उत्तर प्रदेश में विद्यालयों में नवदुर्गा की महिमा, 2.33 लाख बच्चों ने बनाए शक्ति के प्रतीक

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उत्तर प्रदेश में विद्यालयों में नवदुर्गा की महिमा, 2.33 लाख बच्चों ने बनाए शक्ति के प्रतीक

सारांश

उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर नवदुर्गा के नौ स्वरूपों पर आधारित पोस्टर निर्माण का आयोजन किया गया। 2.33 लाख बच्चों ने इसमें भाग लिया, जिससे नारी शक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ी।

Key Takeaways

  • 2.33 लाख बच्चों ने मिलकर नवदुर्गा के नौ स्वरूपों पर आधारित पोस्टर बनाए।
  • इस अभियान ने नारी शक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाई।
  • 'मिशन शक्ति' का उद्देश्य बालिकाओं का सशक्तिकरण है।
  • विद्यालयों में सामाजिक चेतना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।
  • कार्यक्रम ने बच्चों में आत्मविश्वास और रचनात्मकता को बढ़ावा दिया।

लखनऊ, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में आस्था, रचनात्मकता और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। ‘मिशन शक्ति’ के छठे चरण के पहले दिन, प्रदेश के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) में नवदुर्गा के नौ स्वरूपों पर आधारित पोस्टर निर्माण और चर्चा का व्यापक आयोजन किया गया।

इस विशेष अभियान के तहत 2.33 लाख बच्चों ने नवदुर्गा के नौ स्वरूपों - शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री पर आधारित आकर्षक पोस्टर तैयार किए। इन कलात्मक अभिव्यक्तियों में शक्ति, साहस, करुणा और आत्मनिर्भरता के भावों को प्रभावी ढंग से उकेरा गया। विद्यालयों में सजी रंग-बिरंगी कृतियों ने न केवल बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को नई उड़ान दी, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि नई पीढ़ी नारी शक्ति को केवल पूजनीय नहीं, बल्कि परिवर्तन और नेतृत्व की प्रेरक शक्ति के रूप में स्वीकार कर रही है।

बेसिक शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश, संदीप सिंह ने कहा कि 'मिशन शक्ति' के माध्यम से प्रदेश सरकार बालिकाओं को सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर नवदुर्गा के स्वरूपों के माध्यम से बच्चों को नारी शक्ति के वास्तविक स्वरूप से परिचित कराना एक अभिनव पहल है। यह कार्यक्रम सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने वाला है और बालिकाओं के भीतर आत्मविश्वास तथा नेतृत्व क्षमता का विकास करने में सहायक है।

इस अवसर पर विद्यालयों में नवदुर्गा के प्रत्येक स्वरूप से जुड़ी विशेषताओं जैसे साहस, संयम, सेवा, ज्ञान और नेतृत्व को बालिकाओं के व्यक्तित्व विकास से जोड़कर विस्तार से समझाया गया। इससे विद्यार्थियों में यह विश्वास और मजबूत हुआ कि वे भी इन गुणों को आत्मसात कर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। आयोजित चर्चाओं में बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वाभिमान और अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक संवाद हुआ।

शिक्षकों ने विद्यार्थियों को बताया कि ‘मिशन शक्ति’ केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि लैंगिक समानता स्थापित करने का एक व्यापक सामाजिक आंदोलन है। पूरे आयोजन का केंद्र बिंदु बालिका सशक्तिकरण रहा। इस दौरान बालिकाओं ने निर्भीक होकर अपने विचार साझा किए, अपने सपनों को स्वर दिया और यह संदेश दिया कि वे अब सीमाओं में बंधने वाली नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित करने के लिए तैयार हैं।

यह अभियान विद्यालयों की चारदीवारी से निकलकर अभिभावकों और स्थानीय समुदाय तक भी पहुंचा, जिससे समाज में सकारात्मक जागरूकता का वातावरण निर्मित हुआ। उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा के महानिदेशक मोनिका रानी ने कहा कि ‘मिशन शक्ति’ के अंतर्गत नवदुर्गा के नौ स्वरूपों पर आधारित यह गतिविधियां बालिकाओं के भीतर आत्मविश्वास, आत्मबल और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सशक्त माध्यम है। इस अवसर पर विद्यार्थियों को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हुए उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी जा रही है।

Point of View

बल्कि यह नारी शक्ति के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास भी है। 'मिशन शक्ति' का यह कदम बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।
NationPress
20/03/2026

Frequently Asked Questions

मिशन शक्ति क्या है?
मिशन शक्ति एक सरकारी पहल है, जिसका उद्देश्य बालिकाओं को सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है।
इस कार्यक्रम में कितने बच्चों ने भाग लिया?
इस कार्यक्रम में 2.33 लाख बच्चों ने भाग लिया।
नवदुर्गा के कितने स्वरूपों पर पोस्टर बनाए गए?
नवदुर्गा के नौ स्वरूपों पर पोस्टर तैयार किए गए।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नारी शक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बच्चों में आत्मविश्वास का विकास करना है।
क्या यह केवल एक सरकारी पहल है?
नहीं, यह लैंगिक समानता स्थापित करने के लिए एक व्यापक सामाजिक आंदोलन भी है।
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