मोहन भागवत के 'एक मानवता' बयान पर उद्धव ठाकरे का पलटवार — न्यूयॉर्क का संदेश भारत में क्यों नहीं?
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने सोमवार, 31 अगस्त को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के 'एक मानवता' वाले वैश्विक संदेश पर तीखा सवाल उठाया। ठाकरे खेमे का कहना है कि यदि आरएसएस को अपने सहिष्णुता के उपदेश को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विश्वसनीय बनाना है, तो उन्हीं सिद्धांतों को भारत के भीतर भी व्यवहार में उतारना होगा।
भागवत के न्यूयॉर्क भाषण पर विवाद
शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में न्यूयॉर्क में भागवत के हालिया भाषण की कड़ी आलोचना की गई। आरएसएस के शताब्दी कार्यक्रम के तहत आयोजित इस अमेरिकी दौरे में भागवत ने 'वसुधैव कुटुंबकम' का आह्वान करते हुए कहा था कि 'यदि कोई हिंदू यह महसूस करता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह बिल्कुल भी हिंदू नहीं है।' संपादकीय में इस शब्दावली को पश्चिमी लोकतांत्रिक मानदंडों के अनुरूप एक सुनियोजित प्रयास बताया गया और तर्क दिया गया कि ये बयान भारत के भीतर जमीनी घटनाक्रमों के बिल्कुल विपरीत हैं।
घरेलू घटनाओं का हवाला
ठाकरे गुट ने केंद्र और विभिन्न राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं पर अल्पसंख्यक समुदायों के व्यवस्थित बहिष्कार का माहौल बनाने का आरोप लगाया। संपादकीय में विशेष रूप से उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के सार्वजनिक संबोधन के बाद स्थानीय BJP कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित एक कथित 'शुद्धिकरण समारोह' का उल्लेख किया गया और इसे राजनीतिक रूप से ध्रुवीकृत घरेलू वातावरण के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
राम मंदिर और वित्तीय जवाबदेही पर सवाल
शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया कि राम मंदिर आंदोलन की राजनीतिक उपयोगिता सत्ताधारी तंत्र के लिए समाप्त हो चुकी है। संपादकीय में आरोप लगाया गया कि अमेरिका में बसे हिंदू समुदाय ने अयोध्या मंदिर निर्माण के लिए भारी दान दिया, किंतु कथित वित्तीय कुप्रबंधन पर न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और न ही भागवत ने कोई स्पष्टीकरण दिया। संपादकीय में कहा गया कि भागवत 'भगवान राम के बजाय कृष्ण के विचारों के बारे में बोलकर अमेरिकी धरती पर जवाबदेही से बच गए।'
वैश्विक मानवीय संकटों पर RSS की चुप्पी
संपादकीय में आरएसएस के चयनात्मक वैश्विक रुख की भी आलोचना की गई। गाजा में नागरिक हताहतों सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवीय संकटों पर आरएसएस की चुप्पी को सार्वभौमिक मानवाधिकारों की बजाय बदलती भूराजनीतिक गणनाओं का प्रतिबिंब बताया गया।
मोदी-भागवत की एक साथ विदेश यात्राओं पर निशाना
ठाकरे खेमे ने यह भी रेखांकित किया कि जब प्रधानमंत्री मोदी ताशकंद में भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक ले जाने के लिए उच्च स्तरीय वार्ता में व्यस्त थे, उसी दौरान भागवत की अमेरिकी यात्रा ने सक्रिय प्रदर्शनों और अंतरराष्ट्रीय बयानबाजी तथा घरेलू वास्तविकता के बीच के अंतर को लेकर गहन जाँच को जन्म दिया। संपादकीय में भगवद् गीता के मूल सिद्धांतों का हवाला देते हुए आरएसएस नेतृत्व से आग्रह किया गया कि वह अपने वैश्विक उपदेशों को देश में सार्थक कार्यों से मेल खाए — निस्वार्थता, समभाव और अहंकार के उन्मूलन के साथ।