उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी ने रेस्टोरेंट में जाकर रसोई गैस आपूर्ति का लिया जायजा
सारांश
Key Takeaways
- सीएम धामी ने रसोई गैस आपूर्ति की स्थिति का अवलोकन किया।
- गैस संकट की स्थिति अभी गंभीर नहीं है।
- रेस्टोरेंट संचालक गैस की खपत कम करने के लिए तंदूर का उपयोग कर रहे हैं।
- सरकार वैकल्पिक ऊर्जा के लिए प्रबंध करने को तैयार है।
- उत्तराखंड में मौन पालन की अपार संभावनाएं हैं।
देहरादून, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को गढ़ी कैंट क्षेत्र के एक रेस्टोरेंट का दौरा किया और रसोई गैस की आपूर्ति की स्थिति का अवलोकन किया। यह जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से साझा की।
मुख्यमंत्री धामी ने सभी होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि गैस संकट की स्थिति फिलहाल गंभीर नहीं है। हालांकि, यदि भविष्य में कोई समस्या आई, तो देशवासियों को एकजुट होकर इसका सामना करना होगा, जैसा कि कोरोना काल में किया गया था।
सीएम ने रेस्टोरेंट के संचालक से गैस आपूर्ति के बारे में जानकारी ली। संचालक ने बताया कि सप्लाई में थोड़ी कमी आई है, लेकिन वर्तमान में गैस की उपलब्धता सामान्य है। उन्होंने कहा कि गैस की खपत कम करने के लिए वे तंदूर का अधिक उपयोग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए प्रशासन को वैकल्पिक ऊर्जा के लिए आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभी गैस की सप्लाई ठीक है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इसे सुचारू रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने सभी होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के साथ-साथ आम लोगों से अपील की कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो हमें एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करना होगा। जिस तरह से देश ने कोरोना काल में एकजुटता दिखाई, उसी तरह का धैर्य इस बार भी आवश्यक है।
मुख्यमंत्री धामी ने आगे कहा कि गैस के विकल्प के तौर पर इंडक्शन समेत अन्य विकल्पों का उपयोग किया जाना चाहिए। सरकार हर प्रकार से लोगों की सहायता करने के लिए तत्पर है।
मुख्यमंत्री ने आवास परिसर में शहद निष्कासन कार्य का भी निरीक्षण किया। उन्होंने उद्यान विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री आवास परिसर और आस-पास के क्षेत्र में 3-बी गार्डन विकसित करने पर कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में मौन पालन की अपार संभावनाएं हैं और यहाँ विभिन्न प्रकार के फूलों की प्रजातियाँ उपलब्ध हैं, जो जैविक शहद उत्पादन में सहायक हैं।