7 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीएम सूर्य घर योजना में उत्तर प्रदेश देशभर में अव्वल, 9.53 लाख रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीएम सूर्य घर योजना में उत्तर प्रदेश देशभर में अव्वल, 9.53 लाख रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित

सारांश

पीएम सूर्य घर योजना में उत्तर प्रदेश ने गुजरात और महाराष्ट्र को पछाड़कर देशभर में पहला स्थान हासिल किया। 9.53 लाख से अधिक रूफटॉप इंस्टॉलेशन, ₹8,454.5 करोड़ की सब्सिडी और 1 लाख नए रोज़गार — यह उपलब्धि सिर्फ एक रैंकिंग नहीं, बल्कि यूपी के ऊर्जा परिदृश्य में बड़े बदलाव का संकेत है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश ने 5 नवंबर 2026 तक 9,53,201 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कर पीएम सूर्य घर योजना में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
प्रदेश ने संचयी इंस्टॉलेशन में गुजरात और महाराष्ट्र को पीछे छोड़ा; अक्टूबर 2026 में अकेले 75,031 से अधिक नई स्थापनाएँ हुईं।
केंद्र और राज्य मिलाकर ₹8,454.5 करोड़ से अधिक की सब्सिडी प्रदान की गई — केंद्र से ₹6,254.5 करोड़ , यूपी सरकार से ₹2,200 करोड़ से अधिक ।
कुल 3,167.57 मेगावाट स्थापित क्षमता से प्रतिदिन 1.42 करोड़ यूनिट बिजली और सालाना ₹3,380 करोड़ का अनुमानित आर्थिक लाभ।
प्रतिवर्ष लगभग 35 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी का अनुमान।
प्रदेश में 8,700 से अधिक सोलर वेंडर्स और 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोज़गार अवसर सृजित।

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में उत्तर प्रदेश ने 5 नवंबर 2026 तक 9,53,201 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कर संचयी इंस्टॉलेशन में देशभर में पहला स्थान हासिल कर लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने गुजरात और महाराष्ट्र को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि अर्जित की है।

मुख्य उपलब्धियाँ और आँकड़े

यूपी नेडा (UPNEDA) के निदेशक रविन्द्र कुमार के अनुसार, अक्टूबर 2026 में अकेले 75,031 से अधिक नए इंस्टॉलेशन के साथ उत्तर प्रदेश ने मासिक रैंकिंग में भी शीर्ष स्थान बनाए रखा। प्रदेश में अब कुल 3,167.57 मेगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित हो चुकी है, जो प्रतिदिन लगभग 1.42 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली उत्पन्न करने में सक्षम है।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार देश की सौर ऊर्जा क्षमता को तेज़ी से बढ़ाने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित कर रही है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश एक दशक पहले तक ऊर्जा घाटे के लिए जाना जाता था।

वित्तीय सहयोग और सब्सिडी

इस उपलब्धि की नींव में ₹8,454.5 करोड़ से अधिक की संयुक्त सब्सिडी है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से ₹6,254.5 करोड़ और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से ₹2,200 करोड़ से अधिक की अतिरिक्त सब्सिडी शामिल है। इस दोहरे वित्तीय सहयोग ने आम परिवारों के लिए रूफटॉप सोलर को किफायती बनाया है।

विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी सब्सिडी का यह संयोजन उन परिवारों के लिए निर्णायक साबित हुआ है जो पहले प्रारंभिक पूंजी लागत के कारण सौर ऊर्जा से दूर थे।

आम जनता पर आर्थिक और पर्यावरणीय असर

आँकड़ों के अनुसार, यदि प्रति यूनिट बिजली का मूल्य ₹6.50 माना जाए, तो स्थापित क्षमता से प्रतिदिन लगभग ₹9.26 करोड़ और सालाना लगभग ₹3,380 करोड़ का आर्थिक लाभ उपभोक्ताओं को मिल सकता है। रूफटॉप सोलर का एक और बड़ा फायदा भू-उपयोग की बचत है — 3,167.57 मेगावाट की समान क्षमता का ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्लांट बनाने में लगभग 12,670 एकड़ भूमि की आवश्यकता होती।

पर्यावरण के मोर्चे पर, वर्तमान स्थापित क्षमता से प्रतिवर्ष लगभग 35 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी का अनुमान लगाया गया है। यह कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने में भी सहायक है।

