14 जुलाई 2026
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यूपी में ईवी चार्जिंग नेटवर्क विस्तार: मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने विभागों को भूमि सूची सौंपने के दिए निर्देश

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यूपी में ईवी चार्जिंग नेटवर्क विस्तार: मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने विभागों को भूमि सूची सौंपने के दिए निर्देश

सारांश

उत्तर प्रदेश में ईवी चार्जिंग नेटवर्क विस्तार की रफ्तार बढ़ी — मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने 14 जुलाई को सभी विभागों को भूमि सूची यूपीआरईवी को सौंपने के निर्देश दिए। शहरी क्षेत्रों में 400-600 वर्ग फुट और एक्सप्रेसवे पर 3,000 वर्ग फुट भूमि की पहचान होगी। यह प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत राज्य का अब तक का सबसे संगठित कदम है।

मुख्य बातें

गोयल ने 14 जुलाई को सभी विभागों और प्राधिकरणों को ईवी चार्जिंग स्टेशन हेतु भूमि की सूची यूपीआरईवी को सौंपने के निर्देश दिए।
प्राथमिकता में विभागीय कार्यालय परिसर , नगर निकायों के पार्किंग स्थल , औद्योगिक क्षेत्र , लॉजिस्टिक पार्क और एक्सप्रेसवे कॉरिडोर शामिल हैं।
शहरी क्षेत्रों में 400-600 वर्ग फुट और राजमार्ग-एक्सप्रेसवे पर 3,000 वर्ग फुट भूमि की आवश्यकता निर्धारित की गई।
प्रत्येक स्थल का पूरा पता, फोटोग्राफ, अक्षांश-देशांतर और भूमि क्षेत्रफल दर्ज करना अनिवार्य।
राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश; यह पहल प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत है।

उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशनों का व्यापक नेटवर्क खड़ा करने की कवायद 14 जुलाई को उस समय और तेज हो गई, जब मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने राज्य के सभी विभागों और प्राधिकरणों को अपने अधीन भूमि एवं सार्वजनिक स्थलों की पहचान कर चार्जिंग स्टेशन स्थापना हेतु प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। यह निर्देश लखनऊ में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में जारी किए गए।

बैठक में क्या हुआ

मंगलवार, 14 जुलाई को लखनऊ में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग अवसंरचना के विकास की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना उत्तर प्रदेश में स्वच्छ, हरित और सतत परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित विभागों और प्राधिकरणों के समन्वित प्रयासों से आधुनिक चार्जिंग अवसंरचना का तेजी से विकास किया जाए, ताकि आम नागरिकों को सुलभ चार्जिंग सुविधाएं मिल सकें।

किन स्थलों को मिलेगी प्राथमिकता

मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि सभी विभाग अपने कार्यालय परिसरों, उपलब्ध सरकारी भूमि और उपयुक्त सार्वजनिक स्थलों का सर्वेक्षण कर ईवी चार्जिंग स्टेशन के लिए उपयुक्त जगहों की पहचान करें। इन स्थलों का विवरण निर्धारित प्रारूप में यूपी रिन्यूएबल एंड ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (यूपीआरईवी) को उपलब्ध कराया जाए। प्राथमिकता सूची में विभागीय कार्यालय परिसर, नगर निकायों के पार्किंग स्थल, औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक पार्क, विकास प्राधिकरणों की भूमि तथा राज्य राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर स्थित उपयुक्त स्थल शामिल हैं।

भूमि की आवश्यकता और तकनीकी मानक

बैठक में बताया गया कि शहरी क्षेत्रों में ईवी चार्जिंग स्टेशन के लिए लगभग 400 से 600 वर्ग फुट भूमि उपयुक्त मानी गई है, जबकि राज्य राजमार्गों और एक्सप्रेसवे कॉरिडोर पर लगभग 3,000 वर्ग फुट भूमि की आवश्यकता होगी। प्रत्येक संभावित स्थल का पूरा पता, फोटोग्राफ, अक्षांश, देशांतर और उपलब्ध भूमि का क्षेत्रफल स्पष्ट रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

समन्वय के लिए नोडल अधिकारी

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव गोयल ने राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के भी निर्देश दिए। विभागों और प्राधिकरणों से अतिरिक्त उपयुक्त स्थलों की पहचान कर उनका विवरण भी उपलब्ध कराने को कहा गया, ताकि प्रदेश में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग नेटवर्क का व्यापक विस्तार सुनिश्चित हो सके।

आम जनता और पर्यावरण पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में तेजी देखी जा रही है, लेकिन चार्जिंग अवसंरचना की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ने से इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, वायु प्रदूषण में कमी आएगी और प्रदेश में स्वच्छ एवं हरित परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि यह पहल केंद्र सरकार की ई-ड्राइव योजना के तहत राज्य स्तर पर क्रियान्वयन की दिशा में एक ठोस कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती भूमि की पहचान से आगे क्रियान्वयन में है — राज्य में पहले भी कई बुनियादी ढाँचा योजनाएं सर्वेक्षण और बैठकों के बाद ठंडे बस्ते में चली गई हैं। यूपीआरईवी जैसी नई एजेंसी को स्थापित करना और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन जब तक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की समयसीमा और जवाबदेही तय नहीं होती, यह प्रक्रिया कागजी कवायद बनने का जोखिम उठाती है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि केंद्र की ई-ड्राइव योजना के तहत राज्यों को धन और लक्ष्य मिले हैं, पर अधिकांश राज्यों में जमीनी प्रगति अपेक्षाओं से पीछे रही है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना क्या है और उत्तर प्रदेश में इसका क्या महत्व है?
प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना केंद्र सरकार की एक पहल है जिसके तहत देश भर में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग अवसंरचना विकसित की जानी है। उत्तर प्रदेश में इसके तहत शहरी क्षेत्रों से लेकर एक्सप्रेसवे तक चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क बिछाया जाएगा, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी आएगी।
यूपीआरईवी क्या है और इसकी इस योजना में क्या भूमिका है?
यूपी रिन्यूएबल एंड ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (यूपीआरईवी) उत्तर प्रदेश सरकार की नोडल एजेंसी है जो ईवी चार्जिंग अवसंरचना के विकास की देखरेख करेगी। सभी विभागों को उपयुक्त भूमि का विवरण इसी एजेंसी को निर्धारित प्रारूप में सौंपना है।
ईवी चार्जिंग स्टेशन के लिए कितनी भूमि की जरूरत होगी?
शहरी क्षेत्रों में ईवी चार्जिंग स्टेशन के लिए लगभग 400 से 600 वर्ग फुट भूमि उपयुक्त मानी गई है। राज्य राजमार्गों और एक्सप्रेसवे कॉरिडोर पर यह आवश्यकता लगभग 3,000 वर्ग फुट तक है।
किन स्थानों को ईवी चार्जिंग स्टेशन के लिए प्राथमिकता दी जाएगी?
विभागीय कार्यालय परिसर, नगर निकायों के पार्किंग स्थल, औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक पार्क, विकास प्राधिकरणों की उपलब्ध भूमि और राज्य राजमार्गों व एक्सप्रेसवे पर स्थित उपयुक्त स्थलों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया जाएगा।
इस योजना से आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ने से आम नागरिकों को सुलभ चार्जिंग सुविधाएं मिलेंगी, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन अपनाना आसान होगा। इससे वायु प्रदूषण में कमी आएगी और प्रदेश में स्वच्छ एवं हरित परिवहन व्यवस्था को बल मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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