31 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

वसई-विरार में बिजनेसमैन मोहन परमार पर हमला: यूपी एसटीएफ ने दो कथित शूटर बलिया और आजमगढ़ से दबोचे

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
वसई-विरार में बिजनेसमैन मोहन परमार पर हमला: यूपी एसटीएफ ने दो कथित शूटर बलिया और आजमगढ़ से दबोचे

सारांश

महाराष्ट्र के वसई-विरार में बिजनेसमैन मोहन परमार पर 24 जुलाई को हुए जानलेवा हमले के दो कथित शूटर यूपी से गिरफ्तार हुए — यह यूपी एसटीएफ और महाराष्ट्र पुलिस की बढ़ती अंतर-राज्यीय समन्वय क्षमता का संकेत है, जो हाल के हफ्तों में कई बड़े मामलों में सामने आई है।

मुख्य बातें

मोहन परमार को 24 जुलाई को वसई-विरार में उनके ऑफिस से निकलते वक्त गोली मारी गई; वे अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं।
कथित शूटर सुजीत पांडे को बलिया और मनोज ठठेरा को आजमगढ़ से गिरफ्तार किया गया।
29 जुलाई को यूपी एटीएस ने मुर्शिदाबाद से जाली भारतीय दस्तावेज बनाने वाले अंतर-राज्यीय गिरोह के मास्टरमाइंड को पकड़ा; आरोपी पर ₹25,000 का इनाम था।
19 जुलाई को दिल्ली से नाइजीरियाई नागरिक ओबेस प्रॉस्पर गिरफ्तार; उसके पास 5.085 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमत ₹10 करोड़ से अधिक।
तीनों मामलों में यूपी एसटीएफ/एटीएस की अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी।

महाराष्ट्र के वसई-विरार में बिजनेसमैन मोहन परमार पर जानलेवा हमले के मामले में यूपी एसटीएफ और महाराष्ट्र पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर दो कथित शूटरों को गिरफ्तार किया है। आरोपी सुजीत पांडे को बलिया और मनोज ठठेरा को आजमगढ़ से पकड़ा गया। परमार को 24 जुलाई को उनके कार्यालय से बाहर निकलते वक्त गोली मारी गई थी और वे अभी भी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मोहन परमार पर हमला 24 जुलाई को उस वक्त हुआ जब वे अपने ऑफिस से बाहर निकल रहे थे। हमलावरों ने गोली चलाकर उन्हें घायल कर दिया और फिर उत्तर प्रदेश की ओर फरार हो गए। घटना के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने संदिग्धों की उत्तर प्रदेश में मौजूदगी की सूचना मिलने पर यूपी एसटीएफ से सहयोग माँगा। इसके बाद दोनों एजेंसियों ने मिलकर अभियान चलाया और दोनों आरोपियों को धर दबोचा।

संयुक्त अभियान कैसे हुआ सफल

अधिकारियों के अनुसार, संदिग्धों के यूपी भागने की जानकारी मिलते ही महाराष्ट्र पुलिस ने यूपी एसटीएफ के साथ समन्वय स्थापित किया। तकनीकी निगरानी और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर सुजीत पांडे को बलिया और मनोज ठठेरा को आजमगढ़ से गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों को अब महाराष्ट्र पुलिस को सौंपने की प्रक्रिया जारी है।

यूपी में अन्य हालिया कार्रवाइयाँ

इससे पहले 29 जुलाई को यूपी एटीएस ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज से एक अंतर-राज्यीय गिरोह के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया था। यह गिरोह कथित तौर पर रोहिंग्या, बांग्लादेशी, नेपाली और अन्य विदेशी नागरिकों के लिए जाली भारतीय आधार कार्ड समेत अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार करता था। इस आरोपी पर ₹25,000 का इनाम घोषित था।

इसके अलावा 19 जुलाई को यूपी एसटीएफ ने दिल्ली के राजू पार्क, साउथ दिल्ली से एक नाइजीरियाई नागरिक ओबेस प्रॉस्पर (27 वर्ष) को गिरफ्तार किया था। वह कथित तौर पर फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल के ज़रिए भारतीय नागरिकों को निशाना बनाकर ऑनलाइन धोखाधड़ी का रैकेट चला रहा था। अधिकारियों के अनुसार, वह 2023 में मेडिकल वीज़ा पर भारत आया था और वीज़ा समाप्त होने के बाद भी अवैध रूप से देश में रह रहा था।

बरामदगी और अंतरराष्ट्रीय तस्करी का कनेक्शन

एसटीएफ ने ओबेस प्रॉस्पर के पास से 5.085 किलोग्राम मेथामफेटामाइन, पाँच मोबाइल फोन और दो पासपोर्ट बरामद किए। अधिकारियों के अनुसार, जब्त नशीले पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमत ₹10 करोड़ से अधिक आँकी गई है। यह मामला दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांज़िट बिंदु बन रहा है।

आगे की कार्रवाई

वसई-विरार हमले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और अन्य संभावित साजिशकर्ताओं की तलाश की जा रही है। मोहन परमार की हालत के बारे में अधिकारियों ने बताया कि वे अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब यूपी एसटीएफ और एटीएस ने लगातार अंतर-राज्यीय अपराध नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तेज की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि हमले के पीछे किसका हाथ है और क्या मास्टरमाइंड तक पहुँचा जाएगा। साथ ही, एक ही महीने में यूपी में जाली दस्तावेज गिरोह, अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और अंतर-राज्यीय शूटर नेटवर्क — तीन अलग-अलग मामले — यह संकेत देते हैं कि उत्तर प्रदेश संगठित अपराध का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है, जिस पर नीति-निर्माताओं को गंभीरता से ध्यान देना होगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन परमार पर हमला कब और कहाँ हुआ?
बिजनेसमैन मोहन परमार पर 24 जुलाई को महाराष्ट्र के वसई-विरार में उनके कार्यालय से बाहर निकलते समय गोली मारी गई। वे अभी भी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
गिरफ्तार शूटर कौन हैं और उन्हें कहाँ से पकड़ा गया?
दोनों कथित शूटरों की पहचान सुजीत पांडे और मनोज ठठेरा के रूप में हुई है। सुजीत पांडे को बलिया और मनोज ठठेरा को आजमगढ़ से यूपी एसटीएफ और महाराष्ट्र पुलिस के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया गया।
यूपी एसटीएफ इस मामले में कैसे शामिल हुई?
संदिग्धों के उत्तर प्रदेश भाग जाने की जानकारी मिलने पर महाराष्ट्र पुलिस ने यूपी एसटीएफ से सहायता माँगी। इसके बाद दोनों एजेंसियों ने मिलकर अभियान चलाया और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
यूपी एटीएस ने जाली दस्तावेज मामले में किसे गिरफ्तार किया?
29 जुलाई को यूपी एटीएस ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज से एक अंतर-राज्यीय गिरोह के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया, जो रोहिंग्या, बांग्लादेशी और अन्य विदेशी नागरिकों के लिए जाली भारतीय दस्तावेज तैयार करता था। इस आरोपी पर ₹25,000 का इनाम घोषित था।
दिल्ली से गिरफ्तार नाइजीरियाई नागरिक पर क्या आरोप हैं?
19 जुलाई को यूपी एसटीएफ ने दिल्ली के राजू पार्क से नाइजीरियाई नागरिक ओबेस प्रॉस्पर (27 वर्ष) को गिरफ्तार किया। वह कथित तौर पर फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल के ज़रिए ऑनलाइन धोखाधड़ी का रैकेट चला रहा था और उसके पास से 5.085 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद हुई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमत ₹10 करोड़ से अधिक आँकी गई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले