विजयेंद्र ने मोदी की अपील पर बेंगलुरु मेट्रो से किया सफर, कांग्रेस पर ईंधन टैक्स बढ़ाने का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने शनिवार, 16 मई को बेंगलुरु में आधिकारिक कार्यक्रमों के लिए निजी वाहन छोड़कर मेट्रो रेल से यात्रा की। उनका यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के अनुरूप था, जिसमें नागरिकों से वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच ईंधन की बचत करने और सार्वजनिक परिवहन अपनाने का आग्रह किया गया था।
मुख्य घटनाक्रम
विजयेंद्र बेंगलुरु के बाहरी इलाके कुंबलगोडु में एक पार्टी कार्यक्रम में भाग लेने और आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर का आशीर्वाद लेने के लिए 'आर्ट ऑफ़ लिविंग सेंटर' जाने हेतु मेट्रो से यात्रा करते दिखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कार्यक्रम स्थलों तक आने-जाने, दोनों के लिए मेट्रो का ही उपयोग करेंगे।
विजयेंद्र ने कहा, 'हमारे प्रधानमंत्री ने ईंधन बचाने की अपील की है। ऐसे समय में जब दुनिया आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है, देश के हर नागरिक को इस बारे में सोचना चाहिए।' उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम की है और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी इसी सिद्धांत का पालन कर रहे हैं।
ईंधन की कीमतों पर कांग्रेस को पलटवार
ईंधन मूल्यवृद्धि को लेकर विपक्ष की आलोचना पर विजयेंद्र ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने तब भी ईंधन पर अतिरिक्त कर लगाए, जब केंद्र या वैश्विक स्तर पर कीमतों में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हुई थी।
विजयेंद्र ने तीखे लहजे में कहा, 'अगर विपक्षी दल पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, तो मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को तो पिछले साल ही इस्तीफा दे देना चाहिए था।' उन्होंने विपक्ष से 'सिर्फ राजनीति के लिए' बयानबाजी न करने की अपील की।
विपक्ष के नेता आर. अशोक का बयान
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने भी केंद्र सरकार का बचाव करते हुए कांग्रेस शासित राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने वैश्विक युद्धों और अंतरराष्ट्रीय तेल संकटों के बावजूद 49 महीनों तक आम नागरिकों पर ईंधन का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला।
अशोक के अनुसार, यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक रिकॉर्ड है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि उसने जरूरी चीज़ों और सार्वजनिक सेवाओं की कीमतों में बार-बार बढ़ोतरी कर आम जनता पर आर्थिक बोझ डाला है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। गौरतलब है कि ईंधन की कीमतें भारत में केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर लगाए जाने वाले करों से प्रभावित होती हैं, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना रहता है।
आगे क्या
विजयेंद्र के इस प्रतीकात्मक कदम के बाद यह देखना होगा कि भाजपा की 'ईंधन बचाओ' मुहिम कर्नाटक में किस रूप में आगे बढ़ती है और क्या अन्य नेता भी इसी तरह सार्वजनिक परिवहन अपनाते हैं। कांग्रेस और भाजपा के बीच ईंधन कर को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला राज्य की राजनीति में नया मोर्चा खोल सकता है।