वाटिका ग्रुप के CMD अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला गिरफ्तार, ₹260 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने 30 सितंबर 2026 को वाटिका लिमिटेड (वाटिका ग्रुप) के चेयरमैन-सह-मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 की धारा 19 के अंतर्गत की गई है। मामला गुरुग्राम के दो आवासीय प्लॉट प्रोजेक्ट में खरीदारों से वसूले गए करीब ₹260 करोड़ के दुरुपयोग से जुड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने मेसर्स वाटिका लिमिटेड, अनिल भल्ला, गौतम भल्ला, गौरव भल्ला और अन्य के विरुद्ध PMLA के तहत प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की थी। यह ECIR दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज कई प्राथमिकियों के आधार पर है, जिनमें धोखाधड़ी, आवासीय प्लॉट न देने और संबंधित अपराधों के आरोप शामिल हैं।
जांच के अनुसार, 2010 से 2012 के बीच सात खरीदार कंपनियों ने गुरुग्राम के वाटिका इंडिया नेक्स्ट (सेक्टर 84/85) और वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 (सेक्टर 88ए) परियोजनाओं में आवासीय प्लॉट के लिए बिक्री की पूरी राशि के रूप में करीब ₹260 करोड़ अग्रिम भुगतान किया था। 2014 और 2015 में प्लॉट-वार एग्रीमेंट भी निष्पादित किए गए थे।
मुख्य घटनाक्रम और आरोप
ईडी की जांच में सामने आया कि बाद में परियोजनाओं के लेआउट में बदलाव कर दिए गए — पहले से आवंटित प्लॉट नंबर बदले गए और उन्हें अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया। उसी भूमि को अन्य खरीदारों को आवंटित और बेचा जाता रहा।
वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 में करीब ₹90 करोड़ में खरीदे गए लगभग 1.10 लाख वर्ग गज में से एक भी प्लॉट 14 वर्ष बाद तक डिलीवर नहीं किया गया। वाटिका इंडिया नेक्स्ट में भी केवल आंशिक डिलीवरी हुई। इस प्रकार आज भी लगभग ₹140.73 करोड़ मूल्य के प्लॉट अधूरे हैं।
जांच में यह भी पाया गया कि परियोजना की भूमि लगभग 22 ग्रुप कंपनियों के माध्यम से रखी गई थी। इन कंपनियों में कोई कर्मचारी नहीं था और न ही इनका कोई स्वतंत्र व्यवसाय था। इनका उपयोग मुख्यतः कॉर्पोरेट गारंटी देने और भूमि बैंक प्रबंधन के लिए किया जाता था, जिसमें वित्तीय संस्थानों के पास भूमि को गिरवी रखना भी शामिल है।
धनराशि के दुरुपयोग का विवरण
मेसर्स वाटिका लिमिटेड के बैंक खातों की जांच में पता चला कि खरीदारों से प्राप्त धनराशि केवल संबंधित परियोजनाओं में उपयोग नहीं की गई। यह राशि अन्य ग्रुप कंपनियों और प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं में स्थानांतरित कर दी गई, जो इन परियोजनाओं का हिस्सा भी नहीं थीं।
एक अलग मामले में 2024 में स्केलर वेंचर्स ने एक एग्रीमेंट टू सेल और बाय-बैक एग्रीमेंट के तहत ₹473.18 करोड़ का भुगतान किया था। इसमें से केवल 165 में से 15 प्लॉट ही वापस खरीदे गए। इसके बाद शेष 150 में से 14 प्लॉट स्केलर की जानकारी या सहमति के बिना तीसरे पक्ष को लगभग ₹13.62 करोड़ में बेच दिए गए। इस मामले में अपराध से हुई कमाई लगभग ₹154.36 करोड़ आंकी गई है।
तलाशी में मिली संपत्ति
ईडी ने PMLA की धारा 17 के तहत सात ठिकानों पर तलाशी की थी। एक आरोपी के आवास से मर्सिडीज-बेंज GLC 300, 1.3 किलो से अधिक सोने और हीरे के आभूषण — जिनका मूल्य लगभग ₹1.55 करोड़ है — और करीब ₹3.04 करोड़ के बैंक खाते व फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें (FDR) बरामद कर फ्रीज की गई हैं।
न्यायिक हिरासत और आगे की कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों — अनिल भल्ला और गौतम भल्ला — को 29 सितंबर को गुरुग्राम की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 3 अक्टूबर 2026 तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है। मामले में जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।