UP के प्रमुख बैराजों में साढ़े नौ साल में सैकड़ों गेट बदले, आपदा से निपटने को स्पेयर गेट तैयार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश के प्रमुख बैराजों, बांधों, हेड रेगुलेटरों और अन्य जल यांत्रिक संरचनाओं के क्षतिग्रस्त गेटों को बड़े पैमाने पर बदला है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को निर्बाध सिंचाई सुविधा देना और बाढ़ तथा आपदा की स्थिति में जल संरचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लखनऊ से मिली जानकारी के अनुसार, कई बैराजों के लिए आपातकालीन उपयोग हेतु स्पेयर गेट भी सुरक्षित रखे गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम: कहाँ-कहाँ बदले गेट
प्रमुख सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन, अनिल गर्ग के अनुसार, पीलीभीत स्थित चुक्का हेड रेगुलेटर के सभी चार गेट पूरी तरह बदले जा चुके हैं। बुलंदशहर स्थित नरौरा बैराज के कुल 61 गेटों में से 13 का प्रतिस्थापन पूरा हो चुका है और शेष 48 गेटों पर काम जारी है।
लखनऊ स्थित गोमती बैराज के सभी 10 गेट नए लगाए जा चुके हैं। एटा स्थित तातारपुर एलजीसी एवं पीएलजीसी कनेक्टिंग रेगुलेटर तथा हेड रेगुलेटर के कुल 20 गेटों का प्रतिस्थापन भी पूर्ण हो गया है।
ओखला से हिंडन तक: आंकड़े दर आंकड़े
दिल्ली स्थित ओखला बैराज के 27 में से 18 गेट बदले जा चुके हैं, और आपात स्थिति के लिए तीन स्पेयर गेट भी तैयार रखे गए हैं। हरिद्वार स्थित भीमगौड़ा बैराज के 22 में से 8 खराब गेट बदले गए हैं। गर्ग ने बताया कि इन सभी गेटों का निर्माण विभाग की आईएसओ प्रमाणित कार्यशालाओं — बरेली और झाँसी — में किया गया है।
रामपुर स्थित कैनरी बैराज के 15 में से 9 गेट, गाजियाबाद स्थित हिंडन बैराज के सभी 8 गेट और अन्य प्रमुख जल संरचनाओं में भी पुराने गेटों का प्रतिस्थापन किया गया है। इसके अलावा हमीरपुर के मौदहा, महोबा के लहचूरा, बिजनौर के खो बैराज, बहराइच के घाघरा बैराज और लखीमपुर खीरी के शारदा बैराज के लिए भी स्पेयर गेट तैयार कर सुरक्षित रखे गए हैं।
पानी के भीतर गेट बदलने की ऐतिहासिक तकनीक
विभाग ने पहली बार अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पानी के भीतर स्थित गेटों को आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक और विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद से सफलतापूर्वक बदला है। ललितपुर स्थित माताटीला बांध, मेजा-जरगो लिंक रेगुलेटर और कचनौदा बांध में लगभग 60 से 70 फीट की गहराई पर स्थित अंडर-स्लूइस गेटों का पानी के भीतर प्रतिस्थापन किया गया। कचनौदा बांध में करीब 60 फीट की गहराई पर दो अंडर-स्लूइस गेट बदले गए हैं और एक स्पेयर गेट सुरक्षित रखा गया है।
चंद्रप्रभा बांध: रिसाव रोकने की विशेष मुहिम
चंदौली के चंद्रप्रभा बांध में लगभग 80 फीट की गहराई पर स्थित अंडर-स्लूइस गेटों से रिसाव की गंभीर समस्या सामने आई थी। इस रिसाव के कारण सिंचाई योग्य पानी की लगातार बर्बादी हो रही थी और आसपास के किसानों में चिंता बढ़ रही थी। अधिकारियों को तत्काल रिसाव रोकने और विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद से स्थायी समाधान निकालने के निर्देश दिए गए, ताकि खरीफ और आगामी फसलों के लिए नहरों में पर्याप्त पानी पहुँचाया जा सके।
आगे क्या
मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह ने कहा कि योगी सरकार का जोर केवल जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि संभावित आपदा से निपटने की पूर्व-तैयारी पर भी है। उनके अनुसार प्रमुख बैराजों पर स्पेयर गेट इसलिए सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि किसी गेट में अचानक खराबी आने पर बिना समय गंवाए उसे बदला जा सके। गौरतलब है कि नरौरा बैराज के शेष 48 गेटों का प्रतिस्थापन अभी जारी है — यह कार्य पूरा होने पर प्रदेश की जल प्रबंधन क्षमता और अधिक सुदृढ़ होगी।