 को यह जानकारी दी। दोनों जवान महाराष्ट्र के निवासी थे और घटनास्थल पर गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें उपचार के लिए श्रीनगर लाया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

अधिकारियों के अनुसार, धमाका उरी सेक्टर के कमलकोट इलाके में हुआ। गंभीर रूप से घायल दोनों जवानों को तत्काल श्रीनगर स्थित बादामीबाग छावनी के सेना के बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

शहीद जवानों की पहचान अर्जुन जाधव और विक्रम बालकृष्ण के रूप में हुई है। दोनों महाराष्ट्र के निवासी थे और 8 राष्ट्रीय राइफल्स से संबद्ध थे।

धमाके के कारण अज्ञात

अधिकारियों ने बताया कि धमाके के सटीक कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है और जाँच जारी है। विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब एलओसी पर सुरक्षा बलों की सतर्कता पहले से बढ़ी हुई है।

एलओसी की सुरक्षा व्यवस्था

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में बारामूला, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों से होकर लगभग 740 किलोमीटर लंबी एलओसी गुजरती है। जम्मू डिवीजन में यह पुंछ, राजौरी और आंशिक रूप से जम्मू जिले तक फैली है। एलओसी की सुरक्षा भारतीय सेना के जिम्मे है, जबकि लगभग 240 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) करता है।

ड्रोन और घुसपैठ का खतरा

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, सीमा पार से घुसपैठ, तस्करी और ड्रोन गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए दोनों बल सीमा क्षेत्रों में तैनात रहते हैं। ड्रोन खतरों से निपटने के लिए एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन प्रणालियाँ तैनात की गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान स्थित आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े तत्व ड्रोन के ज़रिए हथियार, गोला-बारूद, नकदी और मादक पदार्थ भारतीय क्षेत्र में पहुँचाने का प्रयास करते हैं, जिन्हें ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) एकत्र कर जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों तक पहुँचाते हैं।

धमाके की जाँच जारी है और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से आगे की जानकारी मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आईईडी हो या अन्य कारण। धमाके के कारण अभी अज्ञात हैं, जो जाँच की दिशा तय करेगा। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में हाल के महीनों में सीमावर्ती क्षेत्रों में घटनाओं की संख्या में उतार-चढ़ाव देखा गया है। शहीद जवानों के परिवारों और उनके गृह राज्य महाराष्ट्र के लिए यह एक गहरी क्षति है, और यह घटना सीमा सुरक्षा की चुनौतियों पर नीतिगत विमर्श को एक बार फिर केंद्र में लाती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उरी एलओसी के पास धमाके में कौन-से जवान शहीद हुए?
शहीद जवानों की पहचान अर्जुन जाधव और विक्रम बालकृष्ण के रूप में हुई है। दोनों महाराष्ट्र के निवासी थे और 8 राष्ट्रीय राइफल्स से संबद्ध थे।
उरी सेक्टर में धमाका कहाँ और कब हुआ?
धमाका 10 जून 2025 को बारामूला जिले के उरी सेक्टर के कमलकोट इलाके में नियंत्रण रेखा के निकट हुआ। अधिकारियों ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की।
धमाके के कारण क्या थे?
अधिकारियों के अनुसार, धमाके के सटीक कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है और जाँच जारी है। विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है।
एलओसी पर सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
जम्मू-कश्मीर में एलओसी की सुरक्षा भारतीय सेना करती है, जबकि लगभग 240 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जिम्मे है।
एलओसी पर ड्रोन खतरे से कैसे निपटा जाता है?
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन प्रणालियाँ तैनात की गई हैं। पाकिस्तान स्थित आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े तत्व ड्रोन के ज़रिए हथियार और मादक पदार्थ भारतीय क्षेत्र में पहुँचाने का प्रयास करते हैं, जिन्हें रोकने के लिए दोनों बल सक्रिय हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले