भीषण गर्मी का प्रभाव: उज्जैन के संदीपनि आश्रम में भगवान कृष्ण की सेवा में नया बदलाव
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी और लू के प्रभाव के कारण उज्जैन के ऐतिहासिक संदीपनि आश्रम में पूजा की विधियों में बदलाव किया गया है। यहां का तापमान 41 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुँच चुका है, जबकि राज्य के अन्य कई जिलों में यह 40 से 43 डिग्री के बीच देखा जा रहा है।
गर्मी के मद्देनज़र, मंदिर के पुजारियों ने भगवान श्रीकृष्ण की सेवा में “मौसमी सेवा परंपरा” के अंतर्गत संशोधन किए हैं। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण की बाल स्वरूप में पूजा की जाती है, इसलिए उनकी देखभाल एक बच्चे की तरह मौसम के अनुसार की जाती है।
मुख्य पुजारी कीर्ति रूपम व्यास ने बताया कि यह परंपरा बहुत पुरानी है, जिसमें मौसम के अनुसार भगवान की सेवा में परिवर्तन किया जाता है। उन्होंने कहा कि जैसे तेज गर्मी में बच्चों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है, उसी तरह भगवान की सेवा भी मौसमी परिस्थितियों के अनुरूप की जाती है।
नई व्यवस्था के अनुसार भगवान को दिन में कई बार ठंडे पानी से स्नान कराया जा रहा है ताकि उन्हें गर्मी से कुछ राहत मिल सके। गर्भगृह के पास पंखों की व्यवस्था की गई है और भगवान के सामने ठंडे पानी से भरा मिट्टी का घड़ा भी रखा गया है।
भोग में भी परिवर्तन किया गया है। अब भारी और गरिष्ठ भोजन के स्थान पर हल्के और ठंडक प्रदान करने वाले व्यंजन शामिल किए जा रहे हैं। इनमें मौसमी फल, छाछ, दही, मीठा दही और श्रीखंड जैसे पदार्थ शामिल हैं, जो गर्मी में ठंडक देते हैं।
भगवान के वस्त्रों में भी बदलाव किया गया है। अब उन्हें हल्के सूती कपड़े पहनाए जा रहे हैं, जिसमें कम कढ़ाई होती है, ताकि हवा का संचार बेहतर हो सके और गर्मी से राहत मिले।
पुजारी ने बताया कि यह बदलाव अस्थायी नहीं है, बल्कि वर्षों से चल रही परंपरा का हिस्सा है, जिसमें भक्ति के साथ भगवान की सेवा और देखभाल को प्राथमिकता दी जाती है।
मध्य प्रदेश के कई जिलों में तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुँचने के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है और दिन में बाहर निकलना कठिन हो गया है। इसके बावजूद, संदीपनि आश्रम में की जा रही यह विशेष मौसमी पूजा विधि श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है और यह दर्शाती है कि उज्जैन की धार्मिक परंपराएँ प्रकृति और मौसम के साथ गहराई से जुड़ी हुई हैं।