31 जुलाई 2026
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नीट-यूजी काउंसलिंग सुधार: यूडीएफ ने किया स्वागत, 'एक देश-एक काउंसलिंग' पोर्टल की उठाई मांग

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नीट-यूजी काउंसलिंग सुधार: यूडीएफ ने किया स्वागत, 'एक देश-एक काउंसलिंग' पोर्टल की उठाई मांग

सारांश

यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने नीट-यूजी काउंसलिंग में हुए सुधारों की तारीफ़ की, लेकिन असली मांग आगे की है — एक ऐसा राष्ट्रीय पोर्टल जो सभी कोटा और राज्यों को एक मंच पर लाए, सीट ब्लॉकिंग खत्म करे और लाखों उम्मीदवारों की अनिश्चितता दूर करे।

मुख्य बातें

यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) ने 31 जुलाई को स्वास्थ्य मंत्रालय के नीट-यूजी काउंसलिंग सुधारों का स्वागत किया।
यूडीएफ चेयरपर्सन डॉ.
लक्ष्य मित्तल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर 'वन नेशन, वन काउंसलिंग' प्रणाली लागू करने की मांग की।
मौजूदा व्यवस्था में उम्मीदवारों को ऑल इंडिया कोटा और राज्य काउंसलिंग के लिए अलग-अलग पंजीकरण करना पड़ता है, जिससे सीट ब्लॉकिंग और देरी होती है।
प्रस्तावित सिंगल नेशनल पोर्टल में एक बार पंजीकरण, एक प्रेफरेंस लिस्ट और एक समय पर केवल एक सीट रखने का प्रावधान होगा।
यह प्रस्ताव स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव , अतिरिक्त सचिव (मेडिकल एजुकेशन) और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी को भी भेजा गया है।

यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) ने 31 जुलाई को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा नीट-यूजी काउंसलिंग प्रक्रिया में घोषित ताज़ा सुधारों का स्वागत किया है। संगठन ने इन सुधारों को देशभर के लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के हित में उठाया गया सकारात्मक कदम बताया है, जिससे अनावश्यक यात्रा, बार-बार रिपोर्टिंग और प्रक्रियागत देरी में कमी आएगी। साथ ही, यूडीएफ ने सरकार से आग्रह किया है कि अगले बड़े सुधार के रूप में 'वन नेशन, वन काउंसलिंग' प्रणाली लागू की जाए।

सुधारों का स्वागत और मांग का आधार

यूडीएफ के चेयरपर्सन डॉ. लक्ष्य मित्तल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर सरकार की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा, 'हाल ही में किए गए सुधार स्वागतयोग्य कदम हैं, लेकिन मेडिकल एडमिशन में सबसे बड़ी स्ट्रक्चरल समस्या अभी भी अनसुलझी है। ऑल इंडिया कोटा और अलग-अलग राज्यों द्वारा स्वतंत्र रूप से चलाई जाने वाली कई काउंसलिंग प्रक्रियाएं अभी भी जारी हैं।' यह पत्र स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव, अतिरिक्त सचिव (मेडिकल एजुकेशन) और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) को भी भेजा गया है।

मौजूदा प्रणाली की खामियाँ

फिलहाल नीट-क्वालिफाइड उम्मीदवारों को ऑल इंडिया कोटा और अलग-अलग राज्यों की काउंसलिंग अथॉरिटी के लिए अलग-अलग पंजीकरण करना पड़ता है। इन सभी के शेड्यूल, पोर्टल, शुल्क और रिपोर्टिंग प्रक्रियाएं भिन्न-भिन्न होती हैं। इस बिखरी व्यवस्था के कारण उम्मीदवार एक ही समय में कई काउंसलिंग राउंड में भाग लेते हैं और अपनी पसंदीदा सीट के इंतज़ार में एक से अधिक स्थानों पर सीटें अस्थायी रूप से रोक लेते हैं।

डॉ. मित्तल के अनुसार, 'इस बिखरे हुए सिस्टम के कारण बेवजह सीटें ब्लॉक होती हैं, अपग्रेडेशन में देरी होती है, अलॉटमेंट में बार-बार बदलाव होता है, सीटें खाली रह जाती हैं — जिन्हें भरा जा सकता था — और काबिल उम्मीदवारों के लिए लंबे समय तक अनिश्चितता बनी रहती है।'

प्रस्तावित 'वन नेशन, वन काउंसलिंग' मॉडल

यूडीएफ ने प्रस्ताव दिया है कि मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) एक सिंगल नेशनल काउंसलिंग पोर्टल तैयार करे, जिसमें ऑल इंडिया कोटा, स्टेट कोटा, केंद्रीय विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय और अन्य संस्थान एक ही मंच पर आ जाएं। इस प्रस्तावित प्रणाली के अंतर्गत:

उम्मीदवारों को केवल एक बार पंजीकरण करना होगा, एक बार दस्तावेज़ सत्यापन पूरा करना होगा, एक ही प्रेफरेंस लिस्ट जमा करनी होगी और किसी भी समय वे केवल एक सीट ही अपने पास रख सकेंगे।

अपेक्षित लाभ

यूडीएफ के अनुसार, इस एकीकृत प्रणाली से सीट ब्लॉकिंग प्रभावी रूप से रुकेगी, सीटों का बेहतर उपयोग होगा, काउंसलिंग की अवधि घटेगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों तथा उनके परिवारों पर आर्थिक व मानसिक बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी। डॉ. मित्तल ने उम्मीद जताई कि सरकार इस सुधार की दिशा में आगे बढ़ेगी और एक पूरी तरह एकीकृत, पारदर्शी तथा मेरिट-आधारित प्रणाली स्थापित होगी जो देश की हर मेडिकल सीट का सही उपयोग सुनिश्चित करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यूडीएफ का प्रस्ताव तकनीकी रूप से व्यावहारिक है — लेकिन असली चुनौती राज्यों की स्वायत्तता और राजनीतिक इच्छाशक्ति की है। राज्य सरकारें अपनी काउंसलिंग प्रक्रियाओं पर नियंत्रण छोड़ने के लिए आसानी से तैयार नहीं होंगी, क्योंकि इसमें आरक्षण नीतियाँ और स्थानीय प्राथमिकताएं उलझी हुई हैं। केंद्र सरकार के लिए यह सुधार तभी सार्थक होगा जब राज्यों को साथ लेकर एक सहमति-आधारित ढाँचा तैयार किया जाए — अन्यथा यह प्रस्ताव भी उन अच्छे इरादों की सूची में जुड़ जाएगा जो क्रियान्वयन की दीवार से टकराकर रुक गए।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूडीएफ की 'एक देश, एक काउंसलिंग' की मांग क्या है?
यूडीएफ ने मेडिकल काउंसलिंग कमेटी से एक ऐसा सिंगल नेशनल पोर्टल बनाने की मांग की है जिसमें ऑल इंडिया कोटा, स्टेट कोटा, केंद्रीय और डीम्ड विश्वविद्यालय सभी एक ही मंच पर हों। इससे उम्मीदवारों को केवल एक बार पंजीकरण करना होगा और वे एक समय पर केवल एक सीट रख सकेंगे।
नीट-यूजी काउंसलिंग की मौजूदा प्रणाली में क्या समस्याएं हैं?
वर्तमान में उम्मीदवारों को ऑल इंडिया कोटा और अलग-अलग राज्यों की काउंसलिंग के लिए अलग पंजीकरण, अलग पोर्टल, अलग शुल्क और अलग शेड्यूल से गुज़रना पड़ता है। इससे सीट ब्लॉकिंग, अपग्रेडेशन में देरी और उम्मीदवारों पर आर्थिक व मानसिक दबाव बढ़ता है।
यूडीएफ ने यह मांग किसके सामने रखी है?
यूडीएफ चेयरपर्सन डॉ. लक्ष्य मित्तल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखा है। यह प्रस्ताव स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव, अतिरिक्त सचिव (मेडिकल एजुकेशन) और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी को भी भेजा गया है।
प्रस्तावित एकीकृत पोर्टल से छात्रों को क्या फायदा होगा?
एकीकृत पोर्टल से सीट ब्लॉकिंग रुकेगी, काउंसलिंग की अवधि घटेगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों को बार-बार अलग-अलग जगह रिपोर्ट करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। इससे उम्मीदवारों और उनके परिवारों पर आर्थिक व मानसिक बोझ में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
क्या स्वास्थ्य मंत्रालय ने नीट-यूजी काउंसलिंग में कोई सुधार पहले ही किए हैं?
हाँ, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में नीट-यूजी काउंसलिंग प्रक्रिया में कुछ सुधारों की घोषणा की है, जिनका यूडीएफ ने स्वागत किया है। हालांकि, संगठन का कहना है कि बहु-प्रणाली काउंसलिंग की मूल संरचनात्मक समस्या अभी भी बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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