रोज़गार और उद्यमिता के नए अवसर

इस योजना ने प्रदेश में 8,700 से अधिक राज्य-सूचीबद्ध सोलर वेंडर्स को सक्रिय किया है और 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार अवसर सृजित हुए हैं। सोलर मॉड्यूल, इन्वर्टर, बैटरी, माउंटिंग स्ट्रक्चर, इंस्टॉलेशन, लॉजिस्टिक्स और मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।

इस संपूर्ण वैल्यू चेन से प्रतिदिन लगभग ₹45–50 करोड़ के व्यावसायिक अवसरों का अनुमान है। यमुना एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे बुनियादी ढाँचे से उत्तर प्रदेश उत्तर, मध्य एवं पूर्वी भारत के लिए एक प्रमुख ग्रीन एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स केंद्र बनने की स्थिति में है।

आगे की राह

यूपीएनईडीए, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL), विद्युत वितरण निगमों, बैंकिंग संस्थानों और सोलर वेंडर्स का समन्वित प्रयास इस उपलब्धि का आधार रहा है। इस योजना की सफलता ने यह संकेत दिया है कि रूफटॉप सोलर केवल बिजली बिल में बचत का साधन नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास, स्थानीय उद्यमिता और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का व्यापक आधार बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इंस्टॉलेशन की संख्या और वास्तविक उपभोक्ता लाभ के बीच का अंतर अभी स्पष्ट नहीं है — 9.53 लाख प्लांटों में से कितने सक्रिय रूप से ग्रिड को बिजली दे रहे हैं, यह डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया। ₹8,454.5 करोड़ की सब्सिडी एक बड़ा सार्वजनिक निवेश है, और इसका मापन केवल इंस्टॉलेशन गिनती से नहीं, बल्कि प्रति परिवार औसत बिजली बचत और कार्बन कटौती के सत्यापित आँकड़ों से होना चाहिए। सोलर वैल्यू चेन में प्रतिदिन ₹45–50 करोड़ की आर्थिक गतिविधि का अनुमान उत्साहजनक है, पर यह देखना ज़रूरी होगा कि यह लाभ स्थानीय छोटे उद्यमियों तक पहुँच रहा है या बड़े वेंडर नेटवर्क तक सीमित है।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर कैसे पहुँचा?
उत्तर प्रदेश ने 5 नवंबर 2026 तक 9,53,201 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कर गुजरात और महाराष्ट्र को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान हासिल किया। यूपीएनईडीए, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन, बैंकिंग संस्थानों और सोलर वेंडर्स के समन्वित प्रयास और ₹8,454.5 करोड़ की सब्सिडी इसकी प्रमुख वजह रही।
इस योजना से उत्तर प्रदेश के आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
स्थापित 3,167.57 मेगावाट क्षमता से प्रतिदिन लगभग 1.42 करोड़ यूनिट बिजली उत्पन्न होती है, जिससे सालाना लगभग ₹3,380 करोड़ की बचत का अनुमान है। बिजली बिल में कमी, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और कार्बन उत्सर्जन में कटौती इस योजना के प्रमुख लाभ हैं।
केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने कितनी सब्सिडी दी है?
केंद्र सरकार ने ₹6,254.5 करोड़ और उत्तर प्रदेश सरकार ने ₹2,200 करोड़ से अधिक की अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान की है, जो मिलाकर ₹8,454.5 करोड़ से अधिक बनती है। यह वित्तीय सहयोग रूफटॉप सोलर को आम परिवारों के लिए किफायती बनाने में सहायक रहा है।
इस योजना से उत्तर प्रदेश में कितने रोज़गार के अवसर पैदा हुए हैं?
योजना के तहत प्रदेश में 8,700 से अधिक राज्य-सूचीबद्ध सोलर वेंडर्स कार्यरत हैं और 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार अवसर सृजित हुए हैं। सोलर वैल्यू चेन में प्रतिदिन लगभग ₹45–50 करोड़ के व्यावसायिक अवसरों का अनुमान है।
रूफटॉप सोलर के पर्यावरणीय लाभ क्या हैं?
वर्तमान स्थापित क्षमता से प्रतिवर्ष लगभग 35 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी का अनुमान है। साथ ही, 3,167.57 मेगावाट की समान क्षमता का ग्राउंड-माउंटेड प्लांट बनाने में आवश्यक लगभग 12,670 एकड़ भूमि की बचत भी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 10 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले