उत्तर प्रदेश में 9 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित, 3,000 मेगावाट क्षमता जुड़ी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत योगी सरकार के निरंतर प्रयासों से घरेलू रूफटॉप सोलर के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय पड़ाव हासिल किया गया है — प्रदेश में 9 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित हो चुके हैं और 3,000 मेगावाट (3 गीगावाट) से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता ग्रिड से जुड़ चुकी है। 15 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह उपलब्धि स्वच्छ ऊर्जा विस्तार, बिजली बिलों में बचत, पर्यावरण संरक्षण और रोज़गार सृजन — इन चारों दिशाओं में एक साथ प्रगति दर्शाती है।
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में यूपी की रफ़्तार
आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 9-10 मेगावाट घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता जोड़ी जा रही है। वर्ष 2026 के उपलब्ध वैश्विक आंकड़ों से तुलना करें तो ऑस्ट्रेलिया में जनवरी से जून के दौरान औसतन 10.4 मेगावाट प्रतिदिन, अमेरिका में आवासीय सोलर स्थापना की दर पहली तिमाही में 13.1 मेगावाट प्रतिदिन और दूसरी तिमाही में 10.9 मेगावाट प्रतिदिन रही। जर्मनी में यह दर पहली छमाही में 17.5 मेगावाट प्रतिदिन रही।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की यह दर ऑस्ट्रेलिया के व्यापक रूफटॉप बाज़ार की दैनिक औसत वृद्धि के समकक्ष है — यह तुलना प्रदेश के सौर ऊर्जा अभियान के वास्तविक पैमाने को रेखांकित करती है।
सब्सिडी और आवेदन प्रक्रिया
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार मिलकर पात्र लाभार्थियों को अधिकतम ₹1.08 लाख तक की सब्सिडी प्रदान कर रही हैं। इच्छुक उपभोक्ता निर्धारित पात्रता एवं प्रक्रिया के अनुसार 31 मार्च 2027 तक आवेदन कर सकते हैं। यह वित्तीय सहायता रूफटॉप सोलर प्लांट की शुरुआती स्थापना लागत को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सुलभ बनाती है।
रोज़गार सृजन और आर्थिक प्रभाव
यूपी नेडा के निदेशक रविन्दर सिंह ने बताया कि प्रदेश में 9,500 से अधिक वेंडर्स के नेटवर्क के माध्यम से सोलर प्लांट की स्थापना, उपकरणों की आपूर्ति, परिवहन, रखरखाव और संबंधित सेवाओं में 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। सोलर मॉड्यूल, इन्वर्टर, बैटरी, केबल, माउंटिंग स्ट्रक्चर और अन्य उपकरणों के विनिर्माण व आपूर्ति से स्थानीय उद्यमों को भी नए अवसर मिल रहे हैं।
आर्थिक मूल्य के आकलन के संदर्भ में, यदि प्रति किलोवाट प्रतिदिन औसतन 4.5 यूनिट बिजली उत्पादन माना जाए तो 3,000 मेगावाट क्षमता से प्रतिदिन लगभग 1.35 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली उत्पादन की क्षमता बनती है। ₹6.50 प्रति यूनिट की सांकेतिक दर से इसका वार्षिक अनुमानित आर्थिक मूल्य लगभग ₹3,202 करोड़ होता है। हालाँकि, वास्तविक उत्पादन और मूल्य धूप, मौसम, प्लांट की कार्यक्षमता तथा लागू बिजली दरों पर निर्भर करता है।
आगे की राह
रूफटॉप सोलर का यह निरंतर विस्तार प्रदेश की हरित अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा आधारित विकास को नई दिशा दे रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है और राज्य स्तरीय सौर नीतियाँ राष्ट्रीय लक्ष्यों की रीढ़ बन रही हैं। 31 मार्च 2027 तक आवेदन की खुली खिड़की यह सुनिश्चित करती है कि अभी भी बड़ी संख्या में घरेलू उपभोक्ता इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।