काशीपुर में STF का बड़ा ऑपरेशन: 3 फर्जी शस्त्र लाइसेंस धारक गिरफ्तार, 3 पिस्टल व 65 कारतूस बरामद
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और जिला पुलिस की संयुक्त देर-रात कार्रवाई में 5 जून 2026 को तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया, जिन पर उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से निर्गत दर्शाए गए फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के आधार पर हथियार खरीदने का आरोप है। आरोपियों के कब्जे से तीन सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और 65 कारतूस बरामद किए गए हैं।
गिरफ्तारी और बरामदगी का विवरण
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नौशाद हुसैन, जतिन कंडपाल और अजीम के रूप में हुई है। नौशाद के कब्जे से 30 बोर पिस्टल और 28 कारतूस, जतिन के पास से 32 बोर पिस्टल और 18 कारतूस, तथा अजीम के पास से 30 बोर पिस्टल और 19 कारतूस बरामद किए गए। तीनों के पास फर्जी शस्त्र लाइसेंस भी मिले हैं।
जांच में सामने आया कि इन आरोपियों ने काशीपुर स्थित एक गन हाउस से हथियार खरीदे थे — और इसके लिए जिन लाइसेंस नंबरों का उपयोग किया गया, वे वास्तव में अन्य व्यक्तियों के नाम पर दर्ज थे।
जांच कैसे शुरू हुई
काशीपुर कोतवाली में पहले से 10 फर्जी शस्त्र लाइसेंस धारकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज था। दस्तावेजों के सत्यापन के लिए शाहजहांपुर जिलाधिकारी कार्यालय से संपर्क किया गया, जहाँ पुष्टि हुई कि संबंधित व्यक्तियों के नाम पर कोई शस्त्र लाइसेंस जारी ही नहीं किया गया था।
एसएसपी STF अजय सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के 'अपराध मुक्त उत्तराखंड' विजन और पुलिस महानिदेशक के निर्देशों के तहत राज्यभर में चलाए जा रहे उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसमें बाहरी राज्यों से स्थानांतरित शस्त्र लाइसेंसों की जांच की जा रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा
एसएसपी STF अजय सिंह ने कहा कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।
गौरतलब है कि यह मामला केवल तीन व्यक्तियों तक सीमित नहीं है — STF के अनुसार राज्य में हजारों शस्त्र लाइसेंसों का सत्यापन अभी भी जारी है और आने वाले समय में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
आम जनता से अपील
STF ने आमजन से अपील की है कि यदि उन्हें किसी संदिग्ध या फर्जी शस्त्र लाइसेंस की जानकारी मिले, तो वे तत्काल STF को सूचित करें। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान में जनसहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड सरकार संगठित अपराध और अवैध हथियारों की तस्करी के खिलाफ राज्यव्यापी सख्ती बरत रही है। जांच में सामने आने वाले अन्य मामलों में भी लगातार कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।