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यूपी के 586 पीएम श्री स्कूलों में 'लर्निंग बाय डूइंग' को नई ऊर्जा, ₹2.34 करोड़ का सामान मिलेगा

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यूपी के 586 पीएम श्री स्कूलों में 'लर्निंग बाय डूइंग' को नई ऊर्जा, ₹2.34 करोड़ का सामान मिलेगा

सारांश

उत्तर प्रदेश में 586 पीएम श्री स्कूलों के बच्चे अब किताबों से आगे प्रयोग और गतिविधियों से सीखेंगे। सरकार ने ₹2.34 करोड़ की लागत से कच्चा माल खरीदने का निर्णय लिया है — प्रत्येक विद्यालय को ₹40,000 मिलेंगे। यह NEP 2020 के अनुभवात्मक शिक्षण की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है।

मुख्य बातें

586 पीएम श्री उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में 'लर्निंग बाय डूइंग' को प्रभावी बनाने की पहल शुरू हुई।
कुल ₹2,34,40,000 की धनराशि से कंज्यूमेबल्स/रॉ मैटेरियल खरीदा जाएगा; प्रति विद्यालय ₹40,000 की सीमा निर्धारित।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने कहा कि सीखने की प्रक्रिया रोचक और जिज्ञासा के अनुरूप बनाना लक्ष्य है।
महानिदेशक मोनिका रानी के निर्देशानुसार सामग्री खरीद प्रक्रिया संचालित होगी।
गतिविधियों के संचालन एवं अभिलेखीकरण की नियमित निगरानी की जाएगी।

उत्तर प्रदेश के 586 पीएम श्री उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में गतिविधि आधारित शिक्षण को और सशक्त बनाने के लिए ₹2.34 करोड़ की लागत से कंज्यूमेबल्स एवं रॉ मैटेरियल की खरीद की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उठाया गया यह कदम वर्ष 2024-25 के लिए चयनित विद्यालयों में 'लर्निंग बाय डूइंग' पद्धति को ज़मीनी स्तर पर प्रभावशाली बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। इसका उद्देश्य बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय प्रयोग, अनुभव और सक्रिय भागीदारी के ज़रिए सीखने के अवसर उपलब्ध कराना है।

प्रति विद्यालय आवंटन एवं वित्तीय ढाँचा

राज्य सरकार ने प्रत्येक चयनित विद्यालय के लिए ₹40,000 की सीमा निर्धारित की है। कुल ₹2,34,40,000 के इस प्रावधान के अंतर्गत विद्यालयों को गतिविधियों के संचालन हेतु आवश्यक कच्चा माल एवं उपभोज्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी के निर्देशों के अनुसार यह खरीद प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी।

लर्निंग बाय डूइंग से क्या बदलेगा

इस पद्धति के तहत विद्यार्थी विषयवस्तु को देखकर, प्रयोग करके और गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेकर समझ सकेंगे। पुस्तकीय ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने पर ज़ोर दिया जाएगा, ताकि सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज, रोचक और जिज्ञासा को बढ़ावा देने वाली बने। गौरतलब है कि इससे पहले भी राज्य में लर्निंग बाय डूइंग की गतिविधियाँ संचालित की गई हैं और उन अनुभवों को अब आगामी गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

सरकार की प्रतिक्रिया एवं उद्देश्य

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा, 'लर्निंग बाय डूइंग के माध्यम से बच्चों को प्रयोग और अनुभव से सीखने के अवसर मिलेंगे। हमारा प्रयास है कि सीखने की प्रक्रिया रोचक, सहभागितापूर्ण और बच्चों की जिज्ञासा के अनुरूप बने।' यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुभवात्मक शिक्षण के सिद्धांतों के अनुरूप है।

निगरानी एवं जवाबदेही

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री के उचित एवं उद्देश्यपरक उपयोग की निगरानी की जाएगी। गतिविधियों के संचालन और उनके अभिलेखीकरण का भी नियमित अनुश्रवण होगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि संसाधन वास्तव में कक्षा-कक्ष में उपयोग में आएँ।

आगे की राह

यह पहल ऐसे समय में आई है जब पूरे देश में पीएम श्री स्कूलों को केंद्र एवं राज्य सरकारों के सहयोग से आधुनिक शिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में इस कदम से लाखों बच्चों की शिक्षा-गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। आने वाले समय में इन गतिविधियों के परिणामों का मूल्यांकन कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 का आवंटन छोटा दिख सकता है, लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन की गुणवत्ता का है — क्या सामग्री कक्षा तक पहुँचती है या गोदाम में रह जाती है। राज्य सरकार ने अभिलेखीकरण और अनुश्रवण का वादा किया है, जो स्वागतयोग्य है, लेकिन स्वतंत्र मूल्यांकन तंत्र का उल्लेख नहीं है। यूपी में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर ASER जैसी रिपोर्टें लगातार चिंता जताती रही हैं, इसलिए इस पहल की वास्तविक परीक्षा सामग्री खरीद नहीं, बल्कि बच्चों की सीखने की क्षमता में मापनीय सुधार होगी।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी के पीएम श्री विद्यालयों में 'लर्निंग बाय डूइंग' पहल क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार की एक शिक्षा पहल है जिसके तहत 586 पीएम श्री उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में बच्चों को केवल किताबों के बजाय प्रयोग, गतिविधियों और प्रत्यक्ष अनुभव के ज़रिए सीखने के अवसर दिए जाएंगे। इसके लिए ₹2.34 करोड़ की लागत से कंज्यूमेबल्स एवं रॉ मैटेरियल खरीदा जाएगा।
प्रत्येक पीएम श्री विद्यालय को कितनी राशि मिलेगी?
प्रत्येक चयनित पीएम श्री विद्यालय के लिए ₹40,000 की धनराशि निर्धारित की गई है। इस राशि से गतिविधि आधारित शिक्षण के लिए आवश्यक कच्चा माल एवं उपभोज्य सामग्री खरीदी जाएगी।
यह पहल किन विद्यालयों पर लागू होगी?
यह पहल वर्ष 2024-25 के लिए चयनित उत्तर प्रदेश के 586 उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट पीएम श्री विद्यालयों पर लागू होगी। इन विद्यालयों का चयन केंद्र एवं राज्य सरकार के मानकों के आधार पर किया गया है।
सामग्री के सही उपयोग की निगरानी कैसे होगी?
राज्य सरकार ने गतिविधियों के संचालन एवं अभिलेखीकरण के नियमित अनुश्रवण का निर्देश दिया है। महानिदेशक मोनिका रानी के निर्देशों के अनुसार यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सामग्री का उचित एवं उद्देश्यपरक उपयोग हो।
इस पहल से बच्चों को क्या फायदा होगा?
इस पहल से बच्चे विषयवस्तु को देखकर, प्रयोग करके और गतिविधियों में भाग लेकर समझ सकेंगे, जिससे पुस्तकीय ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ा जा सकेगा। सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज, रोचक और सहभागितापूर्ण बनेगी।
राष्ट्र प्रेस
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