नीट-यूजी काउंसलिंग सुधार: यूडीएफ ने किया स्वागत, 'एक देश-एक काउंसलिंग' पोर्टल की उठाई मांग
सारांश
मुख्य बातें
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) ने 31 जुलाई को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा नीट-यूजी काउंसलिंग प्रक्रिया में घोषित ताज़ा सुधारों का स्वागत किया है। संगठन ने इन सुधारों को देशभर के लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के हित में उठाया गया सकारात्मक कदम बताया है, जिससे अनावश्यक यात्रा, बार-बार रिपोर्टिंग और प्रक्रियागत देरी में कमी आएगी। साथ ही, यूडीएफ ने सरकार से आग्रह किया है कि अगले बड़े सुधार के रूप में 'वन नेशन, वन काउंसलिंग' प्रणाली लागू की जाए।
सुधारों का स्वागत और मांग का आधार
यूडीएफ के चेयरपर्सन डॉ. लक्ष्य मित्तल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर सरकार की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा, 'हाल ही में किए गए सुधार स्वागतयोग्य कदम हैं, लेकिन मेडिकल एडमिशन में सबसे बड़ी स्ट्रक्चरल समस्या अभी भी अनसुलझी है। ऑल इंडिया कोटा और अलग-अलग राज्यों द्वारा स्वतंत्र रूप से चलाई जाने वाली कई काउंसलिंग प्रक्रियाएं अभी भी जारी हैं।' यह पत्र स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव, अतिरिक्त सचिव (मेडिकल एजुकेशन) और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) को भी भेजा गया है।
मौजूदा प्रणाली की खामियाँ
फिलहाल नीट-क्वालिफाइड उम्मीदवारों को ऑल इंडिया कोटा और अलग-अलग राज्यों की काउंसलिंग अथॉरिटी के लिए अलग-अलग पंजीकरण करना पड़ता है। इन सभी के शेड्यूल, पोर्टल, शुल्क और रिपोर्टिंग प्रक्रियाएं भिन्न-भिन्न होती हैं। इस बिखरी व्यवस्था के कारण उम्मीदवार एक ही समय में कई काउंसलिंग राउंड में भाग लेते हैं और अपनी पसंदीदा सीट के इंतज़ार में एक से अधिक स्थानों पर सीटें अस्थायी रूप से रोक लेते हैं।
डॉ. मित्तल के अनुसार, 'इस बिखरे हुए सिस्टम के कारण बेवजह सीटें ब्लॉक होती हैं, अपग्रेडेशन में देरी होती है, अलॉटमेंट में बार-बार बदलाव होता है, सीटें खाली रह जाती हैं — जिन्हें भरा जा सकता था — और काबिल उम्मीदवारों के लिए लंबे समय तक अनिश्चितता बनी रहती है।'
प्रस्तावित 'वन नेशन, वन काउंसलिंग' मॉडल
यूडीएफ ने प्रस्ताव दिया है कि मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) एक सिंगल नेशनल काउंसलिंग पोर्टल तैयार करे, जिसमें ऑल इंडिया कोटा, स्टेट कोटा, केंद्रीय विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय और अन्य संस्थान एक ही मंच पर आ जाएं। इस प्रस्तावित प्रणाली के अंतर्गत:
उम्मीदवारों को केवल एक बार पंजीकरण करना होगा, एक बार दस्तावेज़ सत्यापन पूरा करना होगा, एक ही प्रेफरेंस लिस्ट जमा करनी होगी और किसी भी समय वे केवल एक सीट ही अपने पास रख सकेंगे।
अपेक्षित लाभ
यूडीएफ के अनुसार, इस एकीकृत प्रणाली से सीट ब्लॉकिंग प्रभावी रूप से रुकेगी, सीटों का बेहतर उपयोग होगा, काउंसलिंग की अवधि घटेगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों तथा उनके परिवारों पर आर्थिक व मानसिक बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी। डॉ. मित्तल ने उम्मीद जताई कि सरकार इस सुधार की दिशा में आगे बढ़ेगी और एक पूरी तरह एकीकृत, पारदर्शी तथा मेरिट-आधारित प्रणाली स्थापित होगी जो देश की हर मेडिकल सीट का सही उपयोग सुनिश्चित करे।