UP कानून-व्यवस्था पर AAP के संजय सिंह का हमला: NCRB आंकड़े, बिजली संकट और NEET पर केंद्र को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने 29 मई को उत्तर प्रदेश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, गहराते बिजली संकट, निर्माण हादसों, नीट यूजी परीक्षा की खामियों और महाराष्ट्र में जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताज़ा आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि योगी सरकार के दावे और ज़मीनी हकीकत में भारी अंतर है।
NCRB आंकड़े और कानून-व्यवस्था
संजय सिंह ने कहा कि NCRB के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में दलित उत्पीड़न, बलात्कार और अन्य अपराधों के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सुशासन के दावे करती है, लेकिन सरकारी आंकड़े ही उसकी पोल खोल रहे हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश लंबे समय से दलित अत्याचार के मामलों में राष्ट्रीय सूची में शीर्ष राज्यों में रहा है।
बिजली संकट और बाराबंकी हादसा
बिजली कटौती के मुद्दे पर संजय सिंह ने बाराबंकी की एक दर्दनाक घटना का उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर बिजली न होने के कारण लोग सड़क किनारे सोने पर मजबूर हुए और एक वाहन ने उन्हें कुचल दिया। उन्होंने राज्य के ऊर्जा मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जब बिजली कटौती का सवाल उठाया जाता है, तो मंत्री जवाबदेही से बचने के लिए केवल 'जय श्रीराम' कहकर बात टाल देते हैं।
निर्माण हादसे और भ्रष्टाचार के आरोप
हमीरपुर में निर्माणाधीन स्लैब गिरने की घटना पर दुख जताते हुए संजय सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। उनके अनुसार एक्सप्रेसवे, फ्लाईओवर और जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में भारी अनियमितताएँ हो रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार इन्हीं परियोजनाओं को अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
NEET यूजी और महाराष्ट्र जहरीली शराब
नीट यूजी परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए संजय सिंह ने कहा कि यह अत्यंत शर्मनाक है कि देश एक पारदर्शी परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित नहीं कर पा रहा। महाराष्ट्र में जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार को कठघरे में खड़ा किया और कहा कि जहाँ शराबबंदी लागू है, वहाँ भी लोग ज़हरीली शराब की भेंट चढ़ रहे हैं — और प्रधानमंत्री को इस पर सार्वजनिक जवाब देना चाहिए।
संजय सिंह के ये बयान उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार दोनों पर विपक्षी दबाव की बढ़ती मुहिम का हिस्सा हैं। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर संसद में भी तीखी बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।